आंध्र प्रदेश में लॉन्च हुआ देश का पहला स्वदेशी लंपी वैक्सीन, मुख्यमंत्री नायडू ने की बायोवेट की सराहना

The countrys first indigenous lumpy vaccine launched in Andhra Pradesh. Chief Minister Naidu praised Biovet know its benefits and importance

हलधर किसान आंध्रप्रदेश (पशुपालन)। पशुधन स्वास्थ्य और रोगों की रोकथाम की दिशा में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने विजयवाड़ा में देश में विकसित लंपी स्किन डिजीज वैक्सीन बायोलम्पिवैक्सिन को लॉन्च किया। इसे भारत बायोटेक की सहायक कंपनी बायोवेट ने बाजार में उतारा है।   

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद  के भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर और राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित बायोलम्पिवैक्सिन को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन  से अनुमोदन प्राप्त है। यह दुनिया की पहली और सबसे सुरक्षित डिफरेंशिएटिंग इंफेक्टेड फ्रॉम वैक्सीनेटेड एनिमल्स  मार्कर वैक्सीन है, जो रोग की निगरानी और पशुओं को लंपी बीमारी से बचाने में मददगार होगी। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस अभूतपूर्व वैक्सीन के विकास और व्यावसायीकरण के लिए बायोवेट की सराहना की। उन्होंने बायोलम्पिवैक्सिन के प्रभावी प्रसार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यह राज्य के पशुधन क्षेत्र में 20% वृद्धि के लक्ष्य को प्राप्त करने में मददगार हो सकता है, साथ ही डेयरी उद्योग के लिए भी कारगर साबित होगा। 

बायोवेट के संस्थापक और भारत बायोटेक के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. कृष्णा एला ने वैक्सीन लॉन्च के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए इसे लंपी स्किन डिजीज के उन्मूलन की दिशा में एक अहम कदम बताया। उन्होंने राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में पशुधन के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया और इस क्षेत्र की सुरक्षा व आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता दोहराई।

बायोलम्पिवैक्सिन एक लाइव-अटेन्युएटेड मार्कर वैक्सीन है, जिसे ICAR-NRCE, हिसार द्वारा 2019 में पहचाने गए एलएसडी वायरस स्ट्रेन (रांची) के उपयोग से बायोवेट की भागीदारी में विकसित किया गया है। इस वैक्सीन की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता की पुष्टि आईसीएआर-आईवीआरआई और ICAR-NRCE द्वारा किए गए व्यापक परीक्षणों से हुई है, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप है। DIVA मार्कर तकनीक से प्राकृतिक संक्रमण और टीकाकरण के बीच सेरोलॉजिकल अंतर करना संभव होता है, जो प्रभावी रोग प्रबंधन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

यह वैक्सीन वैज्ञानिकों द्वारा तीन वर्षों के समर्पित शोध का परिणाम है। इस अनुसंधान का नेतृत्व डॉ. नवीन कुमार वर्तमान निदेशक पुणे ने किया, जो डॉ. बी. एन. त्रिपाठी (पूर्व डीडीजी, एनिमल साइंसेज, वर्तमान कुलपति, SKUAST-जम्मू) के मार्गदर्शन में हुआ। आईसीएआर और इसके वैज्ञानिकों ने इस विश्वस्तरीय सहयोगात्मक पशु स्वास्थ्य वैक्सीन के विकास में अहम भूमिका निभाई।

बायोलम्पिवैक्सिन तीन महीने से अधिक उम्र की मवेशियों को साल में एक बार दी जाती है। यह 25 से 100 डोज वाली मल्टी-डोज शीशियों में उपलब्ध है और 2-8 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर स्थिर रहती है। बायोवेट की बेंगलुरु स्थित उत्पादन इकाई हर वर्ष 500 मिलियन डोज का उत्पादन करने में सक्षम है, जिससे वैक्सीन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

भारत में लंपी त्वचा रोग ने भारी नुकसान पहुंचाया है। 2019 और 2022 में आए बड़े प्रकोपों में लगभग 2 लाख गायों की मृत्यु हुई और लाखों की दूध उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई। यह रोग तेज बुखार और दर्दनाक त्वचा की गांठों का कारण बनता है, जो कभी-कभी जानलेवा भी हो सकता है और दूध को दूषित कर देता है।

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