आज लगेगा साल का दूसरा और आखरी सूर्यग्रहण, भारत में सूतक काल नही होगा मान्य

The second and last solar eclipse of the year will occur today the Sutak period will not be valid in India

हलधर किसान, अजमेर। साल 2025 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 21 सितंबर को लगने जा रहा है। सूर्य ग्रहण न केवल एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है, बल्कि इसका धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी विशेष महत्व होता है। यह संयोग है कि पितृ पक्ष की शुरुआत चंद्रग्रहण से हुई थी और अब समापन सूर्यग्रहण से होगा। हालांकि ज्योतिषों की मानें तो दोनों ग्रहण का श्राद्ध, तर्पण करने पर कोई अशुभ असर नही रहा।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सुदीप सोनी (जैन) अजमेर के अनुसार परंपरागत मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण को शुभ नहीं माना जाता है और इसके दौरान कई सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है। इस ग्रहण को लेकल लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं, कि सूर्य ग्रहण का असर कब और कहां दिखाई देगा। क्या भारत में इसका सूतक काल मान्य होगा या नहीं और ग्रहण के दौरान क्या करना चाहिए व क्या नहीं। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि साल का यह अंतिम सूर्य ग्रहण कब लगेगा, कितनी देर तक रहेगा, और क्या यह भारत में नजर आएगा। इस ग्रहण का लोगों के जीवन पर क्या असर होगा। भारतीय समयानुसार रात 11 बजे शुरू होगी और 22 सितंबर की सुबह 3.24 बजे समाप्त होगी। इस तरह यह सूर्य ग्रहण कुल 4 घंटे 24 मिनट तक चलेगा।  हालांकि, यह खगोलीय घटना भारत में दिखाई नहीं देगी, क्योंकि उस समय भारत में रात होगी। यह ग्रहण मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध के क्षेत्रों जैसे ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अंटार्कटिका और कुछ प्रशांत द्वीपों में दिखाई देगा। चूंकि भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक नहीं लगेगा, जो आमतौर पर ग्रहण से 12 घंटे पहले लगता है। धार्मिक दृष्टि से सूर्य ग्रहण को अशुभ माना जाता है।  
ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य ग्रहण का प्रभाव विभिन्न राशियों पर अलग.अलग पड़ता है। इस ग्रहण का प्रभाव विशेष रूप से सिंह, कन्या और मीन राशियों पर पड़ सकता हैए जिनके लिए स्वास्थ्य और वित्तीय मामलों में सतर्क रहना आवश्यक है। अन्य राशियों के जातकों को भी ग्रहण के दौरान अनावश्यक कार्यों से बचना चाहिए। सूर्य ग्रहण के तीन प्रकार होते हैं। पहला है पूर्ण सूर्य ग्रहण जिसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक देता है और दिन के समय कुछ समय के लिए अंधेरा छा जाता है। दूसरा है आंशिक सूर्य ग्रहण, जिसमें चंद्रमा केवल सूर्य के कुछ हिस्से को ढकता है। तीसरा है वृत्ताकार सूर्य ग्रहण. जिसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढकने में छोटा रह जाता है और सूर्य के किनारों पर चमक दिखाई देती है।

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ज्योतिषाचार्य डॉ. सुदीप सोनी (जैन)

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