खाद के साथ टेगिंग उत्पाद की बिक्री पर रोक की मांग, उज्जैन डीडीए के कदम का कृषि आदान व्यापारियों ने किया समर्थन

Demand for ban on sale of tagging products with fertilizers agricultural input traders support Ujjain DDAs move

हलधर किसान इंदौर। रबी सीजन बुआई का दौर शुरु होने के साथ ही समूचे प्रदेश में खाद की मांग भी बढ़ गई है। इस बीच सरकारी सोसायटियों सहित निजी प्रतिष्ठानों पर खाद के साथ नैनो लिक्विड सहित अन्य बायोस्टिमुलेंट की जबरन टैगिंग का चलन भी बढ़ गया है। किसान के इंकार के बाद भी वितरण केंद्रों पर इसे खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच उज्जैन कृषि उप संचालक ने न केवल मामले में गंभीरता दिखाई है, बल्कि तत्काल निर्देश जारी किए है कि कोई भी खाद के साथ टेगिंग उत्पाद न बेचे, अन्यथा एफआईआर कराई जाएगी।
उल्लेखनीय है कि जुलाई माह में खुद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी सख्त निर्देश जारी किए थे, कि देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में परंपरागत उर्वरकों के साथ नैनो और बायोस्टिमुलेंट उत्पादों की जबरन टैगिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए। इस अवैध प्रथा को तुरंत समाप्त किया जाए और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, जिसमें लाइसेंस रद्द करना, एफआईआर दर्ज करना और अभियोजन सुनिश्चित करना शामिल है। हालांकि इन आदेशों को प्रदेश में कही पालन होता नजर नही आ रहा है।
जागरुक कृषि आदान विक्रेता संघ के जिलाध्यक्ष श्रीकृष्णा दुबे ने बताया प्रदेश के 53 जिलों में अभी यदि उज्जैन को छोड़ देते हैं तो अन्य जिलों के उप संचालक कृषि ने इस प्रकार का कोई आदेश जारी किया हो, यह संज्ञान में नही आया है।

कृषि विभाग की उदासीनता के चलते जिले सहित समूचे प्रदेश में यूरिया या डीएपी के साथ बेरोकटोक टेकिंग पदार्थ बेचे जा रहे है। आश्चर्य की बात है कि जब देश में एक नियम एक कानून एक एक्ट लागू होता है, जिसका पालन पूरा देश करता है तो फिर यह प्रदेश में अन्य जिलों के जो कृषि विभाग के उपसंचालक कृषि है यह क्यों देरी कर रहे हैं।

यह टेगिंग प्रथा किसानों पर आर्थिक बोझ है। वहीं शासकिय एजेंसियों द्वारा निजी कंपनियों का प्रोडक्ट बगैर मांगें के दबाव बनाकर बेचे जाना कहीं न कहीं निजी कंपनियों के हितों को साधने जैसा प्रतीत होता है। यदि यह प्रोडक्ट इतने ही कारगर है तो किसान खुद इनकी मांग क्यों नही करते? किसान को आवश्यकता होगी तो वह खुद खरीदेगा, इसके लिए दबाव न बनाया जाए।

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श्रीकृष्णा दुबे – जागरुक कृषि आदान विक्रेता संघ के जिलाध्यक्ष

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