हलधर ज्योतिष अजमेर। कार्तिक शुक्ल एकादशी एक नवंबर शनिवार को श्री हरि विष्णु चार माह बाद योग निंद्रा से जागृत होंगे। भगवान विष्णु के निद्रा से जागृत होने के बाद मांगलिक कार्य आरंभ होगा। नवंबर में 14 मुहुर्त है, जबकि छह दिसंबर के बाद शादी- ब्याह पर फिर करीब डेढ़ माह का विराम लग जाएगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सुदीप सोनी के अनुसार 11 दिसंबर गुरुवार को पूर्व दिशा में शुक्र ग्रह के अस्त होने तथा वृद्धत्व दोष के कारण 8 दिसंबर सोमवार से विवाहादि शुभ कार्य नहीं होगा। 2026 के पहले मास जनवरी में खरमास की समाप्ति के बाद एवं शुक्र ग्रह के अस्त होने से शादी.ब्याह नहीं होंगे। एक फरवरी की शाम छह बजे शुक्र के उदित होने के साथ शादी.ब्याह का सिलसिला आरंभ होगा।
शादी में ग्रहों की शुभता जरूरी
शादी.विवाह के लिए शुभ मुहूर्त का होना बड़ा महत्वपूर्ण होता है। वैवाहिक बंधन को सबसे पवित्र रिश्ता माना गया है। इसलिए इसमें शुभ मुहूर्त का होना जरूरी है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शादी के शुभ योग के लिए बृहस्पति, शुक्र और सूर्य का शुभ होना जरूरी है। रवि गुरु का संयोग सिद्धिदायक और शुभफलदायी होते हैं। इन तिथियों पर शादी-विवाह को बेहद शुभ माना गया है।
ज्योतिषाचार्य सोनी ने कहा कि यदि वर और कन्या दोनों का जन्म ज्येष्ठ मास में हुआ हो तो उनका विवाह ज्येष्ठ में नहीं होगा। तीन ज्येष्ठ होने पर विषम योग बनता है और ये वैवाहिक लग्न में निषेद्ध है। विवाह माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़ एवं अगहन मास में हो तो अत्यंत शुभ होता है।
ऐसे तय होते है शुभ लग्न.मुहूर्त
शादी के शुभ लग्न व मुहूर्त निर्णय के लिए वृष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु एवं मीन लग्न में से किन्ही एक का होना जरूरी है। वहीं नक्षत्रों में से अश्विनी, रेवती, रोहिणी, मृगशिरा, मूल, मघा, चित्रा, स्वाति, श्रवणा, हस्त, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुन, उत्तरा भद्र व उत्तरा आषाढ़ में किन्ही एक जा रहना जरूरी है। अति उत्तम मुहूर्त के लिए रोहिणी, मृगशिरा या हस्त नक्षत्र में से किन्ही एक की उपस्थिति रहने पर शुभ मुहूर्त बनता है।
वर्ष 2026 अधिक मास वाल

ज्योतिषाचार्य डॉ. सुदीप सोनी
ज्योतिषाचार्य सोनी ने बताया 2026 में 12 की बजाय 13 मास होंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस साल दो बार ज्येष्ठ मास आएगा, जिससे पंचांग में कुल विवाह मुहूर्तों की संख्या बढ़कर 81 हो जाएगी। अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह हर तीन साल में चंद्र और सौर कैलेंडर के अंतर को संतुलित करने के लिए जोड़ा जाता है। साल 2026 में यह अतिरिक्त महीना 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इससे पहले 2018 में दो ज्येष्ठ और 2023 में दो सावन मास आए थे। अधिक मास के दौरान मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं, लेकिन कुछ ग्रहों की स्थिति के कारण सभी दिनों को विवाह मुहूर्त के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।
विवाह मुहुर्त- नवंबर: 18, 19, 21, 22, 23, 24, 25, 29, 30 दिसंबर- 1,4,5,6
फरवरी- 4, 5, 6 7 8, 10,11, 12, 13, 14, 15, 19, 20, 21, 24, 25, 26
मार्च: 2, 4, 5,7, 8, 9, 10, 11, 12,, 13,14
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