खरगोन, 18 नवंबर 2025। जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए खरगोन जिले ने एक बार फिर पूरे देश में अपना परचम लहराया है। जिले की कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल को पश्चिम क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ जिले के रूप में 6वां राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 प्रदान किया गया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समारोह में उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

साथ ही, जिला पंचायत सीईओ श्री आकाश सिंह को भी जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जल संचय जनभागीदारी 1.0 अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने सम्मानित किया। जिले को पश्चिमी क्षेत्र की श्रेणी-3 में 13वां स्थान प्राप्त होने पर 25 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी मिली है।
4.21 लाख जल संरचनाओं से बदला जिले का जल परिदृश्य
खरगोन जिले में पिछले वर्षों में जल संरक्षण के लिए अभूतपूर्व कार्य किए गए हैं। जिले में 4,21,182 कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाएं विकसित की गईं, जिनसे 2.31 करोड़ घनमीटर से अधिक की जल भंडारण क्षमता बढ़ाई गई है। इससे न केवल भूजल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, बल्कि गर्मियों में भी जलस्रोतों का प्रवाह बना रहा।
जिले में 5606 जल संरक्षण कार्य पूरे कर जियो-टैगिंग के बाद पोर्टल पर सत्यापित किए गए। इसके अंतर्गत खेत तालाब, स्टॉप डैम, चेक डैम, कंटूर ट्रेंच, सोकपिट, कपिलधारा आदि संरचनाएं शामिल हैं। अभियान के दौरान 757 कार्य वर्तमान में प्रगतिरत हैं।
नदियों का संरक्षण—सहायक नदियों में लौटी अविरल धारा
नदियों और तटीय क्षेत्रों के पुनर्जीवन पर जिले ने विशेष ध्यान दिया।
- नर्मदा, नानी, वंशावली और बोराड़ नदियों के 8000 हेक्टेयर क्षरित लैंडस्केप का पुनर्स्थापन किया गया।
- स्टॉप डैम, लूस बोल्डर स्ट्रक्चर और खेत तालाब के जरिए पानी रोका गया।
- पहले जहां सहायक नदियाँ नवंबर-दिसंबर में सूख जाती थीं, वहीं अब ये अप्रैल माह तक प्रवाहित रहती हैं।
कुंदा नदी के किनारे से 627 अतिक्रमण हटाए गए, और 106 एकड़ भूमि पर निधिवन स्थापित कर क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया।
ऐतिहासिक बावड़ियों का जीर्णोद्धार और अमृत सरोवरों का निर्माण
जिले के सभी जल निकायों की मैपिंग कर उन्हें राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।
- 45 ऐतिहासिक बावड़ियों का जीर्णोद्धार किया गया।
- 156 नए अमृत सरोवर बनाकर जिले में 2.31 करोड़ घनमीटर अतिरिक्त जल क्षमता जोड़ी गई।
इन कार्यों से ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई, पशुपालन और पेयजल की स्थिति काफी बेहतर हुई है।
सूक्ष्म सिंचाई से 37 हजार कृषक लाभान्वित
खरगोन में सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया—
- कुल 48,975 हेक्टेयर क्षेत्र सूक्ष्म सिंचाई के अंतर्गत लाया गया।
- वर्ष 2024 में 3,290 हेक्टेयर नया क्षेत्र जोड़ा गया।
- इससे 37,042 किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिला।
यह प्रयास जल बचत के साथ-साथ फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में भी कारगर साबित हुआ है।
अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण और हरित आवरण बढ़ाने में भी आगे
जल प्रबंधन के तहत—
- 4 एसटीपी, 15 पुनर्चक्रण इकाइयां और 94 अपशिष्ट स्थिरीकरण कुंड संचालित हैं।
- 5400 हेक्टेयर में 30 लाख पौधों का रोपण किया गया, जिनमें 95% पौधे जीवित हैं।
- मनरेगा से 3,80,000 पौधे तथा निजी फलोद्यानों में 2,66,412 अमरूद पौधे लगाए गए।
ये प्रयास भूजल स्तर को उठाने और पर्यावरण सुधार में महत्वपूर्ण साबित हुए हैं।
जनभागीदारी बनी सफलता की कुंजी
जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के लिए—
- 2,277 सफाई अभियान,
- 605 क्षमता निर्माण कार्यशालाएँ,
- 200 ग्राम पंचायतों में कलश यात्राएँ,
- 147 जल चौपाल आयोजित किए गए।
इन प्रयासों से लोगों में जल संरक्षण के प्रति गहरी जागरूकता आई।
खरगोन जिले के सुनियोजित प्रयासों ने जल प्रबंधन का एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। कलेक्टर सुश्री मित्तल और जिला पंचायत सीईओ श्री सिंह का यह सम्मान पूरे जिले के लिए गर्व का क्षण है।
