“बीज विधेयक – 2025” बीज कानून – 33

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हलधर किसान श्रीकृष्ण दुबे, इंदौर। बीज कृषि का प्रधान अवयव (Principal Input) है और खेती की जान है। भारत देश कृषि प्रधान है इसलिये आवश्यक है खेती किसानी के लिये बीज का उत्तम होना। सरकार ने बीज की श्रेष्ठता और शुद्धता बनाए रखने के लिये बीज अधिनियम 1966 बनाया तथा बीज नियम-1968 की रचना की। बीज अधिनियम बने लगभग 59 साल हो गये और इस काल खण्ड में कृषि पद्धति में भी अनेकों उतार चढ़ाव आये। किसी कानून में दण्ड का प्रावधान जितना कड़ा होगा उसकी प्रभावशीलता उतनी ही अधिक होगी। बीज अधिनियम-1966 में बीज व्यापारियों द्वारा किये गये अपराध का अर्थदण्ड अधिकतम 500/- रुपये है जो अप्रसांगिक लगता है यानी बिना दान्त के शेर जैसा लगता है साथ B: कपास, नई किस्मों का विकास, निजी बीज उत्पादकों का प्रवेश, बीज की अप्रत्याशित दरें आदि कारकों के कारण नया बिल आवश्यक हो गया था।

  1. सीड बिल का ड्राफ्ट :- यह आने वाले बिल का मसौदा है। यानी नये बीज कानून का रूप/प्रारूप है जो सरकार लाना चाहती है परन्तु भारत में गणतान्त्रिक व्यवस्था के कारण सरकार उन हित अभिलाशियों (Beneficiaries) की मर्जी भी जानना चाहती है जो बीज उद्योग में रत है और इसीलिये सरकार ने यह मसौदा बीज उत्पादकों, बीज विक्रेताओं, बीज वितरकों और बीज अधिनियम की पालना सुनिश्चित करने वाले बीज निरीक्षकों की राय मांगी गई है। यह मसौदा जब लोक सभा, राज्य सभा में पास होकर महामहीम राष्ट्रपति के हस्ताक्षर हेतु भेजा जायेगा तो सीड बिल कहलायेगा और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने पर यह बीज अधिनियम कहलायेगा। राष्ट्रपति यदि सहमत न हो तो वह एक बार पुनः संशोधनों के लिये भेज सकता है परन्तु पार्लियामैन्ट कोई संशोधन करे या बिना संशोधन किये भेज दे तो राष्ट्रपति को बिल स्वीकृत करना ही होगा।

2. सीड बिल का इतिहास :- वास्तव में बीज अधिनियम की रचना पर मंथन वर्ष 2000 से चल रहा है। माननीय साहिब सिंह वर्मा सांसद की अध्यक्षता में देश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों तथा कृषि विदों, बीज उत्पादक कम्पनियों के मालिकों से नये सीड बिल पर मंथन करते हुए एक कमेटी जुलाई 2000 में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में अन्य हित अभिलाषियों के साथ डॉ० बी.एस. दहिया

Head Seed Science & Technology संग लेखक भी मिला। सांसद साहिब सिंह वर्मा ने 17.07.2000 में प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसमें कुल 30 धाराऐं थी और 19 परिभाषाएँ थी जबकि बीज अधिनियम-1966 में मात्र 25+1, 26 धाराऐं थी और 16 परिभाषाऐं थी। पुनः बिल 04.03.2002 को लोक सभा पटल पर रखा गया तथा 19 परिभाषाऐं थी। लोक सभा द्वारा कुछ आपत्तियों के साथ लौटा देने पर पुनः सीड बिल 08.12.2004 को लोक सभा पटल पर मंथन एवं स्वीकृति के लिये रखा गया। इसमें धाराऐं बढ़ कर 49 हो गई तथा परिभाषाऐं 28 हो गई। जुलाई 2005 में पार्लियामैन्ट ने इस बिल पर विचार किया और अगले अधिवेशन में विचार करने हेतु टाल दिया तथा सांसद राम गोपाल यादव की अध्यक्षता वाली कृषि मामलों की Standing Committee को मंथन करने हेतु दे दिया। इसके बाद 2010. 2015, 2019 कई प्रारूप प्रस्तुत किये गये परन्तु कभी Parliament भंग होने या अन्य कारणों से पारित नहीं हो सका और अन्ततः भारत सरकार ने 12.11.2025 को पुनः प्रस्तुत किया और हित अभिलाषियों के विचार / सुझाव / आपत्तियाँ स्वीकार करने हेतु प्रसारित किया है। सुझाव / आपत्तियाँ 11.12.2025 तक भेज जा सकती हैं।

एवं मिस ब्रांड बीज सुझाव / आपत्तियाँ :-बीज विक्रेता, बीज वितरक, बीज उत्पादक, बीज निरीक्षक अपनी आपत्तियाँ और सुझाव 11.12.2025 तक भेज सकते हैं परन्तु उससे पहले सीड बिल में क्या प्रावधान किए गये हैं, समझना आवश्यक है। इस मसौदे में निम्न मुख्य बिन्दु हैं :-

1. कमेटी का गठन :- बीज अधिनियम 1966 की तरह इस अधिनियम में भी Central Seed Committee होगी जो केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार को बीज कानून बारे परामर्श देगी।

धारा 3, 4, 5, 7, 8, 9, 10

2. न्यूनतम मानक निर्धारण :- बीज अधिनियम-1966 की धारा-6 की तरह न्यूनतम अंकुरण, शुद्धता के मानक तय करने की शक्ति भारत सरकार में निहित होगी।

धारा 6

पंजीकरण :- बीज अधिनियम-1966 से इतर इस अधिनियम में किस्मों का पंजीकरण कराना आवश्यक होगा और यह पंजीकरण राज्य किस्म का राज्य में तथा राष्ट्रीय किस्म का केन्द्र सरकार द्वारा किया जायेगा। ऐसी किस्म जो केवल एक राज्य के लिये अनुमोदित हो राज्य किस्म तथा एक से अधिक राज्यों के लिये विमोचित किस्म राष्ट्रीय किस्म कहलायेगी। अब कोई किस्म ब्रांड नाम से बिना पंजीकरण के नहीं आ सकेगी। और रातोंरात बनने वाली किस्मों की बाढ़ नहीं आयेगी क्योंकि जो भी किस्म पंजीकृत की जायेगी उसका भारत सरकार 2 साल टैस्ट कर ही पंजीकृत कर सकेगी। इन पंजीकृत किस्मों को एक रजिस्टर में अंकित किया जाऐगा जो पंजीकरण रजिस्टर कहलायेगा। यहाँ भी यह कमी है कि फारमर किस्म बिना पंजीकरण बाजार में आ सकेगी। इसका दुरूपयोग यह होगा कि सभी उत्पादक जिनके पास जमीन है वे किस्म विकास के लिये किसान बन जाऐंगे और फिर घालमेल होगा। अभी तक की किस्में Provisionaly पंजीकृत समझी जायेगी यदि उनकी List 6 माह तक भारत सरकार को नहीं उपलब्ध कराई जाती यह प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन 3 साल तक होगा। बीज अधिनियम 1966 में नोटीफाईड किस्में पंजीकृत मानी जायेंगी। पंजीकरण में त्रुटि पाई जाती है तो पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।

धारा 9, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16

4. उत्पादकों प्रोसेसिंग प्लान्ट का पंजीकरण :- प्रस्तावित अधिनियम के अनुसार बीज उत्पादकों और उनके प्रोसेसिंग प्लान्ट का भी पंजीकरण होगा। अभी तक केवला प्रमाणीकरण संस्था में ही फर्म / प्लान्ट का पंजीकरण होता था परन्तु अब राज्य सरकार में भी फर्म और प्लान्ट पंजीकृत कराना होगा। और प्रमाणित, टी.एल., ब्रीडर सीड का रिकॉर्ड देना होगा।

धारा 17

5. डीलरों का पंजीकरण :- यद्यपि बीज अधिनियम 1966 में डीलर पंजीकरण का प्रावधान नहीं था परन्तु बाद में बीज नियन्त्रण आदेश लागू होने पर डीलर व्यवस्था बनी। अब विक्रेता और वितरक दोनों का पंजीकरण आवश्यक है।

धारा-18

6. प्लान्ट नरसरी का पंजीकरण :- पौधा नरसरी चलाने वाले भी अब पंजीकृत होंगे और उन्हें विकसित पौधों की सन्तति का रिकॉर्ड रखना होगा।

7. बीज बिक्री नियमन :-

धारा 19, 20

कोई व्यक्ति ऐसी किस्म का बीज विक्रय नहीं कर सकेंगे जो Identify न की गई हो, न्यूनतम बीज मानक पूरी न करती हो तथा लेबल न हो तथा पात्र (Container) पर QR Code न लगा हो, किस्म Misbrand न हो।

धारा – 21

8. कीमत निर्धारण:-

किसी दशाओं में भारत सरकार आवश्यक समझे तो बीज की कीमत भी तय कर सकती है, ध्यान रहे यह अधिकार राज्य सरकार को नहीं होगा।

धारा – 22

9. बीज प्रमाणीकरण संस्थाएं :-

बीज अधिनियम-1966 की धारा-8 के अनुसार राज्य सरकार एक प्रमाणीकरण संस्था की स्थापना कर सकती है। भारत सरकार अथवा राज्य सरकार केन्द्र सरकार से पूर्व अनुमति लेकर केन्द्र सरकार या राज्य सरकार या अन्य संस्था को बीज प्रमाणीकरण की मान्यता दे सकती है। बीज प्रमाणीकरण संस्थाएं प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी होने पर एक प्रमाण पत्र जारी करेगी जो त्रुटि पाये जाने पर रद्द भी किया जा सकता है किसी बाहरी देश की बीज प्रमाणीकरण संस्था को मान्यता दी जा सकती है।

धारा 23, 24, 25, 26, 27

10. समीक्षा :-

केन्द्रीय बीज समिति स्वयं या किसी प्रार्थना पत्र के आधार पर अपने निर्णयों की समीक्षा कर सकती है। भारत सरकार किसी नये मामले पर, किसी गलती पर, समीक्षा कर सकती है परन्तु यह समीक्षा केवल एक बार होगी।

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धारा 28

11. अपील :-

कोई व्यक्ति पंजीकरण उप समिति के निर्णय से व्यथित है तो पंजीकरण समिति में अपील कर सकता है। कोई विवाद धारा-17 के अन्तर्गत बीज उत्पादक/प्लान्ट के पंजीकरण, धारा-18 के अन्तर्गत डीलर एवं डिस्ट्रीब्यूटर के पंजीकरण या अन्यथा विवाद उत्पन्न होता या छोटे ट्राइवल अपराध धारा 34 के मध्य उपजते हैं तो 30 दिन के अन्दर अपील कर सकता है।

धारा 28

12. केन्द्रीय एवं राज्य बीज परिक्षणशालाओं की स्थापना :-

भारत सरकार केन्द्रीय बीज परिक्षणशाला तथा राज्य सरकार राज्य बीज परिक्षणशाला की अधिसूचना कर स्थापित कर सकती है।

धारा 29

13. बीज परिक्षक की नियुक्ति :-

केन्द्रीय बीज परिक्षक की नियुक्ति केन्द्र सरकार तथा राज्य के परिक्षक की नियुक्ति राज्य सरकार अधिसूचना जारी कर कर सकती है।

14. बीज निरीक्षक :-

धारा 30

राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा जितने चाहे बीज निरीक्षक नियुक्त करेगी। सीड बिल-2019 में एक और Seed Quality Monitering Officer का प्रावधान था खत्म कर दिया।

15. बीज निरीक्षक की शक्तियाँ:-

18. अपराध का संज्ञान :-

केन्द्र सरकार या राज्य सरकार या केन्द्र शासित राज्य दण्ड निर्धारण के लिये अधिसूचना जारी कर किसी सक्षम अधिकारी को निर्णायक नियुक्त कर सकती है।

उपरोक्त सभी अपराधों के लिये कोई भी न्यायालय अपराध का संज्ञान नहीं लेगा जब तक कि बीज निरीक्षक शिकायत नहीं करता है।

धारा 35

19. सम्पत्ति की जब्ती :-

अपराध सिद्ध होने पर उस बीज को भारत सरकार अधिकृत कर लेगी।

धारा 36

20. कम्पनी द्वारा अपराध :-

यदि कम्पनी के नाम अपराध सिद्ध होता है तो वह हर व्यक्ति उत्तरदायी होगा जो उस समय इन्चार्ज होगा।

धारा 37

21. केन्द्र सरकार का राय देने की शक्ति :-

केन्द्र सरकार में शक्ति समाहित होगी वह राज्य सरकार को या केन्द्रीय बीज समिति को निर्देश दे सकती है।

धारा 38

22. छूट देना:-

केन्द्र सरकार चाहे तो इस अधिनियम के प्रावधानों से छूट दे सकती है।

धारा 39

23. सदभावना से की गई कार्यवाही का संरक्षण :-

किसी भी कर्मचारी के द्वारा की गई कार्यवाही के लिये कोई वाद दायर नहीं किया जा सकता।

धारा 40

24. बीज निरीक्षक, बीज विशलेषक :-

बीज विशलेषक तथा बीज निरीक्षक पब्लिक सर्वेन्ट कहलायेंगे।

धारा 42

25. भारत सरकार की नियम बनाने की शक्तियाँ:-

भारत सरकार इस अधिनियम के विभिन्न मदों पर नियम बना सकती है जैसे बीज नियम 1968 उसी तरह बीज नियम-2026 हो सकते हैं।

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धारा 43

26. सैन्ट्रल कमेटी रेगुलेशन बनाने की शक्तियाँ :-

सैन्ट्रल बीज कमेटी को अपना कार्य करने हेतु नियम कानून बनाने की शक्तियाँ होंगी।

सीड बिल 2019 में 53 धाराएं थी जो बीज विधेयक 2025 में घट कर 44 रह गई हैं।

अतः आप अध्ययन कर अपनी आपत्तियाँ केन्द्र सरकार को दें और सम्भव हो तो एक प्रति मुझे भी दें।

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जागरूक कृषि आदान विक्रेता संघ जिलाध्यक्ष श्री दुबे की प्रतिक्रिया


यह जो सब लैब का* *इंतजाम हो रहा है लैब में टेस्टिंग होग यह सब होगा तब होगा लेकिन वर्तमान स्थिति में जो सरकारी गवर्नमेंट की लैब है सीड टेस्टिंग की वहां पर कृषि विभाग के अधिकारियों के द्वारा जो है सब पूरा कब्जा उनका रहता है यदी बीज अपनी गुणवत्ता के अनुसार जर्मिनेशन प्रक्रिया में शुद्धता में सब में सही रहता है उसके बाद में यह लोग दबाव बनाकर सेटिंग करा कर उस बीज को उनकी लैब में सरकारी लैब में फ़ैल करवा देते हैं और फिर अवैध वसूली का काम चालू होता है इसके लिए सरकार की क्या तैयारी है ?

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आर.बी. सिंह, बीज कानून रत्न, एरिया मैनेजर (सेवानिवृत) नेशनल सीड्स कारपोरेशन लि० (भारत सरकार का संस्थान) सम्प्रति “कला निकेतन’, ई-70, विथिका-11, जवाहर नगर, हिसार-125001 (हरियाणा), दूरभाष सम्पर्क-79883-04770, 94667-46625 (WhatsApp)

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