भारत सरकार ने 38 कीटनाशक दवाइयों पर लगाया प्रतिबन्ध

38 pesticides banned

सूची में नाइट्रोबेंजीन भी शामिल, बिक्री को लेकर व्यापारियों में फैला असमंजस

हलधर किसान , इंदौर श्रीकृष्ण दुबे । देश में हरित क्रांति के बाद खेती में उर्वरक और कीटनाशकों का प्रयोग बढ़ा है। उर्वरक और कीटनाशकों के प्रयोग से जहां देश खाद्यान्न उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर हुआ है, वहीं उर्वरक और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से कई तरह की बीमारियां ने लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। भारत सरकार ने कीटनाशकों के दुष्प्रभाव को देखते हुए 38 कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगा दिया है। 

खेती में बेहतर और सुरक्षित उत्पादन के लिए कीटनाशक दवाईयों की अहम भूमिका होती है। प्रतिकूल और बेमौसमी गतिविधियों के साथ ही कीट.व्याधियों के प्रकोप से फसलों के बचाव के लिए किसानों द्वारा समय.समय पर विभिन्न कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाता है। यह कीटनाशक फसलों के लिए कितने सुरक्षित है, इससे अनजान किसान दुकानदार के सुझाव पर इस्तेमाल करते है। ऐसे में फसलों के साथ ही किसान को नुकसान न पहुंचे इसलिए शासन स्तर पर इन कीटनाशको का समय- समय पर परीक्षण कर गुणवत्ता को प्रभावित करते पाए जाने पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की जाती है।

हाल ही में केंद्र सरकार ने देश में 38 कीटनाशक दवाई की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया है। इसमें प्रदेश में बिक रही दवाईयें भी शामिल है। संयुक्त संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास भोपाल के आदेश का हवाला देकर शाजापुर जिला कृषि विभाग द्वारा जारी सूची में प्रदेश में सबसे ज्यादा बिक्री हो रही देवी कार्पो साइंस प्रायवेट लिमिटेड का प्रोडक्ट नाईट्रोबेंजीन भी शामिल है, 38 दवाईयों की सूची में इसे 25वें नंबर पर रखा है। इस कंपनी का नाम सामने आने के बाद प्रदेशभर के कृषि आदान विक्रेताओं में चिंता के साथ असमंजस की स्थिति बन गई है, क्योंकि खरीफ सीजन के दौरान अधिकतर व्यापारियों ने इस कंपनी का माल अपने प्रतिष्ठान पर रखा है।

प्रतिबंध के बाद दुकान पर इस कंपनी का प्रोडक्ट मिलने पर कार्रवाई की संभावनाओं को देखते हुए दुकानदार चिंतित है, वहीं कंपनी भी इस समस्या से निजात के प्रयास में जुटी है। सोशल मीडिया के जरिये कंपनी का एक मांगपत्र हमारे प्रतिनिधि तक पहुंचा है, जिसमें कंपनी ने कृषि निदेशक किसान कल्याण एवं कृषि विकास संचालनालय भोपाल को पत्र लिखकर प्रदेश में कीटनाशक अधिनियम में नाईट्रोवेंजीन को शामिल न करने की मांग की है।

पत्र में लिखा गया है कि हाल ही में प्रदेश के शाजापुर कृषि विभाग द्वारा कीटनाशक डीलरों को जारी कि गई प्रतिबंधित दवाईयों की सूची में उनकी कंपनी का नाम शामिल होने से व्यापार पर विपरित असर पड़ रहा है। देवी क्रॉप साइंस प्राइवेट लिमिटेड सीआईवी और आरसी पंजीकरण प्रमाण पत्र नाइट्रोवेंजीन के साथ पीजीआर के रुप में नाईटोबेंजीन 20 ईडब्ल्यू का विपणन करता है। हमने इसके लिए राज्य विपणन कार्यालय से अनुमति भी ली है। बाजार में नया सर्कुलर जारी होने से डीलर भ्रमित हो रहे है, इसलिए कीटनाशक प्रतिबंध को लेकर जारी सूची में सुधार कर उसे जारी किया जाए, जिससे डीलरों के बीच फैला असमंजस दुर हो सके। 

व्यापारियों में असंमजस –

38 प्रतिबंध कीटनाशक दवाईयों के प्रतिबंध सूची में नाईट्रोबेन्जीन कंपनी का नाम सामने आने के बाद व्यापारी असमंजस में है। एक ओर विभाग द्वारा प्रतिबंध की बात कही जा रही है तो वही कंपनी इसे त्रुटि बता रही है, इस संबंध में विभाग और कंपनी दोनो के ओर से स्पष्टता जल्द सामने आनी चाहिए, जिससे व्यापारी निडर होकर इस कंपनी के साथ व्यापार कर सके। – श्रीकृष्णा दुबे, जिलाध्यक्ष जागरुक कृषि आदान विक्रेता संघ, इंदौर।

सूची पर दर्ज कराई है आपत्ति-  

शाजापुर कृषि विभाग की ओर से जारी की गई, प्रतिबंधित कीटनाशक की सूची में हमारी कंपनी का नाम त्रुटिपूर्वक जारी हुआ है, जिसके संबंध में कृषि निदेशक किसान कल्याण एवं कृषि विकास संचालनालय, भोपाल में आपत्ति दर्ज कराई है। पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि बाजार में जारी किए सर्कुलर में सुधार किया जाए, जिससे कंपनी के डीलरों के बीच फैली भ्रम की स्थिति दूर हो सके। – अरुण मेहता, झोनल अधिकारी, देवी क्रॉप साइंस प्रा. लि।

यह भी पढ़ें-

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *