ओडिशा से कृषि निर्यात को बढ़ावा देने’ के उद्देश्य से एक कार्यशाला सह क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन
हलधर किसान दिल्ली l कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) और ओडिशा सरकार ने संयुक्त रूप से ‘ओडिशा से कृषि निर्यात को बढ़ावा देने’ के उद्देश्य से एक कार्यशाला सह क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन हॉल, ओडिशा कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (OUAT), भुवनेश्वर में संपन्न हुआ।
इस आयोजन के दौरान, ओडिशा के विभिन्न क्षेत्रों से आए किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ)/किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी), महिला कृषि उद्यमियों, राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और निर्यातकों ने 10 से अधिक स्टॉल लगाए। प्रदर्शनी में राज्य के विशिष्ट जीआई टैग और प्रसिद्ध कृषि उत्पादों का प्रदर्शन किया गया, जिनमें कोरापुट का काला जीरा चावल, नयागढ़ का कांतिमुंडी बैंगन, गंजाम का केवड़ा फूल उत्पाद, कोरापुट की कॉफी, कंधमाल की हल्दी पाउडर, केंद्रापड़ा का रसाबली, सालपुर का रसगुल्ला, खजूरी गुड़, ढेंकानाल का मगजी लड्डू और मयूरभंज की काई चटनी प्रमुख रहे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, ओडिशा के उपमुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री श्री कनक वर्धन सिंह देव ने अपने उद्घाटन भाषण में राज्य सरकार की जैविक कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने निर्यातकों से आग्रह किया कि वे ओडिशा के विविध और विशिष्ट कृषि उत्पादों, विशेषकर जीआई टैग प्राप्त उत्पादों को वैश्विक मंच पर प्रमोट करें। साथ ही, उन्होंने एपीडा और राज्य सरकार के सक्रिय योगदान की भी सराहना की।
इस अवसर पर तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए:
- पहला सत्र: राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) के संशोधित संस्करण के तहत जैविक निर्यात को बढ़ावा देने पर केंद्रित रहा, जिसमें प्रमाणन, मूल्य श्रृंखला विकास और बाजार पहुंच पर विशेष ध्यान दिया गया।
- दूसरा सत्र: ओडिशा से चावल निर्यात बढ़ाने की रणनीतियों पर आधारित था, जिसमें प्रीमियम किस्मों का दोहन, लॉजिस्टिक्स सुधार और निर्यात बाधाओं के समाधान पर चर्चा हुई।
- तीसरा सत्र: कृषि प्रसंस्कृत और जीआई टैग प्राप्त उत्पादों में मूल्य संवर्धन एवं निर्यात संवर्धन के अवसरों का अन्वेषण किया गया। इस दौरान लॉजिस्टिक्स, कोल्ड चेन ढांचा और बाजार संपर्क मजबूत करने पर बल दिया गया।
कार्यक्रम में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, ओयूएटी के प्रतिनिधि, किसान संगठन, प्रगतिशील किसान समेत 400 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के इतर, एपीडा ने ओडिशा के 30 से अधिक जैविक उत्पादक समूहों और प्रमाणन निकायों के साथ संवाद सत्र आयोजित किया। इसमें 9 जनवरी 2025 को लॉन्च हुए एनपीओपी के आठवें संस्करण में किए गए संशोधनों और किसानों की समस्याओं पर चर्चा की गई।
इस अवसर पर सांसद और संसदीय स्थायी समिति (कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण) के सदस्य श्री सुकांत कुमार पाणिग्रही ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) और कृषि आधारभूत संरचना निधि के बेहतर उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में कृषि निर्यात क्षेत्र की सशक्त भूमिका होगी, जो आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और विदेशी मुद्रा आय को बढ़ावा देगा।
एपीडा के अध्यक्ष श्री अभिषेक देव ने अपने स्वागत भाषण में राज्य में कृषि निर्यात के व्यापक अवसरों को रेखांकित करते हुए किसानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में और भी कई कार्यक्रम एवं निर्यात सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिससे कृषि निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
यह कार्यशाला सह क्षमता निर्माण कार्यक्रम राज्य और केंद्र सरकारों, उद्योग जगत और शिक्षाविदों के नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाने में सफल रहा, जिससे ओडिशा में एक सशक्त कृषि निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
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