ऑल इंडिया एग्री इनपुट डीलर एसोसिएशन ने FFS व्यवस्था में सुधार सहित रखीं कई मांगें, समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
नई दिल्ली। देश में उर्वरक वितरण व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू की जा रही फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (FFS) व्यवस्था को लेकर कृषि आदान विक्रेताओं की ओर से कई व्यावहारिक समस्याएं सामने रखी गई हैं। इन समस्याओं के समाधान और उर्वरक व्यापारियों को राहत देने की मांग को लेकर ऑल इंडिया एग्री इनपुट डीलर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मनमोहन कलंत्री ने केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा को पत्र भेजा है।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि वह डिजिटल व्यवस्था के विरोध में नहीं है, बल्कि FFS प्रणाली को अधिक व्यावहारिक, सरल और प्रभावी बनाने के लिए उसमें मौजूद तकनीकी एवं व्यापारिक समस्याओं को दूर करने की मांग कर रहा है। संगठन ने कहा है कि यदि इन समस्याओं का समय पर समाधान नहीं किया गया तो देशभर के लाइसेंसधारी उर्वरक विक्रेताओं को आंदोलन और अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
FOR डिलीवरी को लेकर व्यापारियों की परेशानी
एसोसिएशन ने अपने पत्र में Free on Rail/Road (FOR) डिलीवरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। संगठन के अनुसार कई स्थानों पर कंपनियों द्वारा रिटेल पॉइंट तक उर्वरक पहुंचाने में आनाकानी की जा रही है। कुछ कंपनियों द्वारा डिलीवरी के लिए किलोमीटर की सीमा निर्धारित किए जाने की बात भी संगठन ने कही है।
ऐसी स्थिति में डीलरों को अपने स्तर पर परिवहन की व्यवस्था करनी पड़ रही है। इसके अलावा उर्वरक की बोरियों को उतारने के लिए हमाली का खर्च भी व्यापारियों को वहन करना पड़ता है। संगठन का कहना है कि परिवहन, हमाली और अन्य खर्च बढ़ने के बावजूद निर्धारित कीमत पर उर्वरक बेचने की बाध्यता व्यापारियों के लिए आर्थिक चुनौती बन रही है।
डीलर मार्जिन बढ़ाने की मांग
ऑल इंडिया एग्री इनपुट डीलर एसोसिएशन ने यूरिया, डीएपी और एनपीके सहित विभिन्न उर्वरकों पर डीलर मार्जिन बढ़ाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि वर्तमान मार्जिन की तुलना में परिवहन, श्रम, दुकान संचालन और अन्य व्यावसायिक खर्च लगातार बढ़ रहे हैं।


एसोसिएशन ने विशेष रूप से NPK जैसे उत्पादों में निर्धारित मार्जिन और वास्तविक बिलिंग के बीच अंतर की जांच कराने की मांग की है। संगठन ने उर्वरक कंपनियों के बिलिंग रिकॉर्ड की जांच की मांग भी रखी है।
पत्र में रिटेल स्तर पर 6 प्रतिशत और होलसेल स्तर पर 2 प्रतिशत मार्जिन निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है।
रेट लिस्ट और स्टॉक रजिस्टर को लेकर मांग
FFS व्यवस्था में डिजिटल रूप से स्टॉक और बिक्री की जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद भौतिक रेट लिस्ट बोर्ड और स्टॉक रजिस्टर जैसी व्यवस्थाओं को जारी रखने पर भी एसोसिएशन ने सवाल उठाए हैं।
संगठन का कहना है कि जब संबंधित जानकारी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध है तो अनावश्यक कागजी प्रक्रिया को सरल किया जाना चाहिए। इससे व्यापारियों को निरीक्षण के दौरान होने वाली व्यावहारिक परेशानियों में कमी आ सकती है और डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य भी बेहतर तरीके से पूरा हो सकेगा।
सीमावर्ती जिलों में 30 किलोमीटर तक बिक्री की अनुमति
एसोसिएशन ने अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय उर्वरक बिक्री को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। संगठन का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले किसानों को डिजिटल व्यवस्था के कारण कई बार नजदीकी उपलब्ध विक्रेता से खाद प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है।
किसान हित को ध्यान में रखते हुए संगठन ने सीमावर्ती क्षेत्रों में किसान के क्षेत्र से 30 किलोमीटर तक उर्वरक खरीद की अनुमति देने का सुझाव दिया है। संगठन के अनुसार इससे किसानों को नजदीकी अधिकृत विक्रेता से जरूरत के अनुसार उर्वरक प्राप्त करने में सुविधा होगी।
ई-टोकन और ऑनलाइन बुकिंग में तकनीकी दिक्कतों का मुद्दा
FFS व्यवस्था में किसान मोबाइल के माध्यम से उर्वरक की मांग दर्ज करते हैं और निर्धारित प्रक्रिया के बाद QR कोड आदि के माध्यम से खरीद की जाती है। हालांकि कृषि आदान विक्रेताओं का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सभी किसानों के पास स्मार्टफोन, इंटरनेट और डिजिटल प्रक्रिया की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है।
एसोसिएशन ने टोकन जनरेट होने में देरी, बार-बार लॉग आउट होने और POS मशीन पर प्रक्रिया जटिल होने जैसी समस्याओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है।
संगठन ने सुझाव दिया है कि किसान के निर्धारित उर्वरक कोटे को उसकी डिजिटल पहचान से जोड़ा जाए और उसे किसी भी अधिकृत विक्रेता से उर्वरक लेने की सुविधा दी जाए। इससे टोकन और ऑनलाइन बुकिंग से जुड़ी परेशानियां कम की जा सकती हैं।
ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन व्यवस्था की मांग
एसोसिएशन ने ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन यानी हाइब्रिड व्यवस्था बनाए रखने की मांग भी की है। संगठन का कहना है कि जिन किसानों के पास स्मार्टफोन अथवा डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें वैकल्पिक माध्यम से उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए।
कृषि आदान विक्रेताओं के अनुसार डिजिटल व्यवस्था किसानों की सुविधा के लिए होनी चाहिए, लेकिन इसकी प्रक्रिया इतनी जटिल नहीं होनी चाहिए कि किसान को उर्वरक लेने के लिए दूसरे व्यक्ति या केंद्र की सहायता पर निर्भर रहना पड़े।
टैगिंग और बिलिंग व्यवस्था में बदलाव की मांग
एसोसिएशन ने उर्वरक व्यापारियों पर विभिन्न प्रकार की टैगिंग की बाध्यता समाप्त करने की मांग भी रखी है। साथ ही कंपनियों से संबंधित नहीं होने वाले अन्य उत्पादों की बिक्री के लिए डीलरों पर दबाव नहीं बनाए जाने की मांग की गई है।
इसके अलावा POS मशीन से बिल बनने के बाद अलग से बिल बुक से बिल बनाने की अनिवार्यता समाप्त करने का सुझाव दिया गया है। संगठन चाहता है कि POS मशीन से जारी बिल को ही निर्धारित नियमों के तहत मान्य बिल माना जाए।
मध्य प्रदेश के पदाधिकारियों ने राष्ट्रीय संगठन के प्रयास की सराहना की
ऑल इंडिया एग्री इनपुट डीलर एसोसिएशन द्वारा कृषि आदान व्यापारियों के हित में केंद्रीय स्तर पर उठाए गए इन मुद्दों का कृषि आदान विक्रेता संघ मध्य प्रदेश, भोपाल के पदाधिकारियों ने स्वागत किया है।

संघ के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री मान सिंह राजपूत, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश सचिव श्री संजय रघुवंशी, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री कृष्णा दुबे तथा लीगल एडवाइजर श्री राजेश मलैया ने राष्ट्रीय संगठन के इस प्रयास की सराहना करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मनमोहन कलंत्री को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी है।
पदाधिकारियों ने कहा कि उर्वरक व्यापारियों की व्यावहारिक समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय मंत्री के सामने रखना संगठन की सक्रियता और व्यापारियों के हितों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी जिससे किसानों के साथ-साथ उर्वरक विक्रेताओं को भी अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनमोहन कलंत्री और राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण भाई पटेल की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि उठाए गए मुद्दे देशभर के लाइसेंसधारी उर्वरक विक्रेताओं के व्यापार और आजीविका से जुड़े हैं। संगठन ने मंत्रालय से समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की है।
एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो देशभर के उर्वरक विक्रेता अनिश्चितकालीन हड़ताल सहित आंदोलन के अन्य कदम उठाने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
अब निगाहें केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की ओर से इन मांगों पर होने वाली कार्रवाई और FFS व्यवस्था में संभावित सुधारों पर टिकी हैं। आने वाले समय में सरकार और कृषि आदान विक्रेताओं के बीच संवाद से ई-टोकन तथा उर्वरक वितरण व्यवस्था को लेकर सामने आ रही व्यावहारिक समस्याओं का समाधान निकलने की उम्मीद है।
