मछुआरों की सुरक्षा को नई ताकत: एक लाख फिशिंग वेसल्स पर जियो-फेंसिंग ट्रांसपोंडर लगाने का कार्य तेज़ी से प्रगति पर

Fishermen safety gets a new boost Installation of geo fencing transponders on 100000 fishing vessels progressing rapidly

 हलधर किसान दिल्ली l  समुद्री मछुआरों की सुरक्षा और संरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए भारत सरकार का मत्स्यपालन विभाग सुरक्षा ढांचे को लगातार मजबूत कर रहा है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत सरकार न केवल उन्नत सुरक्षा उपकरणों की आपूर्ति कर रही है, बल्कि समुद्र में जीवन रक्षक प्रणालियों को तकनीक से जोड़कर मछुआरों को और अधिक सुरक्षित बनाया जा रहा है। इसी कड़ी में देशभर की फिशिंग वेसल्स पर 1 लाख जियो-फेंसिंग ट्रांसपोंडर लगाने का काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, जो समुद्री सीमा के पास पहुँचने पर मछुआरों को समय रहते चेतावनी देकर संभावित खतरे को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

सुरक्षा उपकरणों की व्यापक आपूर्ति

मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार, समुद्र में प्रतिकूल मौसम और सुरक्षा जोखिमों से मछुआरों को बचाने के लिए पारंपरिक व मोटराइज्ड फिशिंग वेसल्स के लिए कई स्तरों पर सहायता प्रदान की जा रही है। PMMSY के तहत तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निम्न उपकरणों हेतु वित्तीय सहायता दी जा रही है:

  • जीपीएस उपकरण
  • लाइफ जैकेट, लाइफबॉय
  • रडार रिफ्लेक्टर
  • प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स
  • फ्लेयर्स सेट
  • बैकअप बैटरी
  • सर्च एंड रेस्क्यू बीकन
  • कम्युनिकेशन और ट्रैकिंग सिस्टम

पिछले पाँच वर्षों (2020-21 से 2024-25) के दौरान विभाग ने 50.05 करोड़ रुपये की लागत से 14,300 संचार उपकरणों की आपूर्ति हेतु विभिन्न तटीय राज्यों को मंजूरी दी है। यह कदम न केवल समुद्री मछुआरों की सुरक्षा बढ़ाएगा, बल्कि खोज एवं बचाव कार्यों को भी मजबूत करेगा।

बीमा सुरक्षा—जीवन और आजीविका दोनों की रक्षा

PMMSY के तहत मछुआरों और फिशिंग वेसल्स के लिए व्यापक बीमा सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें शामिल है:

  • ₹5 लाख — मृत्यु या स्थायी पूर्ण शारीरिक अक्षमता
  • ₹2.5 लाख — स्थायी आंशिक शारीरिक अक्षमता
  • ₹25,000 — अस्पताल में भर्ती होने पर खर्च
  • फिशिंग वेसल्स के लिए इंश्योरेंस सबवेनशन, जिसमें हुल, मशीनरी, फिशिंग नेट, एक्सेसरीज़, प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान और कुल/आंशिक नुकसान को कवर किया जाता है।

विगत तीन वर्षों और वर्तमान वर्ष (2021-22 से 2024-25) के दौरान कुल 131.30 लाख मछुआरों को बीमा कवरेज प्रदान किया गया है। प्रतिवर्ष औसतन 32.82 लाख मछुआरों को इस योजना के तहत लाभ मिला है।

फिशिंग वेसल्स पर ट्रांसपोंडर लगाने का राष्ट्रीय रोलआउट

भारत सरकार ने 364 करोड़ रुपये की लागत से “नेशनल फिशिंग वेसल कम्युनिकेशन एंड सपोर्ट सिस्टम (NRVCSS)” को मंजूरी दी है। इस परियोजना के तहत 1 लाख फिशिंग वेसल्स पर 100% सरकारी सहायता से ट्रांसपोंडर लगाए जा रहे हैं।

इन ट्रांसपोंडर्स की खासियत:

  • जियो-फेंसिंग फीचर
  • समुद्री सीमा पार करने से पहले अलर्ट
  • खराब मौसम या आपात स्थिति में तुरंत संकेत
  • खोज एवं बचाव प्रणाली से सीधा जुड़ाव

अब तक 45,051 ट्रांसपोंडर लगाए जा चुके हैं, जिनमें तमिलनाडु में ब्लू रिवोल्यूशन स्कीम के तहत लगाए गए 3,884 डिवाइस भी शामिल हैं।

समुद्री सुरक्षा जागरूकता के लिए सामाजिक संवाद

मछुआरों को आधुनिक सुरक्षा तकनीकों का उपयोग समझाने के लिए तटीय राज्यों के मत्स्य विभाग और भारतीय तटरक्षक द्वारा नियमित “कम्युनिटी इंटरैक्शन प्रोग्राम (CIPs)” आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में मछुआरों को बताया जा रहा है:

  • समुद्र में जाते समय सुरक्षा उपकरण ले जाने का महत्व
  • पोर्टेबल कम्युनिकेशन सेट का उपयोग
  • मौसम चेतावनियों को पहचानने की प्रक्रिया
  • अनजाने में समुद्री क्षेत्र का उल्लंघन न करना

सरकार की प्रतिबद्धता—सुरक्षित मछुआरे, सुरक्षित समुद्र

लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, मत्स्यपालन विभाग के ये प्रयास समुद्री मछुआरों की आजीविका को सुरक्षित बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम हैं। उन्नत तकनीक व बीमा सुरक्षा के संयोजन से भविष्य में समुद्री दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

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हलधर किसान मछुआरों तक सरकार की यह महत्वपूर्ण जानकारी पहुँचा रहा है और आगे भी आप तक ऐसी उपयोगी व विश्वसनीय खबरें पहुँचाता रहेगा।

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