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दिल्ली देहात में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत वैज्ञानिकों ने किसानों से किया सीधा संवाद, रबी फसल प्रबंधन पर दिया जोर

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गेहूं की उन्नत किस्मों, सरसों में कीट-रोग नियंत्रण और संतुलित उर्वरक उपयोग की दी जानकारी; मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए किसानों को किया प्रेरित

हलधर किसान नई दिल्ली। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और रबी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से देशभर में संचालित ‘खेत बचाओ अभियान–रबी 2026’ के तहत दिल्ली देहात में कृषि वैज्ञानिक किसानों के बीच पहुंचकर उन्हें जागरूक कर रहे हैं। इसी क्रम में 27 अक्टूबर 2026 को कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), उजवा, दिल्ली की ओर से काजीपुर गांव में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें वैज्ञानिकों ने किसानों से सीधा संवाद कर मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, गेहूं एवं सरसों की फसलों के बेहतर प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के महत्व की जानकारी दी।

कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को रबी मौसम की तैयारियों के लिए समयानुकूल कृषि कार्यों, उन्नत तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान पर आधारित उपायों से अवगत कराना था, ताकि वे उपलब्ध कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकें और फसल उत्पादन में सुधार के साथ खेती की लागत को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठा सकें।

30 नवंबर तक चलेगा राष्ट्रव्यापी अभियान

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के दोनों विभागों की ओर से 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक ‘खेत बचाओ अभियान–रबी 2026’ संचालित किया जा रहा है। इस राष्ट्रव्यापी पहल के माध्यम से गांव-गांव में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर किसानों तक कृषि की नवीनतम तकनीकों, वैज्ञानिक अनुसंधान और सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी पहुंचाई जा रही है।

अभियान का प्रमुख उद्देश्य रबी फसलों के बेहतर प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से किसानों को ऐसी तकनीकों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, जिनसे कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके।

अभियान में ‘लैब टू लैंड’ यानी प्रयोगशाला से खेत तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने की अवधारणा को विशेष महत्व दिया गया है। इसके अंतर्गत कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ किसानों के खेतों तथा गांवों तक पहुंचकर उन्हें अनुसंधान आधारित जानकारियां उपलब्ध करा रहे हैं। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक तकनीकों को किसानों की व्यावहारिक जरूरतों से जोड़ना और खेती में उनके प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित करना है।

दिल्ली के 25 स्थानों पर किसानों से संवाद

इस अभियान के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा, दिल्ली की ओर से दिल्ली देहात के विभिन्न गांवों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम और उत्तरी जिलों में 25 स्थानों का चयन किया गया है। इन स्थानों पर किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच सीधा संवाद स्थापित कर स्थानीय कृषि आवश्यकताओं के अनुरूप जानकारी साझा की जा रही है।

अभियान के लिए गठित प्रत्येक टीम में चार से पांच विषय विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों तथा नवोन्मेषी किसानों को शामिल किया जा रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), पूसा, नई दिल्ली के वरिष्ठ वैज्ञानिक भी इन कार्यक्रमों में भाग लेकर किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, अनुसंधान आधारित उपायों और फसल प्रबंधन से जुड़ी जानकारियां प्रदान कर रहे हैं।

इस व्यवस्था के माध्यम से किसानों को विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछने और अपनी कृषि संबंधी समस्याओं पर मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।

मृदा स्वास्थ्य और संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर

काजीपुर गांव में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और मृदा स्वास्थ्य के अनुरूप उर्वरकों का उपयोग करने के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कृषि आदानों के अंधाधुंध इस्तेमाल के बजाय फसल की आवश्यकता, मिट्टी की स्थिति और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर उर्वरक प्रयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

किसानों को बताया गया कि संतुलित उर्वरक प्रबंधन फसलों की बेहतर वृद्धि के साथ मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए खेती में पोषक तत्वों का उपयोग वैज्ञानिक सलाह और आवश्यकता के अनुरूप किया जाना चाहिए। कृषि संसाधनों का विवेकपूर्ण प्रबंधन अपनाकर खेती को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

वैज्ञानिकों ने आगामी रबी मौसम को ध्यान में रखते हुए समय पर कृषि कार्य करने और फसल की विभिन्न अवस्थाओं के अनुसार उचित प्रबंधन अपनाने की आवश्यकता भी बताई।

गेहूं की उन्नत किस्मों और सरसों के प्रबंधन की जानकारी

रबी मौसम की प्रमुख फसलों को ध्यान में रखते हुए किसानों को गेहूं की अधिक उत्पादन क्षमता वाली उन्नत किस्मों के चयन और उपयुक्त फसल प्रबंधन की जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने संतुलित उर्वरक प्रयोग तथा फसल की जरूरतों के अनुसार कृषि कार्यों को समय पर पूरा करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में सरसों की फसल पर भी विशेष चर्चा हुई। किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने, प्रमुख कीटों एवं रोगों के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने और समय पर उचित प्रबंधन उपाय अपनाने के प्रति जागरूक किया गया। फसल की नियमित निगरानी से संभावित समस्याओं का समय रहते पता लगाने और नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।

वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि फसलों में दिखाई देने वाली समस्याओं की पहचान किए बिना कृषि रसायनों का अनावश्यक उपयोग करने से बचें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से उचित मार्गदर्शन प्राप्त करें।

प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि को प्रोत्साहन

कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक खेती, पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व पर भी चर्चा की गई। किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने, उपलब्ध संसाधनों का कुशल उपयोग करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि खेती में दीर्घकालिक लाभ प्राप्त करने के लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी के स्वास्थ्य और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना आवश्यक है। वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर कृषि संबंधी निर्णय लेने से किसानों को फसल प्रबंधन बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।

‘खेत बचाओ अभियान–रबी 2026’ के माध्यम से दिल्ली देहात सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। काजीपुर गांव में आयोजित कार्यक्रम इसी पहल का हिस्सा रहा। अभियान के दौरान गांवों में सीधे संवाद और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण को बढ़ावा देने और रबी फसलों के बेहतर प्रबंधन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह पहल विकसित कृषि और किसानों की समृद्धि के लक्ष्य की दिशा में वैज्ञानिक अनुसंधान तथा खेतों के बीच संबंध मजबूत करने का प्रयास है।

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