भारत करेगा हर्बल औषधियों की वैश्विक कार्यशाला की मेजबानी

India will host global workshop on herbal medicines

6 अगस्त से तीन दिवसीय WHO-IRCH सम्मेलन, 15 देशों के विशेषज्ञ होंगे शामिल

 हलधर किसान दिल्ली l   भारत हर्बल औषधियों के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने जा रहा है। 6 से 8 अगस्त 2025 तक राजधानी नई दिल्ली में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और आयुष मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में WHO-IRCH (International Regulatory Cooperation for Herbal Medicines) की अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस तीन दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य हर्बल औषधियों की सुरक्षा, गुणवत्ता, प्रभावकारिता और नियमन को लेकर वैश्विक सहयोग एवं संवाद को बढ़ावा देना है।

कार्यशाला का आयोजन भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी भेषज संहिता आयोग (PCIM&H) के सहयोग से किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र में आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा और WHO-IRCH के अध्यक्ष डॉ. किम सुंगचोल प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगे। इस सम्मेलन में भूटान, ब्रुनेई, क्यूबा, घाना, इंडोनेशिया, जापान, नेपाल, पैराग्वे, पोलैंड, श्रीलंका, युगांडा और ज़िम्बाब्वे जैसे देशों के प्रतिनिधि सीधे भाग लेंगे, वहीं ब्राज़ील, मिस्र और अमेरिका जैसे देश वर्चुअल माध्यम से जुड़ेंगे।

इस कार्यशाला में पांच प्रमुख उद्देश्यों पर चर्चा की जाएगी –

  1. हर्बल औषधियों के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना।
  2. सुरक्षा और प्रभावकारिता के वैज्ञानिक मानकों को साझा करना।
  3. नियामक ढांचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना।
  4. पारंपरिक औषधियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना।
  5. सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में हर्बल चिकित्सा का एकीकृत समावेश करना।

मुख्य आकर्षणों में WHO-IRCH के कार्य समूह 1 और 3 की समीक्षाएं शामिल हैं, जो औषधियों की सुरक्षा और प्रभावशीलता पर केंद्रित हैं। इसके अतिरिक्त अश्वगंधा (Withania somnifera) पर एक विस्तृत केस स्टडी प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें इसके उपयोग, प्रभाव और वैज्ञानिक परीक्षणों पर चर्चा होगी।

प्रतिभागियों को PCIM&H की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में एचपीटीएलसी (HPTLC) तकनीक, भारी धातु विश्लेषण, और कीमो-प्रोफाइलिंग जैसे उन्नत परीक्षणों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। कार्यशाला के दौरान ही “आयुष फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम” की भी शुरुआत की जाएगी, जिसका उद्देश्य पारंपरिक औषधियों की निगरानी और सुरक्षा रिपोर्टिंग को सुदृढ़ बनाना है।

इस आयोजन का एक अन्य महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसमें शामिल विदेशी प्रतिनिधियों को भारत के आयुष संस्थानों का भ्रमण भी कराया जाएगा, जिसमें राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सा संस्थान (NIUM), गाजियाबाद और अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली प्रमुख हैं। इससे भारत के एकीकृत स्वास्थ्य ढांचे की कार्यप्रणाली और अनुसंधान क्षमता को विश्व मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।

इस तरह की कार्यशाला न केवल भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में सहायक होगी, बल्कि हर्बल उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और मानकीकरण को लेकर एक वैश्विक फ्रेमवर्क तैयार करने की दिशा में भी निर्णायक साबित होगी। किसानों और जड़ी-बूटी उत्पादकों के लिए भी यह सम्मेलन नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा, जिससे हर्बल क्षेत्र में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका और मज़बूत होगी।

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