हलधर किसान इंदौर l उप संचालक कृषि सी.एल. केवड़ा ने बताया कि इंदौर जिले के कुछ क्षेत्रों से पौधों के अचानक सूखने की शिकायत आ रही हैं। ज्यादातर क्षेत्रों में राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट के लक्षण है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि इसके नियंत्रण हेतु फफूंदनाशक फ्लुक्सापयोक्साड + पायराक्लोस्ट्रोबिन (300 ग्राम/हे.) या पायरोक्लोस्ट्रोबिन + इपोक्सीबोनाजोल (750 मिली ग्राम/हे.) का छिड़काव करें। एन्थेक्नोज रोग के प्रारंभिक लक्षण भी देखे जा रहे हैं।

नियंत्रण हेतु टेबूकोनाजोल 25.9 ईसी (625 मिलीग्राम/हे.) या टेबूकोनाजोल 38.39 एस.सी. (625 मिलीग्राम/हे.) का घोल बनाकर स्प्रे करें। पीला मोजेक के लक्षण दिख रहे हैं तो नियंत्रण हेतु प्रारंभ में खेत से पौधों को निष्कासित करें एवं फ्लोनीकेमिड (200 ग्राम/हे.) और थायोमेथक्स + लैम्बडासायहेलोथ्रिन (125 मिलीग्राम/हे.) अथवा बीटासायफ्लूथिन+इमिडाक्लोप्रिड (350 मिलीग्राम/हे.) का स्प्रे करें, इससे तना मक्खी का भी नियंत्रण होगा।
सोयाबीन की फसल पर टी आकार के वर्ड पर्चेस लगाएं। इससे कीट भक्षी पक्षियों द्वारा भी इल्लियों की संख्या कम करने में सहायता मिलेगी। मक्का की फसल पर आर्मी वर्म कीटों के रोकथाम हेतु क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल 150 एम.एल. प्रति हेक्टर का स्प्रे करें एवं सतत निगरानी रखें।
सोयाबीन फसल पर सूखे का अंतराल भी जारी है, इस स्थिति में हल्की सिंचाई (बौछारी) करें। नुकसान को कम करने हेतु एन्टीट्रॉसप्रिरेंट जैसे पौटेशियम नाइट्रेट (1 प्रतिशत) या मैग्नीशियम कार्बोनेट / ग्लिसराल (5 प्रतिशत) अथवा 19:19:19 (1 किलो/एकड़) का छिड़काव किया जाये।
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