कृषि आदान विक्रेता संघ ने लगाया फर्टिलाइजर के अवैध व्यापार का आरोप, प्रदेशभर में सौंपे ज्ञापन कि जांच की मांग
हलधर किसान इंदौर। मार्कफेड एवं सोसायटियों द्वारा किए जा रहे फर्टिलाईजर व्यापार पर सवाल उठ रहे है। कृषि व्यापारियों के सबसे बड़े संगठन कृषि आदान विक्रेता संघ ने शासन के आदेश का हवाला देने हुए मार्कफेड और सोसायटियों पर सांठगांठ कर उर्वरक विक्रय में बिना योग्यताधारी व्यक्तियों की नियुक्ति का गंभीर आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। संघ ने प्रदेश के हर जिले में संगठन के माध्यम से कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जिले में चल रही इस मनमानी, अनियमितता पर रोक लगाने की मांग की है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष मानसिंह राजपुत, प्रदेश सचिव संजय कुमार रघुवंशी, प्रदेश संगठन मंत्री विनोद जैन, इंदौर कृषि आदान विक्रेता संघ जिलाध्यक्ष श्रीकृणा दुबे ने केंद्र सरकार के 10 अक्टूबर 2015 के असाधारण राजपत्र के गजट का हवाला देते हुए बताया कि 30 जुलाई 2018 से फर्टिलाईजर व्यापार करने वाला कोई भी व्यक्ति केमिस्ट्री या बायोलॉजी में स्नातक की डिग्रीधारी हो या 48 सप्ताह का देसी डिप्लोमा कोर्सधारक हो, 6 माह का कोर्स यिका हुआ हो या 30 जुलाई 2018 के प्रावधान अनुसार 15 दिवसीय इंटीग्रेटेड न्यूटिएंट मैनेजमेंट का सर्टिफिकेट कोर्स किया हुआ व्यक्ति उर्वरक का रिटेल व्यवसाय कर सकता है। यह प्रावधान समिति एवं मार्कफेड में ऐसे डिप्लोमाधारी व्यक्तियों को नियोजित किया जाएगा। इस नियम को लागू होने के 10 साल बाद भी जिले में आज तक किसी भी सोसायटी या मार्कफेड के गोदाम पर भारत सरकार द्वारा निर्धारित शैक्षणिक योग्यताधारी व्यक्ति की नियुक्ति नही की गई है।
आरटीआई में नही दे रहे जवाब
प्रदेश सचिव श्री रघुवंशी ने बताया इस मनमानी को उजागर करने के लिए उनके द्वारा 5 फरवरी 2025 को सभी 52 जिलो में उप संचालक कृषि को आरटीआई के माध्यम से जानकारी भी मांगी गई है लेकिन उनके द्वारा कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है । कुछ जिलों में कृषि विभाग में फोन से बात करने पर सम्बंधित अधिकारी अनऑफिशियल रूप से यह कहते हैं कि यदि यह जानकारी हमने आपको ऑफिशियल रूप से दे दी तो हमारी नौकरी पर आ जाएगी क्योंकि हम पिछले 10 सालों से यह अवैध व्यापार करवा रहे हैं।
उक्त दोनों गजट की कॉपी के साथ ही डायरेक्टर एग्रीकल्चर भोपाल द्वारा सभी उपसंचालक कृषि को 27/05/ 2017 को जारी किए गए पत्र की कापी भी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध है ।
निजी व्यापारियों से करा रहे नियम पालन, खुद कर रहे गोलमाल
श्री रघुवंशी ने आगे बताया कि इन्हीं प्रावधानों के अनुसार पिछले 10 सालों से मध्य प्रदेश में निजी व्यापारियों को उर्वरक विक्रय हेतु लाइसेंस जारी किया जा रहे हैं, लेकिन सोसाइटियों को इन्हीं प्रावधानों से अवैध रूप से छूट दी जा रही है एवं उनके लाइसेंस बार.बार रिन्यूअल किए जा रहे हैं।
ऐसा लगता है कि मप्र के सभी जिले में उपसंचालक कृषि एवं मार्कफेड और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की आपसी मिली भगत के कारण भारत सरकार के द्वारा निर्धारित नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए अवैध रूप से व्यवसाय करवाया जा रहा है ।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में पिछले 10 सालों से उन सोसाइटियों से उर्वरकों का व्यापार करवाया जा रहा है जिनके पास 40 प्रतिशत किसान सदस्य है उनमें से भी 50 प्रतिशत डिफाल्टर है। मतलब यह कि प्रदेश के सिर्फ 20 प्रतिशत किसानों के लिए 75 प्रतिशत उर्वरक आवंटित किया जा रहा है और 80 प्रतिशत किसान जो कि निजी व्यापारियों पर निर्भर हैं उनके लिए सिर्फ 25 प्रतिशत आवंटित किया जा रहा है। प्रदेश में 75 प्रतिशत यूरिया एवं अन्य खाद जिन सोसाइटियों के माध्यम से विक्रय करवाया जाता है और उन्ही सोसाइटियों द्वारा भारत सरकार के नियमों के खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है ।
संगठन की ओर से सभी जिलों के जिलाधीश को एक पत्र लिखकर निवेदन किया गया है कि इस बारे में सभी जिलों में तत्काल एक कमेटी का गठन करके जांच करवाई जाए एवं दोषियों पर कार्रवाई की जावे और जिले में अवैध रूप से फर्टिलाइजर का व्यापार करने वाली सोसाइटियों के लाइसेंस तत्काल निरस्त किए जावे।
सर्वहिताय कृषि व्यापारी सेवा समिति के अध्यक्ष संजय रघुवंशी ने इस पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्र डॉ मोहन यादव, कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना एवं संचालक कृषि मध्य प्रदेश शासन भोपाल को भेजते हुए मांग की है कि वे इस गंभीर मामले में तत्काल ही एक कमेटी का गठन करके भारत सरकार के नियमों को मप्र के जिले में लागू करने की व्यवस्था करेंगे और दोषी व्यक्तियों पर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे ।
8 हजार युवाओं को मिलती नौकरी
रघुवंशी ने चिंता जताते हुए कहा कि मार्कफेड और सोसायटियों के नियमों की अनदेखी से करीब 8000 पात्र युवा इस नौकरी से वंचित रह गए है। सोसाइटियों पर बीएससी किए हुए व्यक्तियों को रोजगार दिया जा सकता था लेकिन कृषि विभाग एवं सोसाइटियों की मिली भगत से यह अवसर खो दिया गया है। आज भी सरकार चाहे तो कृषि विज्ञान में स्नातक या डिग्रीधारी 8000 लोगों को मध्य प्रदेश में नियोजित करते हुए रोजगार दिया जा सकता है।
यह भी पढेंः- बीज कानून पाठशाला अंक:23 बीज उत्पादकों के अधिकार पर जानकारी की दरकार
