विदेश में नौकरी करने का ऑफर ठुकराया, गांव में जैविक खेती को दे रहे बढ़ावा

विदेश में नौकरी करने का ऑफर ठुकराया, अब गांव में जैविक खेती से कर रहे कमाल

हलधर किसान (सफलता की कहानी)। देश में इन दिनों जैविक खेती को दिए जा रहे प्रोत्साहन से किसान प्रभावित होने लगे है। बेहतर पैदावार के लिए किसान अब जैविक खेती को न केवल अपना रहे बल्कि अच्छा उत्पादन भी ले रहे है। सरकार भी ऐसे किसानों को गोवर्धन योजना तहत बढ़ावा दे रही हैं।  

विदेश में नौकरी करने का ऑफर ठुकराया, गांव में जैविक खेती को दे रहे बढ़ावा

जैविक खेती

जैविक खेती में पश्चिमी चंपारण के नरकटियागंज प्रखंड के छोटे से गांव बड़निहार के विवेक प्रियदर्शी ने अपनी अलग पहचान बना रही है।

विदेश में नौकरी करने का ऑफर ठुकराया, गांव में जैविक खेती को दे रहे बढ़ावा इसलिए भी चर्चाओ में है कि उन्होंने आधुनिक दौर में प्रतिस्पर्धा को महत्व न देते हुए जैविक खेती को बढ़ावा देने का अभियान शुरू किया है। इन्होंने रासायनिक खाद को खेती से दूर करने की मुहिम छेड़ी है।

दिल्ली से आईआईटी की डिग्री लेकर शुरुआती दौर में नामी कंपनियों में काम का अनुभव प्राप्त किया। इसके बाद विदेश में काम करने के लिए अच्छे पैकेज को ठुकरा कुछ अलग करने की योजना बनाकर अपने गांव आ गए। विवेक ने गांव आकर अपने खेतों में जैविक खाद द्वारा फसल लगाने का काम शुरू किया।

विवेक बताते है कि हम अपने खेतों में रासायनिक खाद नहीं देते है। पूरी तरह से जैविक खाद का उपयोग कर स्वस्थ फसल उगाते है। इसके लिए विवेक ने अपने यहां खुले में घूमने वाले गाय, बैल जैसे स्वछंद विचरण करने वाले पशुओं को अपने मवेशी खाने में लाकर पालने का काम किया।

इससे उन्हे दूध तो मिलता ही है। साथ ही उनके गोबर से वह पहले गोबर गैस बनाने का काम कराते है। फिर बचे हुए गोबर से ओर्गेनिक जैविक खाद बना अपने खेतों में लिक्विड खाद डाल फसल उगाने का काम करते है।  

जिला कृषि पदाधिकारी प्रवीण कुमार राय ने बताया कि जैविक खेती से स्वास्थ्य के लाभ के साथ ही इसके निर्यात के लिए ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट मिल सकता है, जिससे किसान को बाजार से इसकी अच्छी कीमत भी मिल सकती है। 

जैविक खेती क्या है? 

जैविक खेती एक ऐसी पद्धति है, जिसमें रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों तथा  खरपतवारनाशियों के स्थान पर जीवांश खाद पोषक तत्वों (गोबर की खाद कम्पोस्ट, 

हरी खाद, जीवणु कल्चर, जैविक खाद आदि) जैव नाशियों (बायो-पैस्टीसाईड) व बायो  एजैन्ट  जैसे  क्राईसोपा  आदि  का  उपयोग  किया  जाता  है,  

जिससे  न  केवल  भूमि  की  उर्वरा शक्ति लम्बे समय तक बनी रहती है, बल्कि पर्यावरण भी प्रदूषित नहीं होता तथा  कृषि लागत घटने व उत्पाद की गुणवत्ता बढऩे से कृषक को अधिक लाभ भी मिलता  है।

जैविक  खेती  वह  सदाबहार  कृषि  पद्धति  है,  जो  पर्यावरण  जल  व  वायु  की  शुद्धता, भूमि का प्राकृतिक स्वरूप बनाने वाली, जल धारण क्षमता बढ़ाने वाली, धैर्यशील  कृत संकल्पित होते हुए रसायनों का उपयोग आवश्यकता अनुसार कम से कम करते  हुए  कृषक  को  कम  लागत  से  दीर्घकालीन स्थिर व अच्छी गुणवत्ता वाली पारंपरिक पद्धति है। 

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