पुलिस की नौकरी छोड़ शुरू की चन्दन की खेती, अब 10 राज्यों में 50 एकड़ में खेती कर रहे हैं
हलधर किसान। चंदन की खेती कमाई का एक बेहतर जरिया हो सकता है. इसमे कई युवाओ के साथ नॉकरी पेशा भी रुचि ले रहे है।
गोरखपुर जिले में एक जगह है पादरी बाजार. यहां का एक युवक इन दिनों खूब चर्चा में है. वजह है सफेद चंदन की खेती, वो भी पुलिस की नौकरी छोड़कर. साल 1998 में पुलिस सर्विस में आने के बाद अविनाश ने वर्ष 2005 में खेती के लिए पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया.
सिर्फ 5 पौधे से से खेती की शुरुआत करने वाले अविनाश आज 10 राज्यों में 50 एकड़ क्षेत्र में सफेद चंदन की खेती कर रहे हैं. बस अब वह चंद वर्षों का इंतजार कर रहे हैं. उनको उम्मीद है कि 10 साल पूरा होते ही करोड़ों की इनकम होगी.
साल 2012 में आया सफेद चंदन की खेती का विचार
अविनाश कुमार यादव के मुताबिक सफेद चंदन की खेती का विचार उनके मन में साल 2012 में आया था. प्रयोग के तौर पर 5 से 7 पौधा अपने खेत में लगाया था. ये पौधे बेहद तेजी बढ़ने लगे. इससे लगा कि आने वाले वक्त में इसकी खेती से काफी फायदा हो सकता है.

फिर कर्नाटक से 50 सफेद चंदन के पौधा लेकर आए. एक पौधे की कीमत 200 रुपये थी.अविनाश बताते हैं कि मेरा बचपन से रूझान खेती-किसानी तरफ रहा है.अब तक देश के 80 कृषि विज्ञान केंद्र और 25 कृषि विश्वविद्यालय का दौरा करके खेती के नई-नई तकनीक की जानकारी ले चुका हूं. खेतों में जो चंदन के पौधे लगाए हैं. अब धीरे-धीरे पेड़ बनने की दिशा में हैं.
सफेद चंदन को देखभाल की अधिक जरूरत नहीं
अविनाश कहते हैं कि सफेद चंदन के पौधों को अधिक देखभाल की जरूरत नहीं है. बंजर जमीन पर भी इसकी की खेती की जा सकती है.
इसको कम पानी की जरूरत होती है. सफेद चंदन के पेड़ है की ऊंचाई 15 से 20 फीट होती है. और इसको तैयार होने में 15-20 साल लगते हैं. सफेद चंदन को बढ़ने के लिए किसी सहायक पौधे की जरूरत होती है.
अरहर के पौधे के तौर पर इसका उपयोग कर सकते हैं. अरहर की फसल से चंदन को नाइट्रोजन तो मिलता ही है साथ ही इसके तने और जड़ों की लकड़ी में सुगंधित तेल का अंश बढ़ता जाता है.
कई प्रोडक्ट बनाने में काम आता है सफेद चंदन की खेती
सफेद चंदन की इस्तेमाल औषधीय बनाने, साबुन, अगरबती, कंठी माला, फर्नीचर, लकड़ी के खिलौने, परफ्यूम, हवन सामग्री बनाने में होता है. एक एकड़ जमीन पर सफेद चंदन के 410 पौधे लगाए जा सकते हैं. पौधों के बीच कम से कम 10 फीट की दूरी होना जरूरी है. एक एकड़ में सफेद चंदन के पौधे लगाने में करीब 1 लाख रुपये तक की लागत आती है.
- भारत ने झींगा मछली क्षेत्र के लिए सहयोग बढ़ाया; बीते पांच वर्ष से अमेरिका को सीफूड का निर्यात मजबूत बना हुआ है lहलधर किसान, नई दिल्ली सरकार ने बाजार में विविधता लाने और भारत के सीफूड निर्यात क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई पहल की हैं।वाणिज्य विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में एक वैधानिक निकाय, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) व्यापार प्रतिनिधिमंडल भेजकर, खरीदने-बेचने वालों के बीच बैठकें आयोजित करके और एशिया व यूरोप में प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सीफूड मेलों में भाग लेकर सीफूड निर्यात बाजार में विविधता लाने के लिए सक्रिय तौर पर काम कर रहा है। 2025 में चेन्नई और नई दिल्ली में आयोजित रिवर्स क्रेता-विक्रेता बैठकों से 100 से क्रेता-निर्यातकों की बातचीत हुई।एमपीईडीए निर्यातकों को नए अवसरों का लाभ उठाने में मदद करने के लिए कई एफटीए पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजितकर रहा है।वाणिज्य विभाग बाजार पहुंच के मुद्दों को हल करने के लिए, विशेष रूप से ईयू के साथ, एफटीए वार्ताओं को तेज करने के लिए प्रयास कर रहा है भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, इंडोनेशिया, जापान, थाईलैंड, यूनाइटेड किंगडम और रूस के दूतावासों/ उच्चायोगों के साथ कई बैठकें की हैं इन चर्चाओं में, अन्य बातों के साथ ही, व्यापार संबंधों को मजबूत करना, मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता आश्वासन, जैव सुरक्षा और गुणवत्ता अनुपालन, कोल्ड-चेन में सुधार, प्रसंस्करण, स्वचालन, अनुसंधान और विकास सहयोग, और प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण जैसे विषय शामिल थे। बीते पांच वर्ष में अलग-अलग योजनाओं के अंतर्गत झींगा मछली के किसानों और निर्यातकों को दी गई कुल वित्तीय मदद नीचे दी गई है: झींगा मछली के किसानों को मदद करने के लिए ये कदम उठाए गए हैं: यह भी पढेंः- जिले में धान खरीदी ने पकड़ी रफ्तार: किसानों को मिल रहा उनकी उपज का वाजिब दाम Post Views: 12
- वनांचल के दुर्गम चितालखोली गांव में पहुँची प्रबुद्ध तथागत फाउंडेशन की टीम, आदिवासी परिवारों को बांटे गर्म कंबल—बच्चों को मिली स्वेटर और बिस्कुटहलधर किसान बालाघाट। वनांचल क्षेत्र में बसे नक्सल प्रभावित गांव चितालखोली में शनिवार को एक अनोखी सामाजिक पहल देखने को मिली, जब प्रबुद्ध तथागत फाउंडेशन बोरी लालबर्रा की टीम करीब 100 किलोमीटर की कठिन यात्रा तय कर गाँव पहुँची। कठोर ठंड के बीच आदिवासी परिवारों की जरूरतों को समझते हुए फाउंडेशन ने यहाँ शिविर आयोजित…
- जिले में धान खरीदी ने पकड़ी रफ्तार: किसानों को मिल रहा उनकी उपज का वाजिब दामहलधर किसान भोपाल l प्रदेश सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था शुरू किए जाने के बाद जिले में धान उपार्जन कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत कृषि विभाग एवं सहकारी समितियों द्वारा किसान हित में व्यापक तैयारी की गई है, जिसका परिणाम यह है कि…
- सरकार के नए विधयेक पर बीज कानून रत्न से सम्मानित आरबी सिंह ने आपत्ति के साथ दिए सुझावहलधर किसान. इंदौर/ नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने बीज विधेयक 2025 का ड्राफ्ट जारी किया है। प्रस्तावित विधेयक मौजूदा बीज अधिनियम, 1966 और बीज (नियंत्रण) आदेश, 1983 का स्थान लेगा। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की तरफ से जारी ड्राफ्ट में बाजार में उपलब्ध बीजों और रोपण सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित…
- कृषि भूमि नामांतरण के लिए पटवारी ने मांगी 25 हजार की रिश्वत, लोकायुक्त टीम ने दबोचाहलधर किसान खरगोन। जिले में एक बार फिर राजस्व विभाग को शर्मिंदा करने वाला मामला सामने आया है। मंडलेश्वर के पटवारी हल्का नंबर 24 में पदस्थत पटवारी छतर सिंह चौहान को शुक्रवार दोपहर 2 बजे लोकायुक्त पुलिस इंदौर ने 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगेंहाथों गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी के बाद एक बार…





