बीज कानून रत्न, सेवानिवृत्त एरिया मैनेजर आर.बी. सिंह का व्यापारियों के लिए कानूनी ज्ञान

beej kanun

बीज विक्रय लाइसेंस एक छलावा…

हलधर किसान इंदौर। सीड्स कारपोरेशन लिमिटेड (भारत सरकार का संस्थान) के बतौर एरिया मैनेजर पद से सेवानिवृत्त हुए बीज कानून रत्न से सम्मानित श्री आर.बी. सिंह अपने कार्यकाल के दौरान बीज व्यापार को लेकर संग्रहित किए गए ज्ञान को किताबों, कार्यशाला, प्रशिक्षण शिविरो के माध्यम से देशभर में पहुंचा रहे है। हरियाणा हिसार निवासी श्री सिंह ने अब तक करीब 4 पुस्तकें लिखी है, जिसमें उन्होंने बीज व्यापार में आने वाली समस्याओं, लायसेंस प्रक्रिया, बीज गुणवत्ता आदि की बारीकि से जानकारी प्रकाशित की है। हलधर किसान से भी उन्होंने बीज लायसेंस को लेकर विभागीय आवेदन प्रक्रिया से लेकर लायसेंस में बरती जाने वाली सावधानी सहित विभागीय विसंगतियों को उजागर करते हुए अन्य प्रक्रिया की बिंदूवार जानकारी साझा की है|

सेवानिवृत्त आर.बी. सिंह 1

श्री सिंह का कहना है कि बीज कृषि उत्पादन का श्रेष्ठ आदान है इसलिए बीज की गुणवत्ता उत्तम ही नहीं अति उत्तम होनी चाहिए। बीज गुणवत्ता के लिए बीज अधिनियम, बीज नियन्त्रण आदेश में बीज निरीक्षक/बीज लाइसैंस प्राधिकारी को अपार शक्तियां प्र्रदान की हुई है।  बीज विक्रय करने हेतु लाइसेंस लेना अति आवश्यक है। बीज विक्रय लाइसैंस प्राप्त करने के लिए प्रथम बार फार्म-ए में प्रार्थना पत्र लाइसंसिंग प्राधिकारी को दिया जाता है और वह प्राधिकारी पूर्णरूप से सन्तुष्ट होने पर फार्म -ठ में लाइसैंस स्वीकृत करता है और फिर प्रत्येक 5 साल बाद लाइसैंस फार्म -ब में नवीनीकृत करवाया जाता है।

 मुझे पंजाब सरकार द्वारा हरियाणा की एक बीज उत्पादक कम्पनी को प्रदान लाइसेंंस प्राप्त हुआ और पढ़कर लगा कि बीज उत्पादकों के लिए यह लाइसेंस नहीं मात्र छलावा है।

1. लाइसैंसिंग अथॉरिटी :-

पंजाब राज्य की अधिसूचना दिनांक 27.07.1984 के अनुसार केवल मुख्य कृषि अधिकारी ही लाइसैंसिंग अथॉर्टी  है परन्तु हरियाणा की बीज कम्पनी को संयुक्त निदेशक (कृषि) मोहाली पंजाब ने लाइसैस जारी किया गया। यह लाइसैंस अविधिक है। अनुभव किया है कि पंजाब मेें फुटकर बीज विक्रेताओं को मुख्य कृषि अधिकारी लाइसैंस जारी करता है और बीज उत्पादक कम्पनियों को संयुक्त संचालक कृषि, मोहाली लाइसेंस जारी करता है। लाइसैंस केवल अधिसूचित अधिकारी ही जारी कर सकता है। हरियाणा में प्रत्येक जनपद में उप-निदेशक (कृषि) लाइसैंसिंग प्राधिकारी है। अत: सभी लाइसैंस उप-निदेशक (कृषि) ही जारी करता है।

2. दूसरे राज्य में लाइसैंस :-

बीज विक्रय एक राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। दूसरे राज्य के कृषि अधिकारी उनके यहां लाइसैंस लेकर बीज विक्रय को बाध्य करते हैं। वास्तव में ऐसा नहीं है बल्कि एक राज्य का बीज उत्पादक दूसरे राज्य में अपना दफतर नहीं खोलता या गोदाम नहीं रखता और अपने बीज उस राज्य के मंजूरशुदा विक्रेताओं के माध्यम से बेचता है तो उसे उस राज्य में लाइसैंस लेने की आवश्यकता नहीं है। यह बात उप-आयुक्त (कोटी नियन्त्रण) भारत सरकार कृषि मन्त्रालय ने अपने पत्र दिनांक 29.04.2016 को स्पष्ट करते हुए सभी राज्य के निदेशकों को पत्र भेजे थे। उन्होंने इस पत्र का विरोध भी नही ं किया और तब भी पंजाब एवं अन्य प्रान्तों में वहां का लाइसैंस लेने के लिए बाध्य किया जाता है। हरियाणा, हिमाचल प्रदेश में उत्पादकों, विक्रताओं का इन राज्यों में बीज विक्रय के लिए बाहरी राज्यों के विक्रेताओं को लाइसैंस लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाता है।

3. फार्म-बी की भाषा :-

बीज विक्रय लाइसैंस फार्म -बी में प्रदान किया जाता है, जिसकी भाषा निम्न प्रकार है:-
“ subject to the provision of seed control order 1983 & the termes & conditions of the licence, m/s shri………………………is hereby granted liecence to sell export, import and storage of said purpose of seed ’’
उपरोक्त भाषा के आधार पर प्रार्थी बीज विक्रेता को बीज बेचने, आयात करने, निर्यात करने तथा भण्डारण करने के लिये लाइसैंस प्रदान किया जाता है अर्थात् इस लाइसैंस के आधार पर प्रार्थी विदेश -अमेरिका, श्रीलंका, रूस, जापान को बीज निर्यात कर सकता है, परन्तु विधि की विडम्बना देखिये कि हरियाणा राज्य का लाइसैंस प्राप्त बीज उत्पादक पंजाब में बीज विक्रय के लिए अलग से लाइसैंस लेन े के लिए बाध्य किया जाता है।

4. विक्रय के लिए फसल/किस्में :-

हरियाणा के बीज उत्पादक को जारी लाइसैंस इस कारण भी अविधिक है। क्योंकि फार्म -बी में विक्रय की फसलें एवं किस्में अंकित हैं। वास्तव में फार्म -ए जो प्रार्थना-पत्र दिया जाता है उसके पांचवें बिन्दु में केवल फसलों के नाम होना जरूरी है किस्मों का नही, लेकिन कृषि अधिकारी किस्मों के नाम भी प्रार्थना-पत्र में अंकित करने के लिए बाध्य करते हैं।
उच्च न्यायालय अमरावती, आन्ध्रप्रदेश ने निर्णय देते हुए किस्मों का उल्लेख फार्म-ए के पांचवें बिन्दु में करना आवश्यक नहीं बताया। पंजाब सरकार द्वारा जारी फार्म-बी में फसल/किस्मों को अंकित किया गया है,न्यायालय में चुनौतीपूर्ण  है। हर राज्य अपने हिसाब से फार्म -बी में बदलाव नहीं ला सकती।

5. फार्म-बी (लाइसैंस) में किस्में :-

पंजाब सरकार द्वारा जारी लाइसैंस में बिकने वाली किस्मों का उल्लेख है कि बीज नियन्त्रण आदेश-1983 के अनुसार पंजाब राज्य में उगाई जाने वाली किस्में। बीज नियन्त्रण आदेश-1983 में पंजाब राज्य में उगाई जाने वाली किस्मों का कहीं उल्लेख नहीं है। बीज नियन्त्रण आदेश द्वारा बीज निरीक्षक का प्रभाव अधिसूचित एवं गैर अधिसूचित किस्मों पर है, इस प्रकार सभी किस्में पंजाब में उगाई जा सकती हैं।

6. बीज आयात निर्यात :-

यइ लाइसैंस इसलिए भी अमान्य है कि फार्म -बी में बिना भारत सरकार की अनुमति के बदलाव किया गया है उसमें किस्में भी लिखी गई हैं जो नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा पंजाब सरकार ने फार्म-ठ की भाषा से बड़ी चतुराई से आयात-निर्यात शब्द हटा दिए। इस लाइसैंस में नीचे दी गई  शर्तों को हू-ब-हू रखा गया है और शर्तों के े बिन्दू 5 में स्पष्ट लिखा है डीलर समय-समय पर अपने कार्य  स्थल के बदलाव तथा आयात-निर्यात की सूचनाएं देगा यानि गुड़ खाना गुडय़ानी से परहेज।
उपरोक्त लाइसैंस अविधिक है। एक शायर कहते हैं कि –
झूठ बोलने वाला और झूठ सुनने वाले सहमत हों तो वह अपराध नहीं होता,
यहाँ भी ऐसा ही है इस प्रकार के लाइसैंस को जारी करने वाला और प्राप्त करने वाला दोनों सन्तुष्ट हैं तो यह लाइसेंस सही है परन्तु यह गैर कानूनी है।

कृष्णा दुबे


:: लोकोक्ति::
 अद्भुत है बीज का अंकुरण
 स्वयं को होम कर, करता नया सृजन।

– सौजन्य से – 
श्री संजय रघुवंशी, प्रदेश संगठन मंत्री, कृषि आदान विक्रेता संघ मप्र 

श्री कृष्णा दुबे, अध्यक्ष, जागरुक कृषि आदान विक्रेता संघ इंदौर

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