हलधर किसान दिल्ली l जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग ने कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए यौन उत्पीड़न (पॉश) अधिनियम 2013 पर ओरिएंटेशन एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आर्थिक सलाहकार एवं आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के अध्यक्ष ने की।
कार्यक्रम में अधिवक्ता एवं ICC की बाहरी सदस्य सुश्री जानवी सतपाल बब्बर ने पॉश अधिनियम के प्रावधानों, नियमों तथा कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम का उद्देश्य
इस जागरूकता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विभाग के सभी कर्मचारियों को—
- पॉश अधिनियम के कानूनी प्रावधानों की गहरी समझ प्रदान करना,
- कार्यस्थल पर गरिमा, सुरक्षा और समान अवसर की संस्कृति को बढ़ावा देना,
- और कर्मचारियों में संवेदनशीलता एवं जागरूकता विकसित करना था।
अधिनियम का महत्व
यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिबंध और निवारण) अधिनियम 2013, सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक विशाखा निर्णय के अनुरूप लागू किया गया था।
यह अधिनियम :
- महिलाओं के लिए सुरक्षित और गरिमामय कार्यस्थल सुनिश्चित करता है,
- अपराध की स्पष्ट परिभाषा देता है,
- प्रत्येक 10 या अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की स्थापना अनिवार्य करता है,
- और जागरूकता, क्षमता-विकास तथा संवेदीकरण जैसे सक्रिय कदमों पर जोर देता है।
इन प्रावधानों के माध्यम से सरकार का उद्देश्य एक ऐसा कार्य वातावरण तैयार करना है, जहाँ सभी कर्मचारी—विशेषकर महिलाएँ—आत्मसम्मान, सुरक्षा और समान अवसर के साथ कार्य कर सकें।
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