कलेक्टर ने ली कृषि, सिंचाई एवं विद्युत विभाग की संयुक्त बैठक रबी सीजन में फसलों की सिंचाई तैयारियों की गहन समीक्षा, कम पानी वाली फसलों पर जोर

किसानों के लिए सम्मान और समृद्धि का प्रतीक बनी भावांतर योजना

हलधर किसान बालाघाट। कलेक्टर श्री मृणाल मीना ने 18 दिसंबर को कृषि, सिंचाई एवं विद्युत विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक लेकर चालू रबी सीजन में फसलों की सिंचाई संबंधी तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में जिले के जलाशयों में उपलब्ध पानी के समुचित उपयोग, विभागीय समन्वय तथा किसानों को समय पर सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।

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कलेक्टर श्री मीना ने कहा कि जिले में रबी फसलों की सिंचाई के लिए उपलब्ध जल संसाधनों का योजनाबद्ध एवं संतुलित उपयोग किया जाए। कृषि, सिंचाई एवं विद्युत विभाग आपसी समन्वय बनाकर कार्य करें, ताकि किसानों को सिंचाई, बीज, उर्वरक एवं बिजली की किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जलाशयों से छोड़े जा रहे पानी का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर रबी फसलों की सिंचाई में सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में कलेक्टर ने रबी सीजन में धान की फसल के रकबे को कम करने और कम पानी में पकने वाली वैकल्पिक रबी फसलों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को गेहूं, चना, मसूर, राई-सरसों, अलसी, उड़द जैसी फसलों के लिए प्रेरित किया जाए। इन फसलों के प्रमाणित बीज समय पर उपलब्ध कराकर निर्धारित अवधि में बोवाई कराई जाए। कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को किसानों से सतत संपर्क में रहकर मार्गदर्शन देने के निर्देश दिए गए।

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कलेक्टर श्री मीना ने स्पष्ट कहा कि गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष रबी सीजन में धान का रकबा कम होना चाहिए और अन्य रबी फसलों का रकबा बढ़ना चाहिए। इसके साथ ही किसानों को आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने पराली जलाने की घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जिले में कहीं भी पराली जलाने की घटना नहीं होनी चाहिए। यदि कोई किसान ऐसा करता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा जुर्माने की राशि समर्थन मूल्य पर बेची गई धान की राशि से वसूल की जाए। नरवाई प्रबंधन के लिए जिले में लक्ष्य के अनुरूप हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, बेलर एवं स्मार्ट सीडर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।

सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि जिले की नहरों के माध्यम से रबी फसलों की सिंचाई व्यवस्थित रूप से सुनिश्चित की जाए। सिंचाई के दौरान नहरों को क्षति पहुंचाने वाले व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों को कृषि एवं सिंचाई विभाग से समन्वय कर किसानों को आवश्यकता अनुसार अस्थायी बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने तथा निर्धारित घंटों तक नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में उपसंचालक कृषि ने जानकारी दी कि गत वर्ष जिले में रबी सीजन के दौरान 47 हजार हेक्टेयर में धान एवं 34 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल लगाई गई थी। इस वर्ष धान का रकबा घट रहा है और अन्य रबी फसलों का क्षेत्रफल बढ़ रहा है। अब तक लगभग 30 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बोवाई हो चुकी है। चना का रकबा 20 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 25 हजार हेक्टेयर हो गया है। राई-सरसों 9 हजार से बढ़कर 21 हजार 500 हेक्टेयर, अलसी 5 हजार से बढ़कर 8 हजार हेक्टेयर, मसूर 400 से बढ़कर 600 हेक्टेयर तथा उड़द 500 से बढ़कर 3 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गई है। इस सीजन में 900 हेक्टेयर में गन्ने की फसल भी लगाई जा चुकी है। उन्होंने बताया कि रबी फसलों के लिए जिले में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक भंडारण उपलब्ध है।

सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता ने बताया कि जमुनिया, नहलेसरा, ढूटी, गांगुलपारा, राजीव सागर सहित अन्य परियोजनाओं से 14 दिसंबर से नहरों में पानी छोड़ा जा रहा है। जिले में कुल 2800 किमी लंबाई की नहरें हैं, जिनमें से 2200 किमी कच्ची एवं 600 किमी पक्की हैं। नहरों की पूर्ण लाइनिंग होने से सिंचाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ढूटी परियोजना एवं बाघ परियोजना की नहर लाइनिंग के प्रस्ताव संबंधित एजेंसियों को भेजे जा चुके हैं।

बैठक में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक घरों में सोलर पैनल लगाने तथा किसानों को अनुदान पर सोलर पंप उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में जल संसाधन विभाग, कृषि विभाग एवं विद्युत वितरण कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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