हलधर किसान, नई दिल्ली। वैसे तो हम कहने को आधुनिक विज्ञान के युग मे जी रहे है लेकिन आज भी कई मिथक या यूं कहें कि अंधविश्वास हावी है। ऐसा ही अंधविश्वास या मिथक को तमिलनाडु के तट पर नजर आई रहस्यमयी मछली के नजर आने के बाद बल मिल रहा है। डूम्सडे फिश यानी कयामत या प्रलय मछली को पिछले दिनों तमिलनाडु के एक तट पर देखा गया है. जब से यह मछली नजर आई है तब से ही यहां पर लोगों में डर का माहौल है. बताया जा रहा है कि मई महीने के अंत में यह मछली, जाल में पकड़ी गई थी. इस मछली को असल में ओरफिश भी कहा जाता है.
एक लंबी और बिल्कुल किसी रिबन के जैसी नजर आने वाली यह मछली 30 फीट लंबी थी. कहते हैं कि जब-जब यह मछली नजर आती है, तब-तब दुनिया में कुछ अपशगुन होता है. इसे इस साल दुनिया के कई हिस्सों में देखा गया है। वैज्ञानिक भाषा में इसे रीगलेकस ग्लेस्नी कहते हैं. ये दुनिया की सबसे लंबी बोनी फिश में से एक है और आमतौर पर समंदर में 200 से 1000 मीटर यानी लगभग 3300 फीट की गहराई में रहती है. इसीलिए इसे देख पाना लगभग नामुमकिन होता है. लेकिन जब भी ये दिखती है, तो अपने साथ लाती है कयामत की कहानियां! इसकी बॉडी एकदम चांदी सी नजर आती है और इसका धड़ एकदम लाल सा नजर आता है. इस वजह से कुछ लोग इसे पुराणों से भी जोड़ते हैं.
जापान में लोग मानते हैं कि अगर यह मछली नजर आती है तो देश में भूकंप या सुनामी आती है. बताया जाता है कि साल 2011 में यह मछली नजर आई थी और उसके बाद भयानक सुनामी आई थी जिसमें कई हजार लोगों की मौत हो गई थी. कई दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में भी ओरफिश के दिखने को लंबे समय से प्राकृतिक आपदाओं की कहानियों से जोड़ा जाता रहा है. कुछ देशों में तो यह भी माना जाता है कि इस मछली के अचानक दिखने को ऐतिहासिक तौर पर एक चेतावनी जैसा देखा जाता है कि पृथ्वी जल्द ही हिल सकती है.
मछली को लेकर मान्यता
हिंदू धर्म में प्रलय की मछली को लेकर मान्यता है। मनुस्मृति के अनुसार, मनु पहले ऐसे मनुष्य था जिसने मानव जाति को दिशा दी थी। मनु ने ही अपने अनुयायियों के साथ मिलकर पहली बार समाज के नियम बनाए थे। मनु गाथा में भयंकर महाप्रलय की है। यह ऐसा प्रलय था जब समस्या जीवन नष्ट हो गया था। पुराणों में वर्णन है कि एक दिन मनु अपने तपस्वी जीवन में व्यस्त थे। तभी उसे एक विशाल मछली ने चेतावनी दी कि बहुत जल्द एक विनाशकारी बाढ़ आ सकती है। प्रलय आने से पहले भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया और मनु से कहा कि एक विशेष नाव का निर्माण करें । इसके बाद जब बाढ़ आई तो भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार में उस नाव को सींग से पकड़ लिया और मनु को समुद्र के बीचो बीच सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। जब यह बाढ़ आई तो पूरी पृथ्वी नष्ट हो गई थी। इसके बाद मनु ने अपने अनुयायियों के साथ मिलकर एक नए युग की शुरुआत की थी।
क्या सोचते हैं वैज्ञानिक
देखिए, मरीन बायोलॉजिस्ट और वैज्ञानिक इन कहानियों को नहीं मानते. उनका कहना है कि ओरफिश के सतह पर आने की कई वजहें हो सकती हैं. पहला: हो सकता है कि वो घायल हो या बीमार हो. दूसरा: समंदर के अंदर तेज़ बहाव या तूफ़ानी धाराओं की वजह से वो रास्ता भटककर ऊपर आ गई हो. तीसरा: या फिर वो अपनी ज़िंदगी के आख़िरी पड़ाव में हो. वैज्ञानिकों ने इस पर रिसर्च भी की है
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