हलधर किसान। खाद्य महंगाई की दिशा काफी हद तक कृषि उत्पादन और मानसून की स्थिति पर निर्भर है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने सामान्य से बेहतर मानसून की भविष्यवाणी की है। मानसून की शुरुआत भले जल्दी हुई हो, लेकिन जून के पहले सप्ताह में इसकी प्रगति धीमी रही है। इससे फसल उत्पादन और खाद्य महंगाई पर असर पड़ सकता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई में खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई दर घटकर 1.72% रही, जो अप्रैल में 2.55% थी। यह पिछले 19 महीनों में सबसे कम है।
सब्जियों की कीमतों में गिरावट जारी है। मई में सब्जियों (-21.6%), दालों (-10.4%), आलू (-29.4%) और प्याज (-14.4%) की थोक कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसी अवधि में अंडा, मांस और मछली की कीमतों में लगातार दूसरे महीने (-1.01%) गिरावट दर्ज की गई। इन वस्तुओं की कीमतों में गिरावट ने कुल खाद्य महंगाई को कम किया है।
हालांकि, फलों की थोक महंगाई दर अप्रैल के 8.38% से बढ़कर मई में 10.17% हो गई। दूध की महंगाई दर भी बढ़कर 2.66% पहुंच गई, जो अप्रैल में मात्र 0.59% थी। तिलहन पर 2.79% महंगाई दर्ज की गई, जबकि अनाज (2.56%), धान (0.96%) और गेहूं (5.75%) पर महंगाई की रफ्तार कुछ कम हुई है।
थोक महंगाई के आंकड़े दर्शाते हैं कि किसानों द्वारा पैदा की जाने वाली अधिकांश खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट जारी है। किसानों को पिछले साल की तुलना में अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ी है। कई खाद्य वस्तुओं में यह गिरावट 10% से भी अधिक है।
वनस्पति तेलों पर 26.49% महंगाई
एक ओर जहां खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई में गिरावट दर्ज की गई, वहीं वनस्पति तेल और वसा की थोक महंगाई 26.49% रही, जो चिंता का विषय है। तैयार खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई दर 8.45% रही, जबकि पेय पदार्थों पर 1.80% की थोक महंगाई दर्ज की गई।
ईंधन और ऊर्जा की थोक महंगाई में गिरावट
मई में ईंधन और ऊर्जा वर्ग की महंगाई दर (-)2.27% रही, जो अप्रैल में (-)2.18% थी। पेट्रोल की थोक महंगाई दर -8.49% और डीजल की -5.61% रही। खनिज तेलों की कीमतों में गिरावट इसकी प्रमुख वजह रही। फैक्ट्री में बने उत्पादों पर महंगाई दर मई में घटकर 2.04% रही, जो अप्रैल में 2.62% थी।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई दर कम होने का सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। इससे आम जरूरत की चीजें सस्ती होने लगती हैं। जो आम जनता के जेब पर पड़ रहे बोझ को कम करती है। यह किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत माना जाता है।
महंगाई से मिली राहत के लिए मोदी सरकार की नीतियों की तारीफ की जा रही है। अमेरिकी टैरिफ वॉर, कोरोना महामारी, हमास- इजरायल संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से इस समय पूरा विश्व मंदी और महंगाई से जूझ रहा है। अमेरिका जैसे सबसे विकसित अर्थव्यवस्था वाले देश भी महंगाई को रोक पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। ऐसे में भारत ने महंगाई पर लगाम लगाकर आर्थिक मोर्चे पर बड़ी सफलता हासिल की है। मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों, अर्थव्यवस्था में आई तेजी और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई कमी से महंगाई दर में खासी गिरावट देखने को मिली है। इससे मोदी सरकार और देश की जनता को बड़ी राहत मिली है।
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