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प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार से बदलेगा भारत का भविष्य, आर्थिक पुनर्जागरण की नई राह

Technology based innovation will transform Indias future a new path to economic renaissance

हलधर किसान नई दिल्ली। भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पिछले एक दशक में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला है, जो अब देश के आर्थिक पुनर्जागरण की मजबूत नींव बन रहा है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि तकनीक आधारित नवाचार अब केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे बाजार, उद्योग और किसानों तक पहुंचकर विकास को नई गति दे रहा है।

नई दिल्ली स्थित भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के सभागार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के 56वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि “अब समय है विज्ञान को प्रयोगशालाओं से बाजारों तक ले जाने का और विचारों को वास्तविक प्रभाव में बदलने का।”

उन्होंने बताया कि सरकार की नई नीतियों के चलते अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया गया है। इसका सीधा फायदा यह हुआ कि स्टार्टअप और उद्योग जगत को नए अवसर मिले हैं। खासकर अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से बढ़ते स्टार्टअप्स ने उपग्रह तकनीक और नवाचार को नई दिशा दी है।

डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि किसी भी देश की वैज्ञानिक प्रगति तब तक संभव नहीं है जब तक सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग मिलकर काम न करें। उन्होंने तीनों के बीच मजबूत तालमेल को जरूरी बताते हुए कहा कि इससे अनुसंधान को व्यावसायिक रूप देने में मदद मिलती है और इसका लाभ आम जनता तक पहुंचता है।

उन्होंने स्वदेशी तकनीक के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि भारत फार्मास्यूटिकल और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। इसके साथ ही देश में उच्च गुणवत्ता वाले शोध प्रकाशनों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की वैज्ञानिक प्रतिष्ठा मजबूत हुई है।

भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक दशक पहले जहां कुछ सौ स्टार्टअप थे, वहीं आज उनकी संख्या बढ़कर दो लाख से अधिक हो गई है। यह भारत के तेजी से विकसित होते नवाचार तंत्र का प्रमाण है।

कार्यक्रम में अजय कुमार सूद और अभय करंदीकर सहित कई प्रमुख वैज्ञानिक और शिक्षाविद मौजूद रहे। इस दौरान राष्ट्रीय रिसर्च फाउंडेशन, आरडीआई फंड और राष्ट्रीय क्वांटम मिशन जैसी योजनाओं पर भी चर्चा की गई।

डॉ. सिंह ने वैज्ञानिक संस्थानों से अपील की कि वे अपनी उपलब्धियों का व्यापक प्रचार-प्रसार करें, ताकि अधिक से अधिक साझेदार जुड़ सकें और समाज को इसका सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि पारदर्शी और योग्यता आधारित प्रणाली से युवा वैज्ञानिकों को सही दिशा मिलेगी।

अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि निरंतर सुधार, मजबूत संस्थागत ढांचा और सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी से भारत का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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