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महाराष्ट्र में कृषि आदान व्यापारियों की मांगों पर सरकार गंभीर, बैठक में लिए गए अहम फैसले

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हलधर किसान महाराष्ट्र। महाराष्ट्र में कृषि आदान (बीज, उर्वरक, कीटनाशक) व्यापारियों की हड़ताल के बाद राज्य सरकार ने तेजी दिखाते हुए उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया है। 28 अप्रैल 2026 को मुंबई स्थित मंत्रालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में व्यापारियों की समस्याओं को सुना गया और कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस बैठक की अध्यक्षता राज्य के कृषि मंत्री द्वारा की गई, जिसमें कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक का आयोजन उस पृष्ठभूमि में हुआ, जब महाराष्ट्र कृषि आदान विक्रेता संघ (माफड़ा) ने 27 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया था। राज्यभर में दुकानों और प्रतिष्ठानों के बंद होने से कृषि कार्य प्रभावित होने की स्थिति बनने लगी थी। ऐसे में सरकार ने तुरंत पहल करते हुए संवाद का रास्ता चुना।

बैठक में कृषि इनपुट व्यवसाय से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। व्यापारियों ने उर्वरक बिक्री में हो रही अनियमितताओं, अवैध बीजों की बिक्री, लाइसेंसिंग प्रक्रिया की जटिलता, गुणवत्ता जांच में देरी और एक्सपायर्ड कीटनाशकों के निपटान जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया। सरकार ने इन सभी मुद्दों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए ठोस आश्वासन दिए।

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उर्वरक और बीज व्यवस्था पर सख्ती
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि उर्वरकों की अवैध बिक्री को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। सरकार उत्तर प्रदेश की तर्ज पर नई व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रही है। वहीं, बिना लाइसेंस के बीटी कॉटन बीज बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए संबंधित एजेंसियों को निर्देश जारी किए जाएंगे।

‘साथी’ पोर्टल को बनाया जाएगा और प्रभावी
बीज लाइसेंसिंग प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ‘साथी’ पोर्टल में सुधार करने का निर्णय लिया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी लंबित आवेदनों का निपटारा 15 दिनों के भीतर किया जाए। इससे व्यापारियों को अनावश्यक देरी से राहत मिलेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

लाइसेंस और गुणवत्ता जांच में सुधार
कृषि आदान दुकानों के लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने पर सहमति बनी। इसके साथ ही गुणवत्ता नियंत्रण के तहत लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट समय पर देने के निर्देश दिए गए हैं। इससे व्यापारियों को अनिश्चितता से राहत मिलेगी और अनुचित कार्रवाई की संभावना कम होगी।

एक्सपायर्ड कीटनाशकों के निपटान पर नीति
बैठक में एक्सपायर्ड कीटनाशकों के निपटान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। सरकार ने इस पर कंपनियों के साथ समन्वय कर एक स्पष्ट नीति बनाने का भरोसा दिया है, ताकि दुकानदारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।

अन्य महत्वपूर्ण पहल
इसके अलावा, पड़ोसी राज्यों से आने वाले अवैध बीजों पर रोक लगाने, उर्वरक वितरण प्रणाली में सुधार करने और केंद्र सरकार से समन्वय बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कई विषयों पर केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया गया है।

व्यापारियों में संतोष, संगठन की एकता का असर
बैठक के बाद व्यापारियों में संतोष का माहौल देखा गया। मध्य प्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ के उपाध्यक्ष श्री कृष्णा दुबे ने कहा कि यह सफलता पूरे देश के कृषि आदान व्यापारियों की एकजुटता का परिणाम है। उन्होंने बताया कि ऑल इंडिया एग्री इनपुट डीलर एसोसिएशन, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के संगठनों के सहयोग से यह संभव हो पाया।

उन्होंने आगे कहा कि यदि व्यापारी इसी तरह संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए प्रयास करते रहेंगे, तो निश्चित रूप से भविष्य में और भी सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

किसानों के हित भी केंद्र में
सरकार ने स्पष्ट किया कि इन सभी निर्णयों का उद्देश्य केवल व्यापारियों को राहत देना ही नहीं, बल्कि किसानों तक गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है। इससे खेती की लागत और उत्पादकता दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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