हलधर किसान दिल्ली। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत आंध्र प्रदेश के भीमावरम में खारे पानी के एक्वाकल्चर क्लस्टर की प्रगति की समीक्षा के लिए 16 अप्रैल 2026 को उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मत्स्य पालन विभाग के केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने की। इस दौरान उन्होंने झींगा और मछली किसानों से सीधा संवाद कर जमीनी स्तर पर आ रही समस्याओं और चुनौतियों को समझा।
यह समीक्षा बैठक हाइब्रिड मोड में आयोजित हुई, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारी, ICAR के वैज्ञानिक, NFDB, MPEDA, NABARD सहित कई संस्थाओं के प्रतिनिधि, मत्स्य सहकारी समितियाँ, निर्यातक और बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।
केंद्रीय सचिव ने किसानों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि उनकी प्रतिक्रिया नीति निर्माण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने आंध्र प्रदेश सरकार को 64 लाख टन मछली उत्पादन लक्ष्य की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के लिए बधाई दी और भरोसा दिलाया कि भीमावरम क्लस्टर को निरंतर सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने उत्पादन-पूर्व, उत्पादन और उत्पादन-पश्चात चरणों में सुधार के लिए समन्वित रणनीति अपनाने पर जोर दिया।
डॉ. लिखी ने मछली खपत बढ़ाने के लिए रक्षा और अन्य सरकारी संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने, किसानों को देश-विदेश में अध्ययन यात्राओं के लिए प्रोत्साहित करने तथा ‘संपूर्ण मछली दृष्टिकोण’ अपनाने की बात कही। साथ ही उन्होंने मछली अपशिष्ट के बेहतर उपयोग और नई तकनीकों को अपनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने सीआईबीए के नेतृत्व में जागरूकता शिविर आयोजित करने तथा MPEDA को निर्यात संबंधों को मजबूत करने और किसानों को प्रमाणन व ट्रेसिबिलिटी के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए।
बैठक में बी. राजशेखर ने कहा कि मछुआरे देश की ‘ब्लू इकोनॉमी’ के केंद्र में हैं और निर्यात बढ़ाने में उनकी अहम भूमिका है। उन्होंने वैश्विक मानकों के पालन और ट्रेसिबिलिटी को अनिवार्य बताते हुए समुद्री शैवाल की खेती और आर्टिफिशियल रीफ्स में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता जताई।
संयुक्त सचिव सागर मेहरा ने बताया कि 34 मत्स्य क्लस्टरों को “विकास के इंजन” के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने लास्ट-माइल इंफ्रास्ट्रक्चर, कोल्ड-चेन, और आईओटी, बायोफ्लॉक व आरएएस जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।
डॉ. जे.के. जेना ने कहा कि भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और भीमावरम क्लस्टर में अग्रणी एक्वाकल्चर हब बनने की अपार क्षमता है। उन्होंने सतत विकास के लिए वैज्ञानिक और किसानों के बीच बेहतर तालमेल पर बल दिया।
राज्य के मत्स्य आयुक्त राम शंकर नाइक ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए वैल्यू-एडेड उत्पादों, जल गुणवत्ता सुधार और रोग नियंत्रण पर जोर दिया। उन्होंने एरेटर पर जीएसटी में कमी की मांग भी उठाई।
बैठक में किसानों ने बाजार से कमजोर जुड़ाव, ऊंची फीड लागत (करीब 70%), रोग प्रबंधन और ऋण तक सीमित पहुंच जैसी समस्याएं रखीं। उन्होंने सरकारी योजनाओं में मछली को शामिल करने, बेहतर ब्रूडस्टॉक और सस्ती तकनीक उपलब्ध कराने की मांग की। निर्यातकों ने भी लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, बढ़ते शिपिंग खर्च और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंता जताई।
समीक्षा के बाद केंद्रीय सचिव ने पश्चिम गोदावरी जिले के कल्ला गांव में एक आधुनिक झींगा फार्म का दौरा किया, जहां Litopenaeus vannamei की उन्नत तकनीक से खेती की जा रही है। आईओटी आधारित सेंसर और नैनो-बबल तकनीक से लैस इस 40 एकड़ के फार्म से लगभग 50 टन उत्पादन का अनुमान है, जो स्थानीय रोजगार भी सृजित कर रहा है।
कुल मिलाकर, यह बैठक भीमावरम फिशरीज क्लस्टर को तकनीकी नवाचार, निर्यात वृद्धि और सतत विकास के माध्यम से मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।
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