हलधर किसान दिल्ली । देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु गुणवत्ता में आई राहत ने लोगों को बड़ी राहत दी है। लगातार गिरते प्रदूषण स्तर के बीच अब ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चरण-I को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। यह निर्णय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की उप-समिति द्वारा लिया गया, जिसने हालात की समीक्षा के बाद यह बड़ा कदम उठाया।
पिछले कुछ दिनों में दिल्ली-एनसीआर की हवा में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 3 मई 2026 को जहां दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 175 दर्ज किया गया था, वहीं 4 मई को यह घटकर मात्र 88 पर पहुंच गया। यह बदलाव “मध्यम” से “संतोषजनक” श्रेणी की ओर संकेत करता है, जो स्वास्थ्य के लिहाज से अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति मानी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुधार के पीछे मुख्य कारण हाल ही में हुई बारिश और अनुकूल मौसम परिस्थितियां हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान द्वारा जारी पूर्वानुमानों में भी यही संकेत दिए गए हैं कि आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता “संतोषजनक” से “मध्यम” श्रेणी में बनी रह सकती है।
दरअसल, 16 अप्रैल 2026 को जब दिल्ली का AQI तेजी से बढ़ने लगा था, तब एहतियात के तौर पर GRAP का चरण-I लागू किया गया था। इस चरण के तहत निर्माण कार्यों पर आंशिक नियंत्रण, धूल प्रदूषण को कम करने के उपाय, और कचरा जलाने पर सख्ती जैसे कदम उठाए गए थे। लेकिन अब हालात सुधरने के चलते इन सभी प्रतिबंधों को हटा दिया गया है।
हालांकि, एजेंसियों को पूरी तरह से ढील नहीं दी गई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि NCR के सभी राज्यों और संबंधित विभागों को पहले से जारी पर्यावरणीय नियमों और दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा। इसमें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी नियमों के साथ-साथ राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और स्थानीय निकायों के निर्देश भी शामिल हैं।
विशेष रूप से धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने पर जोर दिया गया है, क्योंकि NCR में प्रदूषण का एक बड़ा कारण निर्माण कार्यों और सड़कों की धूल मानी जाती है। इसके लिए नियमित पानी का छिड़काव, कंस्ट्रक्शन साइट्स को कवर करना और सड़कों की सफाई जैसे उपायों को जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
CAQM की उप-समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि वायु गुणवत्ता की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी। यदि आने वाले दिनों में AQI फिर से खराब श्रेणी में जाता है, तो GRAP के अन्य चरणों को दोबारा लागू किया जा सकता है। इसलिए प्रशासन और आम जनता दोनों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार अस्थायी भी हो सकता है, क्योंकि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर मौसम के अनुसार तेजी से बदलता है। सर्दियों में जहां प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है, वहीं गर्मी और बारिश के मौसम में इसमें गिरावट देखने को मिलती है।
ऐसे में यह जरूरी है कि सिर्फ आपातकालीन उपायों पर निर्भर न रहकर दीर्घकालिक समाधान पर भी ध्यान दिया जाए। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, हरित क्षेत्र का विस्तार, औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण और कचरा प्रबंधन जैसे कदम ही स्थायी रूप से प्रदूषण को कम कर सकते हैं।
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