हलधर किसान नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में कोयंबटूर स्थित सीएएसएफओएस में राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैम्पा) के शासी निकाय की सातवीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में देशभर में वनों के संरक्षण, प्रतिपूरक वनीकरण, जैव विविधता संवर्धन तथा वन्यजीव संरक्षण को और मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। केंद्रीय राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा शासी निकाय के सदस्य भी बैठक में उपस्थित रहे।
बैठक में राष्ट्रीय कैम्पा के समग्र कार्यों की समीक्षा करते हुए वर्ष 2025-26 के दौरान राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को जारी की गई कैम्पा निधियों, प्रतिपूरक वनीकरण (सीए) तथा शुद्ध वर्तमान मूल्य (एनपीवी) से संबंधित गतिविधियों की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया। साथ ही नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा वित्त वर्ष 2024-25 के लिए राष्ट्रीय कैम्पा के वार्षिक खातों के प्रमाणीकरण का भी संज्ञान लिया गया, जिसमें वित्तीय प्रबंधन को सही एवं पारदर्शी बताया गया।
बैठक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में चार नई वन्यजीव एवं वानिकी संरक्षण परियोजनाओं को मंजूरी देना शामिल रहा। इनमें गंगा एवं अन्य नदियों की डॉल्फ़िन संरक्षण एवं पुनर्प्राप्ति कार्य योजना, हिम तेंदुआ परियोजना चरण-द्वितीय, भारतीय गैंडा संरक्षण कार्य योजना तथा जंगली जल भैंस के संरक्षण के लिए अखिल भारतीय अध्ययन को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अलावा मणिपुर के दुर्लभ भूरे सींग वाले हिरण सांगाई के संरक्षण कार्यक्रम को भी आगे जारी रखने का निर्णय लिया गया।
बैठक में कैम्पा की डिजिटल व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। वित्त वर्ष 2026-27 से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी वार्षिक परिचालन योजनाएं पूरी तरह ऑनलाइन डिजिटल प्रणाली के माध्यम से तैयार एवं प्रस्तुत करनी होंगी। इस नई प्रणाली में प्रस्ताव तैयार करने, सत्यापन, स्वीकृति, निधि उपयोग तथा वृक्षारोपण की प्रगति की ऑनलाइन निगरानी की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके प्रभावी संचालन के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों में वन अधिकारियों के प्रशिक्षण हेतु पांच क्षेत्रीय कार्यशालाएं भी आयोजित की जा चुकी हैं।
शासी निकाय ने कैम्पा के लिए समर्पित जीआईएस आधारित भू-स्थानिक निगरानी एवं मूल्यांकन प्रणाली की भी समीक्षा की। इस प्रणाली के माध्यम से उपग्रह चित्रों, जीआईएस तकनीक तथा फील्ड सत्यापन के आधार पर प्रतिपूरक वनीकरण, वृक्षारोपण और कैम्पा से संचालित परियोजनाओं की वैज्ञानिक एवं पारदर्शी निगरानी की जाएगी। इससे योजनाओं की वास्तविक प्रगति का आकलन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
बैठक में एफएओ-इंडिया के सहयोग से विकसित हरित-संकल्प पोर्टल की प्रगति भी प्रस्तुत की गई। यह पोर्टल बीज स्रोतों, नर्सरियों एवं पौध सामग्री को विशिष्ट पहचान और क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग सुविधा प्रदान करेगा। साथ ही राष्ट्रीय स्तर से लेकर वन परिक्षेत्र स्तर तक योजनाओं की निगरानी के लिए आधुनिक डैशबोर्ड और प्रबंधन सूचना प्रणाली उपलब्ध कराएगा, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि होगी।
तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव संरक्षण के लिए संचालित मिष्टी योजना को भी विस्तार दिया गया। अब तक छह राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में मैंग्रोव वृक्षारोपण और पुनर्स्थापन के लिए 88.40 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। बैठक में इस योजना की अवधि वर्ष 2029 तक बढ़ाने तथा अतिरिक्त 500 करोड़ रुपये स्वीकृत करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही योजना का कुल परिव्यय बढ़ाकर 600 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण को नई गति मिलेगी।
शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित नगर वन योजना के अंतर्गत अब तक 571.50 करोड़ रुपये की सहायता से 652 नगर वन एवं वाटिकाओं का विकास किया जा चुका है। वहीं हरित क्रेडिट योजना के तहत भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) को वृक्षारोपण आधारित हरित आवरण विस्तार के लिए 7.28 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। शासी निकाय ने राज्यों से इन योजनाओं में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया।
बैठक में एक नई आस्था वन संरक्षण योजना को भी मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत देशभर के लगभग 15 हजार पवित्र वनों एवं धार्मिक आस्था से जुड़े वन क्षेत्रों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों में 3,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही भूमि क्षरण रोकने, जैव विविधता संरक्षण तथा परिदृश्य पुनर्स्थापन के लिए एक नई राष्ट्रीय योजना को भी स्वीकृति दी गई।
बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि कैम्पा केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक निगरानी और जनभागीदारी के माध्यम से देश के वन संसाधनों, वन्यजीवों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण को नई दिशा देने का कार्य कर रहा है। उन्होंने राज्यों से इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया, ताकि भारत के हरित आवरण, जैव विविधता और जलवायु अनुकूलन क्षमता को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
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