हर जिले में सितंबर के अंत तक कम से कम एक स्टूडेंट टूर और एक बेस्ट प्रैक्टिस केस स्टडी का लक्ष्य
हलधर किसान नई दिल्ली। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को अधिक प्रभावी, टिकाऊ और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत विद्यार्थियों और स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने की पहल की है। जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया है कि वे स्थानीय कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा अन्य शैक्षणिक संस्थानों को जल जीवन मिशन के अंतर्गत सामने आ रहे उत्कृष्ट कार्यों और नवाचारों के दस्तावेजीकरण से जोड़ें।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण जल आपूर्ति के क्षेत्र में हो रहे कार्यों को विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं के लिए सीखने का अवसर बनाना, स्थानीय स्तर पर किए जा रहे नवाचारों को सामने लाना तथा सफल मॉडलों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को व्यापक स्तर पर साझा करना है। सरकार का मानना है कि जमीनी स्तर पर काम कर रहे संस्थानों और शैक्षणिक समुदाय के बीच बेहतर समन्वय से ग्रामीण पेयजल व्यवस्था में नए विचारों और तकनीकी समाधानों को बढ़ावा दिया जा सकता है।
ग्रामीण पेयजल क्षेत्र में सामने आए कई सफल मॉडल
जल जीवन मिशन की शुरुआत के बाद से ग्रामीण पेयजल क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में समुदाय की भागीदारी, जल स्रोतों की स्थिरता, जल गुणवत्ता प्रबंधन, पेयजल योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव, आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा विकेंद्रीकृत शासन जैसे क्षेत्रों में कई उल्लेखनीय उदाहरण सामने आए हैं।
इन सफल प्रयासों को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित रखने के बजाय उनका अध्ययन, दस्तावेजीकरण और व्यापक प्रचार-प्रसार किए जाने की जरूरत महसूस की गई है। इसी दिशा में स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों को इन गतिविधियों से जोड़ने की योजना तैयार की गई है।
कॉलेज और विश्वविद्यालय करेंगे केस स्टडी का दस्तावेजीकरण
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सुझाव दिया है कि वे स्थानीय कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों की मदद से जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत चयनित केस स्टडी और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का अध्ययन कर उनका दस्तावेजीकरण कराएं।
इससे विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं को नजदीक से समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही, अलग-अलग क्षेत्रों में अपनाए गए सफल मॉडल सामने आएंगे, जिन्हें समान परिस्थितियों वाले दूसरे क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकेगा।
केस स्टडी और शोध के निष्कर्षों को शैक्षणिक पत्रिकाओं, संस्थागत रिपोर्टों, न्यूजलेटर, शोध पत्रों, वेबसाइटों और अन्य उपयुक्त माध्यमों के जरिए प्रकाशित एवं प्रसारित करने पर भी जोर दिया गया है। इससे ग्रामीण जल आपूर्ति के क्षेत्र में साक्ष्य आधारित ज्ञान का निर्माण होगा और सफल प्रयोगों को दोहराने में मदद मिलेगी।
विद्यार्थियों के लिए आयोजित होंगे फील्ड टूर
इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा स्कूली और कॉलेज विद्यार्थियों के लिए फील्ड विजिट और स्टडी टूर आयोजित करना है। राज्यों और जिलों को उपयुक्त केस स्टडी और भ्रमण स्थलों की पहचान करने तथा स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों, स्कूलों, जिला जल एवं स्वच्छता मिशनों और ग्राम पंचायतों के बीच आवश्यक समन्वय स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
इसके तहत आसपास के स्कूलों के हायर सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्तर के विद्यार्थियों को ग्रामीण पेयजल व्यवस्था से जुड़ी विभिन्न सुविधाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया जाएगा। विद्यार्थी मल्टी विलेज स्कीम (MVS), वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP), इनटेक वेल और जल परीक्षण प्रयोगशालाओं का दौरा कर सकेंगे।
आधुनिक तकनीकों को भी समझेंगे छात्र
फील्ड टूर के दौरान विद्यार्थियों को ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं में इस्तेमाल की जा रही आधुनिक तकनीकों की जानकारी देने पर भी जोर दिया गया है। इनमें सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (SCADA) तथा इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी तकनीकें शामिल हैं।
इन तकनीकों के माध्यम से जल आपूर्ति प्रणालियों की निगरानी, संचालन और प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलती है। विद्यार्थियों को इन तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग को समझने का अवसर मिलेगा, जिससे उनके भीतर विज्ञान, तकनीक और ग्रामीण विकास के बीच संबंध को लेकर समझ विकसित होगी।
इसके अलावा विद्यार्थियों को नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (NABL) से मान्यता प्राप्त जल परीक्षण प्रयोगशालाओं का भी भ्रमण कराया जाएगा। इससे उन्हें पेयजल की गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया और सुरक्षित पेयजल के महत्व की व्यावहारिक जानकारी मिल सकेगी।
सितंबर 2026 तक हर जिले में गतिविधियां पूरी करने का लक्ष्य
सरकार ने इस पहल के लिए स्पष्ट समयसीमा भी निर्धारित की है। लक्ष्य रखा गया है कि सितंबर 2026 के अंत तक देश के प्रत्येक जिले में स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से कम से कम एक स्टूडेंट टूर और एक प्रकाशित केस स्टडी या बेस्ट प्रैक्टिस का कार्य पूरा किया जाए।
इससे एक ओर विद्यार्थियों को ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही पेयजल योजनाओं की वास्तविक स्थिति और तकनीकी पहलुओं को समझने का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर किए जा रहे प्रभावी कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद मिलेगी।
ग्रामीण जल सुरक्षा को मिलेगा नया आधार
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत शुरू की जा रही यह पहल केवल विद्यार्थियों के शैक्षणिक अनुभव तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से ग्रामीण जल आपूर्ति के क्षेत्र में सीखने, नवाचार और ज्ञान साझा करने की संस्कृति को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर सफल हो रहे प्रयोगों का वैज्ञानिक और व्यवस्थित दस्तावेजीकरण होने से नीति निर्माताओं, प्रशासन, शोधकर्ताओं और अन्य जिलों को भी उपयोगी जानकारी उपलब्ध होगी। सफल मॉडलों की पहचान कर उन्हें दूसरे क्षेत्रों में लागू करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण जल सुरक्षा को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए केवल पाइपलाइन और जलापूर्ति ढांचे का निर्माण पर्याप्त नहीं है। जल स्रोतों की स्थिरता, जल गुणवत्ता, बेहतर संचालन एवं रखरखाव, तकनीकी निगरानी और समुदाय की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ऐसे में विद्यार्थियों, शैक्षणिक संस्थानों, ग्राम पंचायतों और जिला स्तर के मिशनों को एक साथ जोड़ने की यह पहल भविष्य में ग्रामीण जल प्रबंधन को और मजबूत आधार दे सकती है।
जल जीवन मिशन 2.0 के माध्यम से सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित और विश्वसनीय पेयजल व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जाए। विद्यार्थियों और शैक्षणिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी से इस अभियान को नई पीढ़ी से जोड़ने के साथ-साथ ग्रामीण जल आपूर्ति के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों और सफल कार्यों को व्यापक पहचान दिलाने में भी मदद मिलेगी।
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