मानव और पशु स्वास्थ्य के जोखिम को देखते हुए जारी हुई राजपत्र अधिसूचना, राज्यों को आदेश लागू कराने के निर्देश
हलधर किसान नई दिल्ली। कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले खरपतवारनाशक रसायन पैराक्वाट डाइक्लोराइड (Paraquat Dichloride) को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने 22 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी कर इस रसायन के पंजीकरण पर प्रतिबंध लगाने और पहले से जारी सभी पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द करने का आदेश दिया है। यह आदेश राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रभावी हुआ। राजपत्र में अधिसूचना 28 सितंबर 2026 को प्रकाशित होने की जानकारी उपलब्ध है।

सरकार ने यह कदम मानव और पशु स्वास्थ्य के लिए पैराक्वाट डाइक्लोराइड के उपयोग से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखते हुए उठाया है। इस फैसले का असर संबंधित उत्पादों के पंजीकरण, कंपनियों के प्रमाणपत्रों और कृषि आदान व्यापार से जुड़े कारोबार पर पड़ सकता है। ऐसे में कीटनाशक निर्माताओं, वितरकों, थोक एवं खुदरा विक्रेताओं और किसानों के लिए अधिसूचना की शर्तों को समझना आवश्यक है।
राजपत्र में क्या कहा गया है?
केंद्र सरकार की अधिसूचना संख्या S.O. 5234(E) की तारीख 22 सितंबर 2026 है। यह आदेश कीटनाशी अधिनियम, 1968 की धारा 27 की उपधारा (2) तथा धारा 28 के अंतर्गत जारी किया गया है। इसके तहत पैराक्वाट डाइक्लोराइड के नए पंजीकरण पर रोक लगाई गई है और धारा 9 के अंतर्गत पहले जारी किए गए पंजीकरण प्रमाणपत्रों को राजपत्र में आदेश के प्रकाशन की तारीख से रद्द कर दिया गया है।
अधिसूचना में पंजीकरण समिति को संबंधित प्रमाणपत्र वापस मंगाने की जिम्मेदारी दी गई है। यदि कोई व्यक्ति या संस्था प्रमाणपत्र वापस करने में विफल रहती है, तो उसके खिलाफ अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही, राज्य सरकारों को अपने-अपने राज्यों में आदेश के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए है!

विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के बाद लिया गया निर्णय
सरकार के इस फैसले से पहले 10 जुलाई 2026 को एक प्रारंभिक अधिसूचना जारी की गई थी। इसके माध्यम से पैराक्वाट डाइक्लोराइड के निर्माण, आयात, परिवहन, वितरण, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर संबंधित पक्षों से आपत्तियां एवं सुझाव आमंत्रित किए गए थे। सरकार ने प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम आदेश जारी किया।
इस मामले की समीक्षा के लिए केंद्र सरकार ने 14 जनवरी 2026 को विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। समिति ने विस्तृत परीक्षण के बाद 12 जून 2026 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी। इसके बाद रजिस्ट्रीकरण समिति से परामर्श और उपलब्ध सिफारिशों पर विचार किया गया। सरकार ने मानव और पशु स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को देखते हुए तत्काल कार्रवाई आवश्यक मानी।
रजिस्ट्रीकरण समिति की सिफारिशों में पैराक्वाट से जुड़े प्रतिकूल स्वास्थ्य प्रभावों, विषाक्तता की घटनाओं और गंभीर मामलों में मृत्यु के जोखिम का उल्लेख किया गया था। समिति ने इसके उपयोग से संबंधित सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए पूर्ण प्रतिबंध की सिफारिश की थी।
कृषि आदान व्यापार पर क्या पड़ेगा असर?
पैराक्वाट डाइक्लोराइड से संबंधित इस अधिसूचना के बाद कृषि आदान कारोबार से जुड़े व्यापारियों के सामने नियामकीय स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो गए हैं। कंपनियों के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द होने से इस उत्पाद की आपूर्ति, नई बिलिंग, वितरण और बिक्री की वैधता की स्थिति को लेकर स्पष्टता आवश्यक है।
हालांकि, व्यापारियों के लिए यह समझना जरूरी है कि अंतिम राजपत्र अधिसूचना में स्पष्ट रूप से पंजीकरण पर प्रतिबंध और पहले से जारी पंजीकरण प्रमाणपत्रों को रद्द करने का प्रावधान दिया गया है। जुलाई की प्रारंभिक अधिसूचना में निर्माण, आयात, परिवहन, वितरण, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन अंतिम आदेश के उपलब्ध पाठ में इन सभी गतिविधियों पर अलग-अलग स्पष्ट निषेधात्मक धाराएं उसी रूप में शामिल नहीं हैं। इसलिए स्टॉक की बिक्री, उपलब्ध माल के निस्तारण और नई बिलिंग के संबंध में अंतिम आदेश की कानूनी व्याख्या तथा राज्य के कृषि विभाग के निर्देशों की पुष्टि करना आवश्यक है।
व्यापारियों को केवल इस धारणा पर उपलब्ध स्टॉक बेचने या नई खरीद करने का निर्णय नहीं लेना चाहिए कि पुराना माल समाप्त करने की अनुमति स्वतः मिल गई है। संबंधित निर्माता, अधिकृत वितरक और जिला कृषि विभाग से लिखित स्पष्टीकरण प्राप्त करना उपयोगी होगा। यदि राज्य स्तर पर प्रतिबंध लागू करने के लिए अतिरिक्त आदेश जारी किए गए हैं, तो उनका पालन भी आवश्यक होगा।
कंपनियों और विक्रेताओं को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
इस निर्णय के मद्देनजर पैराक्वाट डाइक्लोराइड से जुड़े कारोबारियों को निम्नलिखित कदमों पर ध्यान देना चाहिए:
- पंजीकरण की स्थिति की जांच: संबंधित उत्पाद और कंपनी के पंजीकरण प्रमाणपत्र की वर्तमान कानूनी स्थिति की पुष्टि करें।
- स्टॉक का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें: उपलब्ध मात्रा, बैच नंबर, खरीद बिल और आपूर्तिकर्ता का विवरण व्यवस्थित रखें।
- नई खरीद और बिलिंग में सावधानी: सक्षम प्राधिकारी से स्पष्ट निर्देश मिलने तक नई आपूर्ति या बिक्री की वैधता को लेकर अनुमान न लगाएं।
- कृषि विभाग से मार्गदर्शन लें: जिला स्तर पर जारी निर्देशों, आदेशों और स्टॉक निस्तारण संबंधी नियमों की जानकारी प्राप्त करें।
- प्रमाणपत्र संबंधी आदेश का पालन करें: पंजीकरण समिति द्वारा प्रमाणपत्र वापस लेने के संबंध में जारी निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करें।
इन कदमों से कारोबारियों को नियामकीय अनिश्चितता के बीच अनजाने में नियमों का उल्लंघन करने के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
राज्य सरकारों की भूमिका भी महत्वपूर्ण
केंद्र सरकार ने अधिसूचना के माध्यम से सभी राज्य सरकारों को अपने-अपने राज्यों में आदेश लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में राज्य के कृषि विभागों की ओर से जारी होने वाले स्पष्टीकरण और कार्यान्वयन संबंधी निर्देश व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
कृषि आदान विक्रेता संघों और व्यापारिक संगठनों की भूमिका भी इस दौरान महत्वपूर्ण हो सकती है। संगठन अपने सदस्यों को आधिकारिक अधिसूचना की जानकारी उपलब्ध कराने, कानूनी स्थिति स्पष्ट कराने और स्टॉक संबंधी व्यावहारिक समस्याओं को सक्षम अधिकारियों के सामने रखने के लिए पहल कर सकते हैं।
किसानों और व्यापारियों के लिए आधिकारिक जानकारी जरूरी
पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर केंद्र सरकार का यह निर्णय कृषि रसायनों की सुरक्षा और नियमन से संबंधित महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य मानव और पशु स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करना है। विशेषज्ञ समिति की समीक्षा, रजिस्ट्रीकरण समिति की सिफारिशों और संबंधित पक्षों से प्राप्त सुझावों पर विचार के बाद यह आदेश जारी किया गया है।
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