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किसानों की चिंता पर केंद्र सरकार अलर्ट! शिवराज सिंह चौहान ने की कृषि क्षेत्र की समीक्षा!

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खरीफ फसल कटाई के बाद रबी की बुआई में तेजी लाने पर जोर, खाद-बीज का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने का दावा

हलधर किसान नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में कहीं अनियमित बारिश, कहीं सूखे और कहीं चक्रवाती प्रभाव से पैदा हुई परिस्थितियों के बीच केंद्र सरकार ने किसानों की समस्याओं को लेकर सक्रियता बढ़ा दी है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ देश में कृषि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति की व्यापक समीक्षा की। बैठक में खरीफ फसलों की कटाई, रबी सीजन की तैयारियों, खाद एवं उर्वरकों की उपलब्धता, कृषि उपज के बाजार भाव और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी संकट की स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरती जाए और राहत पहुंचाने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी बिल्कुल न हो। बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव श्री अतीश चंद्रा सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

खरीफ कटाई के बाद रबी की बुआई पर विशेष जोर

बैठक में बताया गया कि देशभर में खरीफ फसलों की कटाई का कार्य जारी है। मूंग और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों की कटाई अंतिम चरण में पहुंच रही है। ऐसे में कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि खरीफ फसल की कटाई पूरी होते ही खेतों में मौजूद नमी का अधिकतम उपयोग किया जाए और रबी फसलों की बुआई को गति दी जाए।

उन्होंने कहा कि समय पर बुआई किसानों की बेहतर पैदावार और आर्थिक स्थिति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी की सीमित उपलब्धता है, वहां किसानों को कम पानी और कम लागत में तैयार होने वाली फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

इसके तहत चना, सरसों, मसूर और मोटे अनाज जैसी फसलों को प्राथमिकता देने की बात कही गई। इससे सीमित जल संसाधनों वाले क्षेत्रों में भी किसान रबी सीजन का बेहतर लाभ उठा सकेंगे।

जलवायु परिवर्तन के बीच उन्नत बीजों पर जोर

बदलती मौसमी परिस्थितियों और तापमान में उतार-चढ़ाव को देखते हुए कृषि मंत्री ने जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित गर्मी सहन करने वाली तथा उन्नत किस्मों के बीज किसानों तक समय पर पहुंचाए जाएं।

मौसम में लगातार हो रहे बदलावों का असर फसलों की वृद्धि, उत्पादन और गुणवत्ता पर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को वैज्ञानिक तकनीक, बेहतर बीज और कृषि संबंधी उचित सलाह उपलब्ध कराना जरूरी है। कृषि विभाग को इस दिशा में किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाने तथा नवीन कृषि तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने के लिए भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

रबी सीजन के लिए खाद और उर्वरकों का पर्याप्त भंडार

कृषि समीक्षा बैठक में देशभर में खाद एवं उर्वरकों की उपलब्धता की भी विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों की ओर से जानकारी दी गई कि रबी सीजन के लिए यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीके सहित आवश्यक उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसके अलावा प्रमाणित बीजों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है।

कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर खाद और उर्वरकों की आपूर्ति जिला स्तर तक सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को बुआई के महत्वपूर्ण समय पर किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

उन्होंने आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखने और जरूरत के अनुसार समय रहते आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया। रबी सीजन में खाद की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना भी महत्वपूर्ण बताया गया।

किसानों को MSP से ऊपर मिल रहे फसल के भाव

बैठक में कृषि उपज के बाजार भाव की स्थिति पर भी चर्चा हुई। मंडियों से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण में यह सकारात्मक स्थिति सामने आई कि धान, गेहूं, मक्का, चना, मसूर, अरहर, सोयाबीन और सरसों जैसी प्रमुख फसलों के बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ऊपर बने हुए हैं।

इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की स्थिति बताई गई। हालांकि, किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य मिलता रहे, इसके लिए बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने की आवश्यकता भी महत्वपूर्ण है।

प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को मिलेगी प्राथमिकता से राहत

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण विषय प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों की स्थिति रहा। देश के कुछ हिस्सों में अत्यधिक वर्षा और बाढ़ से फसलों को नुकसान पहुंचा है, वहीं कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में सूखे की परिस्थितियों ने किसानों की चिंता बढ़ाई है।

इस पर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में केंद्र सरकार हर परिस्थिति में किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन तेजी और पारदर्शिता के साथ किया जाए।

विशेष रूप से राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) के अंतर्गत सहायता संबंधी प्रक्रियाओं में तेजी लाने तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पात्र किसानों के बीमा दावों का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर कराने के निर्देश दिए गए।

कृषि मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को समय पर आर्थिक सहायता मिलना बेहद जरूरी है, ताकि वे अगली फसल की तैयारी कर सकें और खेती का काम जारी रख सकें।

चक्रवाती बारिश की नमी का रबी खेती में होगा उपयोग

आगामी चक्रवाती बारिश से बनने वाली मिट्टी की नमी का रबी फसलों की बुआई में अधिकतम उपयोग करने के लिए भी अधिकारियों को आकस्मिक कार्ययोजना तैयार रखने के निर्देश दिए गए। इसका उद्देश्य बारिश के बाद उपलब्ध नमी का सही समय पर उपयोग कर किसानों को बुआई में मदद पहुंचाना है।

कृषि मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वे स्वयं हर सप्ताह कृषि क्षेत्र की स्थिति की समीक्षा करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकारों और मुख्यमंत्रियों से सीधे संवाद कर किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

किसानों के लिए समय पर सहायता और बेहतर तैयारी जरूरी

केंद्र सरकार की इस समीक्षा से स्पष्ट है कि आगामी रबी सीजन को लेकर खाद, बीज और बुआई की तैयारियों के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह होगी कि अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी क्रियान्वयन होता है।

किसानों के लिए समय पर खाद-बीज उपलब्ध होना, मौसम के अनुकूल फसलों का चयन, सिंचाई के सीमित संसाधनों का बेहतर उपयोग और फसल बीमा दावों का शीघ्र भुगतान बेहद जरूरी है। यदि इन व्यवस्थाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाता है, तो रबी सीजन में किसानों को काफी राहत मिल सकती है।

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