8 नवंबर को मनाई जाएगी मुख्य दीपावली, बुधादित्य राजयोग और लक्ष्मी नारायण योग भी रहेंगे विशेष आकर्षण; धनतेरस से देवउठनी ग्यारस तक छह दिनों तक सजेगा दीपोत्सव
अजमेर। दीपावली केवल रोशनी और खुशियों का पर्व नहीं, बल्कि धर्म, आस्था, परंपरा और ज्योतिषीय दृष्टि से भी विशेष महत्व रखती है। वर्ष 2026 में दीपावली का पर्व कई शुभ ज्योतिषीय संयोगों के बीच मनाया जाएगा। इस बार 8 नवंबर को आयुष्मान योग, बुधादित्य राजयोग और लक्ष्मी नारायण योग का महासंयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन शुभ योगों में मां लक्ष्मी का पूजन, धन-संपत्ति से जुड़े कार्य और शुभ कार्यों का विशेष महत्व रहेगा। कार्तिक मास में धनतेरस से लेकर भाई दूज तक दीपोत्सव की छटा देखने को मिलेगी।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सुदीप जैन (सोनी), अजमेर के अनुसार, वर्ष 2026 में दीपावली पर्व की तिथियों का निर्धारण प्रदोष काल, उदया तिथि और अरुणोदय काल को ध्यान में रखकर किया गया है। इस बार धनतेरस 6 नवंबर, नरक चतुर्दशी 8 नवंबर और मुख्य दीपावली भी 8 नवंबर को मनाई जाएगी। इसके बाद 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और 11 नवंबर को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा।
धनतेरस पर बनेगा श्री कुबेर योग
दीपोत्सव की शुरुआत 6 नवंबर शुक्रवार को धनतेरस के साथ होगी। ज्योतिषाचार्य डॉ. सुदीप जैन (सोनी) के अनुसार, 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 31 मिनट से त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी, जो 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि मिलने के कारण धनतेरस का पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा।
इस बार शुक्रवार के दिन धनतेरस का संयोग होने से इसे ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। शुक्रवार का संबंध मां लक्ष्मी और शुक्र ग्रह से माना जाता है। शुक्र ग्रह को भौतिक सुख-सुविधाओं, वाहन, वैभव और विलासिता का कारक बताया गया है, जबकि भगवान कुबेर धन-संपत्ति के अधिष्ठाता माने जाते हैं। इसी कारण धनतेरस और शुक्रवार के संयोग को श्री कुबेर योग के रूप में विशेष महत्व दिया जा रहा है।
इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना की जाएगी। परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु सोना-चांदी, बर्तन, वाहन और अन्य उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। मान्यता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में की गई खरीदारी घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक होती है।
7 नवंबर को यम दीपदान, 8 को नरक चतुर्दशी
7 नवंबर शनिवार को सुबह 10 बजकर 48 मिनट से चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होकर 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। प्रदोष काल में चतुर्दशी तिथि मिलने के कारण 7 नवंबर की शाम यमराज के निमित्त दीपदान किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यम दीपदान करने से अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और परिवार की सुख-शांति की कामना की जाती है।
वहीं अरुणोदय और उदया तिथि के आधार पर 8 नवंबर रविवार को नरक चतुर्दशी और रूप चौदस का अभ्यंग स्नान किया जाएगा। इस दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करने की विशेष धार्मिक परंपरा है। 7 नवंबर की शाम और रात्रि में काली चतुर्दशी तथा हनुमान पूजन का भी विधान रहेगा।
तीन शुभ योगों में मनेगी मुख्य दीपावली
दीपावली का मुख्य पर्व 8 नवंबर रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन सुबह 11 बजकर 28 मिनट से अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी, जो 9 नवंबर सोमवार को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, दीपावली के लिए आवश्यक प्रदोष वेला और महानिशीथ काल 8 नवंबर को मिलने के कारण मुख्य लक्ष्मी पूजन इसी दिन किया जाएगा।
इस वर्ष दीपावली पर आयुष्मान योग के साथ बुधादित्य राजयोग और लक्ष्मी नारायण योग का विशेष संयोग बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं में आयुष्मान योग को आरोग्य और दीर्घायु से जोड़कर देखा जाता है। बुधादित्य राजयोग सूर्य और बुध के संयोग से बनने वाला योग है, जिसे बुद्धिमत्ता, प्रतिष्ठा और कार्यक्षमता का प्रतीक माना जाता है। वहीं लक्ष्मी नारायण योग को धन, वैभव, सुख-समृद्धि और आर्थिक उन्नति से जोड़कर देखा जाता है।
इन शुभ योगों के बीच श्रद्धालु अपने घरों और प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश तथा कुबेर की पूजा-अर्चना करेंगे। घरों में दीप जलाए जाएंगे और सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी। बाजारों में भी दीपावली की खरीदारी को लेकर रौनक रहेगी।
9 नवंबर को सोमवती अमावस्या, 10 को गोवर्धन पूजा
9 नवंबर सोमवार को देव और पितृ कार्यों के लिए अमावस्या तिथि रहेगी। इस दिन सोमवती अमावस्या का संयोग भी बनेगा। धार्मिक परंपराओं में अमावस्या तिथि को पितरों के निमित्त तर्पण, दान-पुण्य और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
इसके अगले दिन 10 नवंबर मंगलवार को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव मनाया जाएगा। इस दिन सूर्योदय से दोपहर 2 बजकर 1 मिनट तक कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि रहेगी। उदया तिथि के आधार पर गोवर्धन पूजा इसी दिन की जाएगी।
गोवर्धन पूजा पर भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग अर्पित करने, गोवर्धन पर्वत की पूजा करने और गायों का पूजन करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। यह पर्व प्रकृति, पशुधन और पर्यावरण के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता का संदेश भी देता है।
11 नवंबर को मनाई जाएगी भाई दूज
दीपोत्सव का प्रमुख पारिवारिक पर्व भाई दूज 11 नवंबर बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु, सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना करती हैं। भाई भी बहनों की रक्षा और सम्मान का संकल्प लेते हैं।
कार्तिक मास में पर्वों की विशेष श्रृंखला
ज्योतिषाचार्य डॉ. सुदीप जैन (सोनी) ने बताया कि हिंदू धर्म में कार्तिक मास को विशेष प्रधानता दी गई है। इस महीने के कृष्ण पक्ष में करवा चौथ, रमा एकादशी, गोवत्स द्वादशी, धनतेरस, धन्वंतरि जयंती, नरक चतुर्दशी और दीपावली जैसे महत्वपूर्ण पर्व आते हैं। वहीं शुक्ल पक्ष में अन्नकूट, भाई दूज, सौभाग्य पंचमी, सूर्य षष्ठी, गोपाष्टमी, आंवला नवमी, देवप्रबोधिनी एकादशी, वैकुंठ चतुर्दशी और कार्तिक पूर्णिमा जैसे धार्मिक पर्व मनाए जाते हैं।
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