देशी जुगाड़: खेतों में साड़ियों की बागड़ और क्रॉप कवर से फसल की धूप से सुरक्षा

Desi Jugaad Protecting crops from sunlight by using sarees and crop covers in the fields

फसलों को धूप से सुरक्षित रखा जा सकता है

हलधर किसान खरगोन। प्रदेश सहित देशभर में तेजी से बढ़ते तापमान से जहां आमजन परेशान हैं, वहीं खेतों की फसलें भी सूखने की कगार पर पहुंच रही हैं। ऐसे में खरगोन जिले के किसान अपनी फसलों को गर्म हवाओं और तेज धूप से बचाने के लिए अनोखे और देसी जुगाड़ अपना रहे हैं।

नर्मदा तट स्थित नावडाटौड़ी, माकड़खेड़ा, लेपा, कठोरा, बड़गांव जैसे गांवों में किसानों ने परंपरागत शेड नेट की बजाय घरों में पड़ी पुरानी साड़ियों से बागड़ तैयार की है। यह सस्ते और टिकाऊ उपाय न केवल धूप से फसल की सुरक्षा कर रहे हैं, बल्कि जंगली सुअरों से भी राहत दे रहे हैं।

जंगली सुअरों से राहत में भी मददगार
सायता निवासी करण सिंह पटेल, बोधू के नयनसिंह सिसोदिया और सज्जनसिंह तंवर ने बताया कि पहले खेतों की रखवाली के लिए एफएम रेडियो, अलाव, मसाले, थालियां और खाली बोतलों का इस्तेमाल किया, लेकिन यह सब ज्यादा असरदार नहीं रहा। अब पुरानी साड़ियों की बाड़ लगाकर फसलों की सुरक्षा की जा रही है, जो काफी सफल साबित हो रही है। इससे आलू, भिंडी, गेहूं, मूंगफली, गन्ना, केला और चना जैसी फसलों को बचाया जा सका है।

क्रॉप कवर से पपीते की सुरक्षा
खरगोन में पपीते के नए बगीचों की बुआई शुरू हो चुकी है। इस गर्मी में पौधों को बचाने के लिए किसानों ने ‘क्रॉप कवर’ कपड़े की थैलियों का उपयोग शुरू किया है। इससे तेज धूप और कीटों से सुरक्षा मिल रही है।

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, क्रॉप कवर तापमान को नियंत्रित करता है और फसल की रक्षा करता है। विशेष रूप से केले और पपीते की खेती में यह तकनीक काफी लाभदायक सिद्ध हो रही है।

सस्ती, टिकाऊ और देसी तकनीक बनी उम्मीद की किरण
तेजी से बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं के बीच देसी जुगाड़ किसानों के लिए कारगर साबित हो रहे हैं। न सिर्फ लागत कम है, बल्कि आसानी से उपलब्ध संसाधनों से यह उपाय फसलों को बचाने में मददगार बन रहे हैं।

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