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10.77 करोड़ किसानों की बनी फार्मर आईडी, अब खेतों की सेहत बचाने पर जोर

Farmer IDs generated for 10.77 crore farmers focus now shifts to preserving soil health

शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में कृषि मंत्रालय की पहली समग्र मासिक समीक्षा बैठक, इसी माह 22 तारीख से शुरू होगा राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’

हलधर किसान नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में कृषि भवन, नई दिल्ली में मंत्रालय की पहली समग्र मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न योजनाओं, डिजिटल कृषि, प्राकृतिक खेती, फसल बीमा, किसान उत्पादक संगठनों, कृषि अवसंरचना और किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव श्री अतीश चंद्रा सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार की कृषि नीतियों का उद्देश्य केवल उत्पादन के आंकड़े बढ़ाना नहीं है, बल्कि किसानों को सीधे आर्थिक सहायता, सुलभ संस्थागत ऋण, डिजिटल सशक्तिकरण, आधुनिक ग्रामीण ढांचा और बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘फाइल में नहीं, लाइफ में बदलाव’ के दृष्टिकोण के अनुरूप अब मंत्रालय की सभी योजनाओं और मिशनों की नियमित मासिक समीक्षा की जाएगी तथा अधिकारियों के लिए वित्तीय और भौतिक लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे।

22 अक्टूबर से देशभर में ‘खेत बचाओ अभियान’

बैठक में खेतों की मिट्टी की सेहत, पराली एवं कृषि अवशेष प्रबंधन और रासायनिक खादों के असंतुलित उपयोग से जुड़ी चुनौतियों पर विशेष चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इसी माह 22 तारीख से देशभर में सघन ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया जाएगा।

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इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ और मैदानी अमला सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचेगा। किसानों को मिट्टी की जांच, जैविक तत्वों के संरक्षण, पराली नहीं जलाने तथा संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान केवल कागजी स्तर तक सीमित न रहे, बल्कि इसका सीधा और अधिकतम लाभ गांव-गांव तक किसानों को मिले।

10.77 करोड़ से अधिक फार्मर आईडी तैयार

डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन की समीक्षा में बताया गया कि देश में 14 करोड़ किसानों के डिजिटल एकीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य के मुकाबले अब तक 10.77 करोड़ से अधिक विशिष्ट फार्मर आईडी तैयार की जा चुकी हैं। सरकार के अनुसार यह डिजिटल पहचान किसानों तक योजनाओं के लाभ को पारदर्शी तरीके से पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।

फार्मर आईडी के माध्यम से सब्सिडी, किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़े संस्थागत ऋण, एमएसपी खरीद, फसल बीमा और आपदा राहत जैसी सुविधाओं को किसानों तक पहुंचाने में डिजिटल व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा चालू खरीफ सीजन में 26.73 करोड़ से अधिक खेतों का डिजिटल क्रॉप सर्वे पूरा हो चुका है। वहीं राष्ट्रीय मृदा मानचित्रण कार्यक्रम के तहत 8.03 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र का डिजिटल नक्शा तैयार किया जा चुका है।

प्राकृतिक खेती में लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत भी लक्ष्य से बेहतर परिणाम सामने आए हैं। वर्ष 2025-26 में 18.75 लाख किसानों के लक्ष्य के मुकाबले 20.93 लाख किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाई, जबकि 7.50 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 10.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया गया।

अब तक देश में कुल 27.32 लाख किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं और 12.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को इसके अंतर्गत कवर किया जा चुका है। किसानों तक तकनीकी सहायता पहुंचाने के लिए 33,257 से अधिक कृषि सखियों और कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन्स को तैनात किया गया है।

बागवानी और FPO क्षेत्र में भी बढ़ी गतिविधियां

बागवानी क्षेत्र में देश ने 360 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले 370.84 मिलियन टन उत्पादन दर्ज किया है। इसी अवधि में 187 नई नर्सरियां विकसित की गईं और 1.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नए बाग लगाए गए।

वहीं 10,000 FPO योजना के तहत निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक किसानों को जोड़ा गया है। अतिरिक्त 2.40 लाख किसानों को जोड़ने के लक्ष्य के मुकाबले 30.11 लाख किसान FPO से जुड़े हैं। इससे छोटे किसानों की सामूहिक बाजार पहुंच मजबूत हुई है और FPO का औसत वार्षिक टर्नओवर ₹38 लाख से बढ़कर ₹141.76 लाख तक पहुंच गया है।

ग्रामीण कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को मिल रहा बड़ा निवेश

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत वर्ष 2026-27 में अब तक 664 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें प्रयोगशालाएं, गोदाम, कस्टम हायरिंग सेंटर तथा बीज उत्पादन और रकबा विस्तार से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। कुल ₹8,550 करोड़ के आवंटन में से ₹3,151.80 करोड़ की प्रगति दर्ज की गई है।

कृषि अवसंरचना कोष के तहत भी अब तक 2.25 लाख से अधिक परियोजनाओं के लिए ₹1,01,502 करोड़ से अधिक के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र और कस्टम हायरिंग सेंटर जैसी सुविधाओं के विकास को गति मिल रही है।

फसल बीमा में 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों का नामांकन भी बढ़ा है। पिछले खरीफ सीजन में 2.30 करोड़ किसानों के मुकाबले चालू खरीफ में यह संख्या 23 प्रतिशत बढ़कर 2.83 करोड़ हो गई है। बीमित क्षेत्र बढ़कर 2.97 करोड़ हेक्टेयर और बीमित राशि ₹1.86 लाख करोड़ तक पहुंच गई है।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों के बीमा दावों का निपटारा पारदर्शी तरीके से हो और कोई भी दावा अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।

मिट्टी जांच और सूक्ष्म सिंचाई पर भी जोर

मृदा स्वास्थ्य योजना के तहत अब तक 16 लाख से अधिक सॉइल हेल्थ कार्ड तैयार किए गए हैं। पीएम-श्री स्कूलों में 1,140 मिनी टेस्टिंग लैब स्थापित की जा चुकी हैं। सरकार का जोर किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए जागरूक करने पर है।

‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना के तहत ₹1,504.63 करोड़ के उपयोग से 4.86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई से जोड़ा गया है।

KVK, आत्मा और कृषि विश्वविद्यालय मिलकर करेंगे काम

केंद्रीय मंत्री ने कृषि अनुसंधान को किसानों के खेत तक पहुंचाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (आत्मा) और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ये संस्थान अलग-अलग काम करने के बजाय ‘एक टीम’ के रूप में काम करें, ताकि वैज्ञानिक सलाह सीधे किसानों तक पहुंचे और ‘लैब से लैंड’ की दूरी कम हो।

कमजोर प्रदर्शन वाले राज्यों और जिलों पर सख्ती

प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना के तहत जिला रैंकिंग की समीक्षा में देश का औसत स्कोर अप्रैल के 18.85 से बढ़कर अगस्त में 46.89 हो गया। हालांकि कुछ जिलों में योजनाओं के क्रियान्वयन की धीमी गति पर मंत्री ने नाराजगी जताई।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लगातार पिछड़ रहे जिलों की स्थिति में सुधार के लिए नियमित निगरानी की जाए। जरूरत पड़ने पर राज्यों के कृषि मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के साथ सीधे संवाद कर बाधाओं को दूर किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मंत्रालय केवल कागजी रिपोर्टों पर निर्भर नहीं रहेगा। वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड विजिट कर योजनाओं के वास्तविक प्रभाव की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। खास तौर पर प्राकृतिक खेती, सॉइल हेल्थ कार्ड, किसान मेलों और अन्य कृषि योजनाओं के जमीनी असर का मूल्यांकन किया जाएगा।

कृषि मंत्रालय की इस समीक्षा बैठक से स्पष्ट है कि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक, मिट्टी की सेहत, प्राकृतिक खेती, बीमा, सिंचाई, FPO और ग्रामीण कृषि अवसंरचना को प्राथमिकता दी जा रही है। अब सबसे बड़ी चुनौती इन योजनाओं और अभियानों को कागज से निकालकर खेत तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की होगी, ताकि देश के छोटे और सीमांत किसानों को इनका वास्तविक लाभ मिल सके।

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