नई दिल्ली। हलधर किसान। राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (एनजेडपी), नई दिल्ली में 23 अगस्त 2026 को प्रकृति और जैव विविधता को करीब से समझने के उद्देश्य से दूसरे ‘ट्री वॉक @ एनजेडपी’ और 11वें ‘संडे बर्ड वॉक’ का आयोजन किया गया। नागरिक विज्ञान पहल के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने चिड़ियाघर परिसर में पेड़-पौधों और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों का अवलोकन किया तथा उनके बारे में वैज्ञानिक तरीके से जानकारी जुटाई।
कार्यक्रम का उद्देश्य आम नागरिकों, विद्यार्थियों, प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीवों में रुचि रखने वाले लोगों को जैव विविधता के दस्तावेजीकरण, निगरानी और संरक्षण से जोड़ना था। इस दौरान प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिला कि शहरी क्षेत्रों में मौजूद पेड़, पक्षी और आर्द्रभूमि किस प्रकार पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सुबह 7 बजे से 10 बजे तक आयोजित ट्री वॉक का नेतृत्व वैज्ञानिक-डी डॉ. सी.आर. मगेष ने किया। वहीं, संडे बर्ड वॉक का मार्गदर्शन पक्षीविज्ञान विशेषज्ञ डॉ. पारितोष अहमद ने किया। कार्यक्रम में प्रकृति प्रेमियों, विद्यार्थियों, वन्यजीव फोटोग्राफरों, जैव विविधता शोधकर्ताओं, एनजेडपी के इंटर्न और स्वयंसेवकों सहित कुल 25 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के निदेशक, अधिकारी, इंटर्न, स्वयंसेवक और विशेषज्ञ भी इस दौरान मौजूद रहे।

42 पक्षी प्रजातियों का हुआ अवलोकन
प्रकृति भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने कुल 42 पक्षी प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया। भ्रमण के दौरान 300 से अधिक पक्षियों को देखा गया। इस दौरान पक्षियों के व्यवहार, उनकी संख्या और उनके आवास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज की गईं।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक पक्ष 150 से अधिक पेंटेड स्टॉर्क का दिखाई देना रहा। बताया गया कि ये पक्षी अगस्त के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रीय प्राणी उद्यान पहुंचे हैं और अब तालाब के अंदर तथा आसपास मौजूद पेड़ों पर घोंसले बनाना शुरू कर चुके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पेंटेड स्टॉर्क का यहां पहुंचना और घोंसले बनाना चिड़ियाघर के आर्द्रभूमि एवं वृक्ष आधारित आवासों की पारिस्थितिक उपयोगिता का सकारात्मक संकेत है।
पेंटेड स्टॉर्क की घोंसला बनाने की गतिविधि ने प्रतिभागियों को पक्षियों के प्राकृतिक व्यवहार और प्रजनन संबंधी गतिविधियों को करीब से समझने का अवसर भी दिया। इससे नागरिक वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और वन्यजीव प्रेमियों में पक्षियों के संरक्षण के प्रति रुचि बढ़ाने में मदद मिलेगी।
‘रिंगो’ बना आकर्षण का केंद्र
बर्ड वॉक के दौरान डॉ. पारितोष अहमद ने एक नर पेंटेड स्टॉर्क के बारे में भी रोचक जानकारी साझा की। ‘रिंगो’ नामक इस पक्षी को पिछले चार वर्षों से इसी क्षेत्र में घोंसला बनाते हुए देखा जा रहा है। चिड़ियाघर के प्रशिक्षु इस पक्षी की गतिविधियों का आगे भी अवलोकन और अध्ययन कर रहे हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि किसी पक्षी की लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में मौजूदगी और वहां प्रजनन गतिविधि करना उस स्थान के अनुकूल आवास और पर्याप्त खाद्य संसाधनों का संकेत हो सकता है। इस प्रकार के नियमित अवलोकन से पक्षियों के व्यवहार और शहरी जैव विविधता को समझने में वैज्ञानिकों को मदद मिलती है।
40 वृक्ष प्रजातियों की पहचान
ट्री वॉक के दौरान प्रतिभागियों ने 40 वृक्ष प्रजातियों का भी अवलोकन और दस्तावेजीकरण किया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को पेड़ों की पहचान करने के व्यावहारिक तरीके बताए। इनमें पत्तियों की आकृति, छाल की विशेषताएं, फूल, फल और पेड़ की कैनोपी संरचना जैसे प्रमुख आधार शामिल रहे।
प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि पेड़ केवल हरियाली बढ़ाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे शहरी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद जरूरी हैं। पेड़ कार्बन का अवशोषण करने, हवा को शुद्ध करने, तापमान को नियंत्रित करने, मिट्टी के संरक्षण और विभिन्न जीव-जंतुओं को आवास उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नागरिक विज्ञान को मिल रहा बढ़ावा
एनजेडपी की इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य आम लोगों को वैज्ञानिक गतिविधियों से जोड़ना है। प्रकृति भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों को केवल पक्षियों और पेड़ों को देखने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें प्रजातियों की पहचान, अवलोकन और जैव विविधता संबंधी आंकड़ों को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने की जानकारी भी दी गई।
इस पहल से लोगों में शहरी जंगलों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में मदद मिल रही है। साथ ही, नागरिकों द्वारा एकत्र किया गया जैव विविधता संबंधी डेटा भविष्य में संरक्षण और शोध गतिविधियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
स्वस्थ शहरों के लिए जरूरी हैं पेड़
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के निदेशक ने इस अवसर पर कहा कि पेड़ स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र की नींव हैं। वे अनेक प्रजातियों को आश्रय देने के साथ-साथ मनुष्य और पर्यावरण के लिए कई महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि ‘नेचर वॉक्स @ एनजेडपी’ जैसी गतिविधियां लोगों को प्रकृति से जोड़ने के साथ जैव विविधता के दस्तावेजीकरण में नागरिकों की भागीदारी को भी बढ़ावा देती हैं।
उन्होंने शहरी वनों और हरित परिदृश्यों के संरक्षण के प्रति लोगों में अधिक जिम्मेदारी विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम का समापन विशेषज्ञों, प्रतिभागियों और चिड़ियाघर अधिकारियों के बीच संवादात्मक चर्चा और प्रतिक्रिया सत्र के साथ हुआ। इसके बाद सभी ने सामूहिक तस्वीर भी ली।
एनजेडपी की ओर से बताया गया कि गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी शिक्षण अनुभव सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक रविवार आयोजित होने वाली इन प्रकृति सैर में अधिकतम 20 से 25 प्रतिभागियों को ही शामिल किया जाता है। इसमें भाग लेने के लिए पूर्व पंजीकरण अनिवार्य है और पंजीकरण पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किया जाता है। इच्छुक प्रतिभागी निर्धारित गूगल फॉर्म के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण प्रत्येक सप्ताह सोमवार से शुक्रवार तक खुला रहता है। इसका लिंक राष्ट्रीय प्राणी उद्यान, नई दिल्ली की आधिकारिक वेबसाइट और ‘एनजेडपी साथी’ मोबाइल एप्लिकेशन पर उपलब्ध कराया जाता है।
इस तरह दिल्ली चिड़ियाघर की यह पहल प्रकृति को करीब से समझने के साथ-साथ नागरिकों को जैव विविधता संरक्षण की मुहिम से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
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