रामलला की प्रतिमा की तरह मंदिर का निर्माण भी है अलौकिक मंदिर निर्माण की नक्काशी हर एक कण को बनाती है खास  

रामलला की प्रतिमा की तरह मंदिर का निर्माण भी है अलौकिक मंदिर निर्माण की नक्काशी हर एक कण को बनाती है खास

हलधर किसान (धर्म) अयोध्या।  अगाध आस्था के प्रतीक रामलला के नवीन विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद दर्शन के लिए रामभक्तों में उत्साह बढऩे लगा है। प्राण- प्रतिष्ठा की तारीख तय होने, मंदिर में रामलला के विराजित होने के बाद से लाखों भक्त अयोध्या पहुंच चुके है, अब भी इनके आने का सिलसिला जारी है।

बड़ी संख्या में लोगों ने गुरु आश्रमों, मंदिर, होटल, धर्मशाला, रामकथा पार्क, सरयू घाट और अन्य स्थानों पर डेरा डाल रखा है। इनमें वो श्रद्धालु भी शामिल रहे जिन्हें 20 से 22 जनवरी तक तीन दिन अस्थाई मंदिर में रोक के चलते रामलला के दर्शन नहीं मिल सके थे। इसके अलावा तमाम भक्त पड़ोसी जिलों में अपना आश्रय बनाए हुए है। 

राम भक्तों का पिछले 500 सालों का लंबा इंतजार खत्म हो चुका है। राम मंदिर का निर्माण न सिर्फ भक्ति व श्रद्धा बल्कि अयोध्या के विकासात्मक उड़ान और शिल्पकला के दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण है।

पूरी तरह से पत्थरों को तराशकर बनाए गये राम मंदिर के हर एक कण को खास बनाने की कोशिश की गयी है। राम मंदिर का निर्माण इतनी मजबूती के साथ करने का प्रयास किया गया है कि अगले कम से 1000 सालों तक इसको कोई भी नुकसान न हो। सिर्फ  मंदिर ही नहीं बल्कि राम मंदिर के दरवाजे भी अगले 1000 सालों तक मजबूती के साथ टिके रहेंगे।

रामलला की प्रतिमा की तरह मंदिर का निर्माण भी है अलौकिक 

कुछ ऐसा ही दावा किया है राम मंदिर के लिए दरवाजे बनाने वाली तेलंगाना की कंपनी ने। राम मंदिर के लिए दरवाजे बनाने की जिम्मेदारी तेलंगाना की कंपनी अनुराधा टिंबर्स इंटरनेशनल को सौंपी गयी है।

कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर शरतबाबु ने मीडिया में दिये अपने एक इंटरव्यू के दौरान राम मंदिर में लगाये जाने वाले दरवाजों और इसकी खासियतों का खुलासा किया है।

साथ ही उन्होंने यह भी बताया है कि राम मंदिर के दरवाजों को अगले 1000 सालों तक पूरी तरह से सुरक्षित रखने के लिए उनकी कंपनी ने कौन.कौन से कदम उठाए हैं।

 जिस कंपनी को राम मंदिर के लिए दरवाजे बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गयी हैए उक्त कंपनी मूल रूप से लकड़ी का व्यापारए आयात.निर्यात करती है। पिछले 5 सालों से कंपनी ने मंदिरों के लिए दरवाजे डिजाइन व तैयार करने का काम शुरू किया है। तेलंगाना समेत देशभर के कई मंदिरों के लिए इस कंपनी ने दरवाजे डिजाइन किये हैं। उक्त कंपनी तीन पीढिय़ों से लकड़ी का व्यापार कर रही है।

 200 दरवाजे और लगेंगे 

 कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर शरतबाबु ने मीडिया से हुई अपनी बातचीत में बताया कि अयोध्या के राम मंदिर के भूतल में अब तक कुल 18 दरवाजे लगाये जा चुके हैं। ये दरवाजे मंदिर के गर्भगृह, मंडप व अन्य जगहों पर लगाये गये हैं। इन 18 दरवाजों में 14 दरवाजे ऐसे हैं जिनपर सोने की परत चढ़ायी गयी है।

रामलला की प्रतिमा की तरह मंदिर का निर्माण भी है अलौकिक 
मंदिर निर्माण की नक्काशी हर एक कण को बनाती है खास

बाकी के 4 दरवाजे लकड़ी के ही लगाये गये हैं। परकोटे पर 9 दरवाजे लगाये जाएंगे, जिन्हें तैयार करने का काम अभी जारी है। मुख्य मंदिर में कुल 127 दरवाजे लगाये जाएंगे। अगले 1.2 सालों में, जब तक मंदिर पूरी तरह से तैयार नहीं हो जाता है, राम मंदिर में और 200.300 दरवाजे लगाए जाएंगे। 

 राम मंदिर पूरी तरह से आत्मनिर्भर भारत का उदाहरण है। मंदिर में लगी हर एक चीज से लेकर दरवाजे, दरवाजों की लकडिय़ां उन्हें तैयार करने के मशीन से लेकर मजदूर तक हर कोई भारत का और भारत में ही बना है। राम मंदिर में किसी भी विदेशी वस्तु का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

राम मंदिर में महाराष्ट्र से मंगायी गयी सागवान की लकडिय़ों से दरवाजे और दरवाजों के फे्रम तैयार किये जा रहे हैं। किन मानदंडों पर किया गया लकड़ी का चुनाव शरतबाबु का कहना है कि हमें यह सुनिश्चित करना है कि राम मंदिर के दरवाजे कम से कम 1000 सालों तक सुरक्षित रहे।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए ही दरवाजे बनाने के लिए लकड़ी का चुनाव भी किया गया। राम मंदिर के दरवाजों के लिए लकड़ी चुनने के काम में देहरादून के वन विभाग ने हमारी मदद की। उन्होंने कहा कि हालांकि हम पिछले लंबे समय से लकड़ी के व्यवसाय से ही जुड़े हुए हैं।  

इसलिए हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ लकड़ी का चुनाव करना आसान भी हो गया था। शरतबाबु का कहना है कि मंदिर के दरवाजों पर भी नागर शैली के आधार पर ही सभी डिजाइन तैयार किये गये हैंए जिस शैली पर मंदिर का निर्माण हुआ है। दरवाजों पर खुशमिज़ाज हाथी, कमल के फुल, विभिन्न प्रकार के दूसरे फुल, भगवान के वाहन जो उन्हें दरवाजे से होकर मंदिर में प्रवेश करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं, को उकेरा गया है।

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