बीज कानून पाठशाला अंक:23 बीज उत्पादकों के अधिकार पर जानकारी की दरकार

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हलधर किसान। बीज कानून पाठशाला के आज के अंक में जानिए, बीज उत्पादकों के अधिकार पर जानकारी की दरकार.. 

बीज कृषि का मुख्य आदान है। कृषि की प्रगति बीज की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। भारत सरकार ने वर्ष 1963 में नेशनल सीड्स कारपोरेशन की स्थापना कर केन्द्रीय स्तर पर सुव्यवस्थित तरीके से बीज उत्पादन, प्रमाणीकरण एवं विपणन का कार्य प्रारम्भकिया। उसके लगभग तीन वर्ष बाद ही बीज की गुणवत्ता को नियन्त्रित करने के लिए बीज अधिनियम 1966 लागू किया। प्रारम्भ में बीज उत्पादन एवं प्रमाणीकरण का कार्य शासकीय संस्थाओं ने शुरू किया। परन्तु कालान्तर में निजी बीज उत्पादकों ने बीज उत्पादन में प्रवेश किया और इसे अपनी जीविकोपार्जन का साधन बनाया। वर्ष 1950-51 में 50 मिलियन टन कृषि उत्पादन को वर्ष 2024-25 में 230 मिलियन टन तक पहुंचाना गुणवत्ता युक्त बीज एवं बीज उत्पादन में लगी संस्थाओं का काम है और वे इस श्रेय की अधिकारी है।

वर्तमान में लगभग 350 लाख क्विंटल गुणवत्ता युक्त बीज तैयार हो रहा है। हरियाणा क्षेत्रफल की दृष्टि से बहुत छोटा राज्य है परन्तु इससे लगभग 30 लाख क्विंटल प्रमाणित और लगभग इतना ही लेबल बीज तैयार किया जाता है। इसके लिए हरियाणा सरकार एवं निदेशक, हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था प्रशंसा के पात्र हैं। क्योंकि इन्होंने बीज उत्पादकों को प्रोत्साहन देकर, और उनका सहयोग लेकर इस लक्ष्य को प्राप्त किया है। देश में बीज उत्पादन में निजी बीज उत्पादक कम्पनियों के प्रवेश ने उत्पादन में सराहनीय योगदान किया है। वास्तव में बीज उत्पादन के इन स्तम्भों में 75 प्रतिशत योगदान निजी बीज उत्पादकों का है। हरियाणा राज्य को गेहूं उत्पादन में वर्ष 2010-11 व 2011-12 में दो बार देश में सबसे अधिक उत्पादकता के लिए केन्द्रीय सरकार ने ‘कर्मण पुरस्कार” दिया है। निजी बीज उत्पादकों को इसका श्रेय जाता है।


देश का बीज उत्पादक उर्जावान साहसिक, कर्मठ है परन्तु बीज व्यवसाय में लगभग वर्षों से लगा होने पर भी उसे अपने अधिकारों का भान नहीं। इस लेख के माध्यम से उसे उसके अधिकारों से रूबरू कराया गया है। बीज व्यवसाय में तीन पक्ष हैं कृषक, बीज विक्रेता और बीज उत्पादक। कृषक बीज तैयार करता है बीज उत्पादक कम्पनियाँ कृषकों को बीज उत्पादन प्रोग्राम देती है प्रमाणित कराती है और विक्रेताओं को खुदरा विक्रय हेतु देती है। बीज विक्रेता खुदरा विक्रय करता है। बीज उत्पादक कम्पनियाँ केवल बीज उत्पादन ही नहीं करती बल्कि विक्रेता को बीज विक्रय भी करती है इसलिए बीज उत्पादक भी बीज विक्रेता की परिभाषा में आ जाते हैं अतः बीज उत्पादकों को बीज विक्रेताओं के भी अधिकार एवं कर्त्तव्य प्राप्त है। बीज उत्पादक कम्पनियों के निम्न अधिकार हैं:-

1. गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन कराने का अधिकार :-

जैसा उपर व्यक्त किया गया है बीज उत्पादन में कृषक एवं बीज उत्पादक कम्पनियाँ लगी होती हैं अतः गुणवत्ता युक्त बीज उपलब्धी में कृषक की नैतिकता, आचरण एवं इमानदारी परम तत्त्व है। बीज उत्पादक कम्पनियाँ कृषक को गुणवत्ता युक्त बीज उत्पादन के लिए आवश्यक मार्गदर्शन कर सकती है, परन्तु उनके लिए चौकीदार, पुलिस नहीं बन सकती। यदि कोई शरारती और अशुद्ध मानसिकता का कृषक कृतघनता दिखाए तो कोई उपचार नहीं अतः बीज उत्पादक को कृषक की उदंडता के लिए दंडित करने का प्रावधान नये बीज अधिनियम में होना चाहिए। यह बीज उत्पादक का अधिकार है कि उसे शुद्ध बीज प्राप्त हो।

2. भारत एवं अन्य राज्यों में बीज व्यवसाय करना :-

बीज उत्पादकों को अधिकार है कि वे अपना तैयार किया गया बीज देश और विदेश में कहीं बेच सकता है। बीज अधिनियम 1966 के आधार पर बीज बेचने के लिए कोई लाइसैंस की आवश्यकता नहीं थी परन्तु बीज (नियन्त्रण) आदेश 1983 के आधार पर विक्रेताओं को लाइसैंस लेना आवश्यक है इसी प्रकार अन्य देशों में बीज बेचने के लिए एक्जिम पॉलिसी (Exim Policy) आयात निर्यात नीति के तहत भारत सरकार से मान्यता आवश्यक है। मध्य प्रदेश सरकार ने लेबल बीज बेचने पर पाबन्दी लगाई परन्तु मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इन्दौर बैंच ने बीज उत्पादकों की याचिका 2007 के द्वारा यह निर्णीत किया कि लेबल बीजों पर बीज नियन्त्रक का नियन्त्रण होता है और वह केन्द्रीय सरकार का संयुक्त सचिव (बीज) होता है अतः राज्य सरकार लेबल बीज बेचने के लिए दिशा-निर्देश नहीं दे सकती। इसी प्रकार बी.टी. कपास बीज बेचने के लिए हाई कोर्ट मध्य प्रदेश ने वर्ष 2009 में निर्णय दिया कि बी.टी. कपास बेचने के लिए राज्य स्तर या जिला स्तर से अनुमति लेना आवश्यक नहीं बल्कि केवल GEAC अनुवांशिक अभियान्त्रिकी अनुमोदन समिति की अनुमति पर्याप्त है।

3. बीज प्रमाणीकरण कराने का अधिकार :-

बीज अधिनियम की धारा-9 (1) में प्रावधान है कि जो बीज उत्पादक अपना बीज प्रमाणित कराना चाहे वह निर्धारित प्रार्थना पत्र पर अपना आवेदन राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था को देकर पंजीकरण कराकर बीज प्रमाणीकरण की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। बीज प्रमाणित प्रमाणीकरण स्वैच्छिक है जबकि लेबल करके बीज बेचना अनिवार्य है। यहां यह स्पष्ट कर दें कि बीज प्रमाणीकरण कराने के लिए किसी बीज उत्पादक को मजबूर नहीं किया जा सकता बल्कि यह स्वैच्छिक है प्रस्तावित सीड बिल 2010 के द्वारा बीज अधिनियम में बहुत परिवर्तन हुए हैं परन्तु प्रमाणीकरण को स्वैच्छिक ही रखा है। इसके अलावा अन्तर्राज्यीय बीज प्रमाणीकरण का प्रावधान भी केन्द्रीय सरकार के परिपत्र 8-3/94/SD IV दिनांक 16.05.1994 के आधार पर किया गया है इसके अलावा भारत सरकार के ओ०ई०सी०डी० की सदस्यता वर्ष 2009 में ग्रहण करने से भारतीय बीज उत्पादक अन्य देशों में अपने बीज का प्रमाणीकरण प्रक्रिया शुरू कर उसे अपने देश में पूरी कर सकता है और भारत में बीज उत्पादकों को अपने प्रमाणित बीजों को ओ०ई०सी०डी० सदस्य देशों में, जो विश्व में 64 है में बेचने का अधिकार मिला है।

4. अपील करने का अधिकार :-

बीज प्रमाणीकरण का कार्य राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था करती है और यदि किसी बीज उत्पादन को राज्य बीज प्रमाणीकरण के किसी निर्णय से असन्तुष्टी हो तो न्यायालय में जाने से पूर्व बीज अधिनियम 1966 की धारा-11 के अन्तर्गत 30 दिन के अन्दर अपील करने का अधिकार है जिसका शुल्क 100 रुपये है। बीज उत्पादक को बीज विक्रेता के रूप में यदि अनुज्ञा अधिकारी (लाइसेंसिंग अधिकारी) के किसी निर्णय से ऐतराज हो तो वह बीज (नियन्त्रण) आदेश 1988 की धारा-18 के आधार पर निर्णय के 60 दिन के अन्दर अपील कर सकता है।

5. प्रतिनिधित्व का अधिकार :-

  • बीज अधिनियम 1966 की धारा-3 (2) में प्रावधान है कि केन्द्रीय बीज समिति के गठन में कम से कम 2 बीज उत्पादकों का प्रतिनिधित्व हो। इसके अलावा राज्य स्तर में गठित उप बीज समितियों State Seed Sub Committee में भी बीज उत्पादकों का प्रतिनिधित्व दिया जा रहा है।
  • बीज अधिनियम 1966 की धारा 11 में बीज उत्पादकों की राज्य प्रमाणीकरण संस्था के विरूद्ध शिकायतें सुनने का प्रावधान है। भारतीय न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानक 2013 के उपबन्ध साधारण बीज प्रमाणीकरण मानक संगलग्नक Appendix के IX पृष्ठ 552 के अन्तर्गत प्रावधान किया गया है कि राज्य में एक अपीलीय न्यायालय स्थापित हो और यह अपीलीय न्यायालय बहुसदस्यी होना चाहिए और कम से कम तीन सदस्य होने चाहिए और उसमें एक सदस्य बीज उत्पादकों का प्रतिनिधि हो। वर्तमान में हरियाणा में वित्तायुक्त एक सदस्य अपीलीय अथॉरिटी है।
  • बीज संशोधन अधिनियम 1972 के द्वारा बीज अधिनियम 1966 में धारा-8 ए.बी.सी.डी.ई. जोड़कर केन्द्रीय बीज प्रमाणीकरण बोर्ड का गठन किया गया है। भारतीय न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानक-2013 के संगलग्नक (एपैन्डिक्स X) में प्रावधान किया गया है कि केन्द्रीय बीज प्रमाणीकरण बोर्ड के गठन में कम से कम 4 सदस्य बीज उत्पादकों से या बीज विक्रेताओं के होने चाहिए।
  • पादप प्रजाति संरक्षण एवं कृषक अधिकार अधिनियम-2001 के अन्तर्गत स्थापित पादप प्रजाति संरक्षण एवं कृषक अधिकार प्राधिकरण के गठन में एक प्रतिनिधि बीज उद्योग से होना चाहिए।
  • प्रस्तावित बीज अधिनियम में भी प्रावधान रखा है कि केन्द्रीय बीज समिति के गठन में 2 प्रतिनिधि बीज उद्योग से होंगे।

6. बीज सैम्पल टैस्ट कराने का अधिकार :-

न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानक-2013 के उपलब्ध XXII में उद्यत किया गया है कि बीज उत्पादक को राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था से अपने बीज लॉट के प्रमाणीकरण कराने हेतू भेजे गये सैम्पल का परिणाम 30 दिन के अन्दर प्राप्त हो। यदि सैम्पल टैस्ट करने में कोई विशेष प्रक्रिया करना आवश्यक है जिससे परिणाम देने में देरी होती है तो उसकी सूचना प्राप्त करने का अधिकार है। इसके साथ ही बीज उत्पादक को बीज विक्रेता के रूप में बीज निरीक्षक द्वारा लिए गये सैम्पल का परिणाम बीज संशोधन नियम-1973 की धारा-21 (2) और 21 (3) के अनुसार 30 दिन में प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त है।

7. बीज निरीक्षक को विधायन केन्द्र में प्रवेश पर रोक का अधिकार :-

बीज नियम-1968 की धारा-17 (VII) एवं 17 (VIII) में प्रावधान है कि बीज निरीक्षक विधायन केन्द्र (प्रोसेसिंग प्लांट) पर जहाँ बीज प्रोसेस किए जा रहे हैं या बेचे जा रहे हैं, में बिना राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था की लिखित अनुमति के प्रवेश करता है, तो बीज विक्रेता उसे रोक सकता है। इसके अलावा धारा-23 (a) में भी ऐसा ही उल्लेख है कि बीज निरीक्षक राज्य बीज प्रमाणीकरण की अनुमति से ही बीज प्रोसेसिंग प्लांट पर जहां बीज भंडारित या विक्रय किया जा रहा है, जा सकता है।

8. बीज डाउन ग्रेड करने का अधिकार :-

भारतीय न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानक-2013 की धारा-XXVII में बीज उत्पादक को अधिकार प्राप्त है कि उसने जो बीज उत्पादन प्रमाणीकरण के लिए राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था को दिया है वह यदि खेत में या लॉट प्रोसेसिंग प्लांट में प्रस्तुत वर्ग के मानक पूरे नहीं करता और उससे एकदम दूसरे वर्ग के मानक पूरे करता है तो वह अपने बीज को डाउन ग्रेट करवा सकता है परन्तु यह प्रावधान संकर किस्मों और संकर किस्मों के पित्रो (पैरेन्टस) में लागू नहीं होता।

9. किस्म विकास एवं पंजीकरण करवाने का अधिकार :-

पादप प्रजाति संरक्षण एवं कृषक अधिकार अधिनियम-2001 की धारा-15 के द्वारा शासकीय एवं निजी बीज उत्पादक अपनी बीज की विकसित किस्मों का पंजीकरण करवा सकेंगे तथा उनके बीज का पंजीकरण होने के बाद प्रमाणीकरण हो सकेगा। निजी क्षेत्र में किस्म विकसित करने वाला व्यक्ति ब्रीडर कहलाने का अधिकारी है और उसे अब ब्रीडर कहलाने के लिए कृषि स्नातक परा स्नातक या पी.एच.डी. शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं है।

10. परिक्षणशाला स्थापित करने का अधिकार :-

नेशनल सीड्स पॉलिसी-2002 में प्रावधान किया है कि निजी बीज उत्पादक अपनी बीज परिक्षण प्रयोगशाला स्थापित कर उसे अधिसूचित (नोटिफाई) करवा सकता है और स्वयं का या अन्य छोटे बीज उत्पादकों का बीज परीक्षण कर सकता है।

11. बीज विक्रेता के रूप में अधिकार :-

बीज उत्पादक बीज उत्पादन के अलावा बीज विक्रेताओं को बीज विक्रय भी करता है अतः वह बीज विक्रेता भी है अतः बीज विक्रेता के रूप में उसे निम्न अधिकार प्राप्त हैं:-

  • (i) बीज निरीक्षक बीज अधिनियम 1966 की धारा-15 (i) (a) के अनुसार सैम्पल लेने आता है तो उसे बीज नियम-1968 की धारा-35 में प्रदत फार्म-VI में नोटिस प्राप्त करने का अधिकार है।
  • (ii) बीज अधिनियम 1966 की धारा-14 (i) (b) में प्रावधान किया है कि जिस क्षेत्र से बीज निरीक्षक ने सैम्पल लिया है बीज का परिक्षण उसी क्षेत्र की परिक्षणशाला में हो।
  • (iii) बीज अधिनियम 1966 की धारा-14 (2) में प्रावधान है कि बीज निरीक्षक लिए गये तीनों नमूनों की कीमत बीज विक्रेता को सैम्पल लेते समय ही अदा करें।
  • (iv) बीज अधिनियम 1966 की धारा-15 (2) (a) में प्रावधान किया गया है कि बीज निरीक्षक द्वारा लिये गये तीनों नमूनों में से एक भाग बीज विक्रेता को मिले।
  • (v) बीज अधिनियम 1966 की धारा-15 (4) (c) में प्रावधान किया गया है कि किसी कमी के कारण बीज निरीक्षक ने बीज बिक्री पर लगाई गई रोक के कारणों का यदि बीज विक्रेता ने निराकरण कर दिया है तो बीज निरीक्षक रोक को खोल दे।
  • (vi) बीज अधिनियम 1966 की धारा-16(1) के अनुसार बीज विक्रेता को अधिकार प्राप्त है कि बीज परिक्षणशाला की एक रिपोर्ट प्राप्त करे।
  • (vii) बीज नियम 1968 की संशोधित धारा-21 (2) एवं 21 (3) के द्वारा बीज विक्रेता को अधिकार है कि बीज विशलेषक से बीज परिक्षण की रिपोर्ट 30 दिन में प्राप्त करें।
  • (viii) बीज उत्पादक को बीज अधिनियम की धारा-16 (2) में हक दिया गया है कि उसका सैम्पल फेल आने पर रैफ्री लैब केन्द्रीय बीज परिक्षणशाला, बनारस, उत्तर प्रदेश से अपने बीज की गुणवत्ता के लिए पुनः परिक्षण करा ले। परन्तु यह प्रावधान केवल बीज निरीक्षक द्वारा न्यायालय में वाद दायर करने के दिन से उत्पन्न होता है।
  • (ix) यदि बीज निरीक्षक ने कोई रिकॉर्ड लिया है तो बीज अधिनियम-1966 की धारा-14 (i) (b) तथा बीज (नियन्त्रण) आदेश-1983 की धारा- (13) (e) में हक है कि रसीद प्राप्त करें।
  • (x) बीज विक्रेता को बीज (नियन्त्रण) आदेश 1983 की धारा-13(e) के द्वारा अधिकार प्राप्त है कि वह जब्त किए गये रिकॉर्ड की छायाप्रति देकर रिकॉर्ड ले सकें।
  • (xi) बीज विक्रेता को अधिकार है कि वह कारण बताओ नोटिस आने पर बीज निरीक्षक को परिणाम टोलरेन्स टेबल एवं हार्ड सीड्स से मिलान करने के लिए आग्रह करें।
  • बीज विक्रेताओं के विभिन्न बीज नियामकों में और भी अधिकार है। इन
  • अधिकारों की जानकारी मात्र से ही कोई समाधान नहीं होगा बल्कि इन अधिकारों का उल्लंघन होने पर प्रतिवाद करने का साहब व्यक्तिगत रूप से या संघटनात्मक रूप से जुटाना होगा। बीज उत्पादकों / बीज विक्रेताओं को थाली में परोसकर हक देने कोई नहीं आयेगा बल्कि हक छीनने होंगे और हक छीनने के लिए साहस, हिम्मत, और दृढ़ता की आवश्यकता होगी।

-: कृषि कहावत :-सींग बांकी मैस सोहवै, कान बांकी घोडिया। मूँछ बांका मर्द सोहवै, नयन बांकी गोरिया ।।

अर्थात भैंस की शोभा सींग से होती है और घोड़ियाँ वे अच्छी लगती हैं जिनके कान खड़े हों। मनुष्य मूंछो से आकर्षक लगता है, और मृग नयनी नारियाँ सुन्दर लगती हैं।

आर.बी. सिंह, बीज कानून रत्न, एरिया मैनेजर (सेवानिवृत) नेशनल सीड्स कारपोरेशन लि० (भारत सरकार का संस्थान) सम्प्रति ‘कला निकेतन’, ई-70. विधिका-11, जवाहर नगर, हिसार-125001 (हरियाणा), दूरभाष सम्पर्क-79883-04770, 94667-46625 (WhatsApp)

उक्त जानकारी संकलन सहयोगी- 

वेद नारंग-बालाजी एग्रीकल्चर स्टोर बीज विक्रेता-हिसार।

संकलन सहयोगी-

कृषि आडकन विक्रेता संघ राष्ट्रीय अध्यक्ष मनमोहन कलन्त्री

राष्ट्रीय सचिव प्रवीण भाई पटेल 

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम खंडेलवाल

 राष्ट्रीय प्रवक्ता व प्रदेश सचिव संजय रघुवंशी 

प्रदेश अध्यक्ष मानसिंह राजपूत 

प्रदेश संगठन मंत्री विनोद जैन 

प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णा दुबे ….

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