पर्यावरण संरक्षण के साथ मजदूरों को गांव में ही मिल रहा रोजगार
मप्र के खरगोन जिले की ग्राम पंचायत ठिबगांव बुजुर्ग इन दिनों हरियाली से आच्छादित नर्सरी को लेकर चर्चाओं में बना हुआ है। बंजर इलाकों को हराभरा बनाने वाली इस पंचायत में वर्ष 2017 में वृक्षारोपण अभियान के तहत पौधरोपण किया था। बीते 8 वर्षो में जहां कभी सूखी और बंजर धरती दूर.दूर तक पसरी रहती थी, वहां अब पेड़ों की हरियाली लहराने लगी है।
यहां पंचायतकर्मियों और ग्रामीणों ने अपने अथक प्रयासों से हरे स्वप्न को साकार करने की दिशा में एक मिसाल कायम की है। प्रभारी पंचायत सचिव और रोजगार सहायत महेेंद्र यादव ने बताया पंचायत क्षेत्र की वीरान पहाडिय़ां जो एक समय अतिक्रमण की चपेट में आने वाली थी, वह आज नर्सरी लगने के बाद जीवंत हो उठी हैं। जिस जगह पर कभी एक घास तक नहीं होती थी। उस जगह पर आज फल और छायादार पेड़ लहलहा रहे है।
यादव बताते है कि 2017 में 50 हजार पौधों से नर्सरी की शुरुआत हुई थी, पौधरोपण के बाद बारिश में जमीन हरियाली से आच्छादित होने पर ग्रामीणों में उत्साह नजर आया। उन्होंने गांव की अन्य जगह पर भी पौधरोपण के लिये प्रोत्साहित किया। समय के साथ धीरे- धीरे गांव के तीन अलग- अलग स्थानों पर नर्सरी के रुप में पौधरोपण हुआ। इसका परिणाम यह हुआ कि आज तीनों नर्सरियों में करीब डेढ़ लाख पौधे और पेड़ लहलहा रहे है। जिसमें जामुन,आम, नीम, बांस और कई फलदार- छाया पेड़ शामिल है।
यादव ने बताया सबसे बड़ी चुनौती थी, इन पौधो को संरक्षित रखना, लेकिन संकल्प के साथ किए गए इस पौधरोपण के सकारात्मक परिणाम आए है।
पानी की कमी के चलतआसपास के खेत मालिकों ने पर्यावरण संरक्षण के इस कार्य को बढ़ावा देते हुए पानी उपलब्ध कराया। कुछ दिन पूर्व कलेक्टर भव्या मित्तल ने भी दौरा किया। हरियाली से आच्छादित क्षेत्र को देखकर उन्होंने भी पंचायत की प्रशंसा करते हुए आगामी दिनों में और 50 हजार पौधे लगाने की उम्मीद जगाई है । उन्होंने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही बारिश के मौसम में यहां पर पौधेरोपण कार्यक्रम किया जाएगा। क्षेत्र में मॉडल पंचायत बनाने का भी लक्ष्य रखा गया है । गांव में आसपास अलग.अलग क्षेत्र में तीन से अधिक नर्सरींयां मनरेगा के तहत तैयार की गई है, जिसमें गांव के ही मजदूरों के द्वारा गड्ढे करने से लेकर पौधों की सिंचाई और रखरखाव का कार्य किया जा रहा है। इसके एवज़ में उन्हें मनरेगा योजना के अंतर्गत मजदूरी भी दी जा रही है । इस स्थान पर विगत 03.04 वर्षो में 32 हजार पौधे मियाबाकी एवं सामुदायिक वृक्षारोपण के रूप में बहुत ही सुंदर जंगल विकसित किए गए हैं। इन सभी पौधों को पालने में मनरेगा योजना से 05 वर्ष तक मजदूरी व सामग्री का भुगतान किया जाता है। मियाबाकी एवं सामुदायिक वृक्षारोपण में ग्रामीण व स्कूल के बच्चे घूमने एवं पिकनिक मनाने आते हैं। यहां पर अमृत बाल वाटिका के रूप में झूले लगाए गए हैं। यहां पर यू.टूबर द्वारा गानों की शूटिंग व रील्स भी शूट की जाती है।
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