हलधर किसान भोपाल। देशभर के कृषि आदान (खाद, बीज एवं कीटनाशक) व्यापारियों ने अपनी विभिन्न लंबित समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर 27 अप्रैल 2026 को एक दिन की सांकेतिक हड़ताल का ऐलान किया है। इस संबंध में Agro Input Dealers Association (AIDA), नई दिल्ली के बैनर तले जिला स्तर पर ज्ञापन सौंपकर प्रधानमंत्री के नाम अपनी मांगें प्रेषित की जा रही हैं। संगठन का दावा है कि वह देशभर के लगभग 5 लाख व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करता है, जो पिछले एक दशक से लगातार कई व्यावसायिक और नीतिगत चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
जिला मुख्यालयों पर जिलाधीश एवं सांसदों के माध्यम से सौंपे जा रहे ज्ञापन में व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि कई बार केंद्र और राज्य सरकारों के संबंधित विभागों को अवगत कराने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। ऐसे में मजबूरीवश व्यापारियों को सांकेतिक हड़ताल का सहारा लेना पड़ रहा है।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से खाद पर जबरन लिंकिंग के मुद्दे को उठाया गया है। व्यापारियों का आरोप है कि उर्वरक निर्माता कंपनियां सब्सिडी वाले खाद के साथ अन्य गैर-जरूरी उत्पादों को खरीदने के लिए बाध्य करती हैं, जिससे उनका आर्थिक बोझ बढ़ता है। उन्होंने मांग की है कि इस प्रकार की ‘जबरन लिंकिंग’ को अपराध घोषित कर पूरे देश में इस पर रोक लगाई जाए।
इसके अलावा खाद की आपूर्ति व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। वर्तमान में यूरिया जैसे उर्वरकों की डिलीवरी रेलहेड तक सीमित होने के कारण डीलरों को अतिरिक्त परिवहन लागत उठानी पड़ती है, जिससे प्रति बैग 40 से 50 रुपये तक का अतिरिक्त भार पड़ता है। व्यापारियों ने मांग की है कि कंपनियां ‘फ्री ऑन रोड’ (FOR) व्यवस्था के तहत सीधे बिक्री केंद्र तक डिलीवरी सुनिश्चित करें।
डीलर मार्जिन को लेकर भी असंतोष जताया गया है। बढ़ती महंगाई और संचालन लागत को देखते हुए व्यापारियों ने उर्वरकों पर न्यूनतम 8 प्रतिशत मार्जिन तय करने की मांग की है, ताकि उनका व्यवसाय आर्थिक रूप से टिकाऊ बना रहे।
‘साथी’ (SATHI) पोर्टल की अनिवार्यता को लेकर भी ग्रामीण खुदरा विक्रेताओं ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि तकनीकी और संसाधनों की कमी के कारण छोटे व्यापारियों के लिए इस पोर्टल का संचालन कठिन है। ऐसे में इसे वैकल्पिक बनाया जाए और इसकी अनिवार्यता केवल निर्माताओं एवं थोक विक्रेताओं तक सीमित रखी जाए।
बीज और कीटनाशकों से जुड़े नियमों पर भी व्यापारियों ने पुनर्विचार की मांग की है। अवैध HTBT बीजों की बिक्री पर रोक लगाने के साथ ही अधिकृत डीलरों को विनियमित बिक्री की अनुमति देने की बात कही गई है। साथ ही सीलबंद पैकिंग में गुणवत्ता खराब होने पर विक्रेता को दोषी ठहराने की बजाय केवल ‘साक्षी’ का दर्जा देने की मांग की गई है, ताकि जिम्मेदारी निर्माता कंपनियों पर तय हो सके।
एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा एक्सपायर्ड कीटनाशकों का है। व्यापारियों का कहना है कि कंपनियां पुराने या समाप्त हो चुके स्टॉक को वापस नहीं लेतीं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान होता है। उन्होंने इसे कानूनी रूप से अनिवार्य करने की मांग की है।
ज्ञापन में नए बीज अधिनियम एवं कीटनाशक विधेयक 2025 के कुछ प्रावधानों को भी कठोर बताते हुए उनमें संशोधन की मांग की गई है। विशेष रूप से रिटेल डीलर को ‘प्रथम पक्ष’ बनाए जाने का विरोध किया गया है।
इसके अतिरिक्त झूठी शिकायतों से परेशान व्यापारियों ने जिला स्तर पर जांच समिति गठित करने की मांग की है, ताकि बिना जांच के कार्रवाई से बचा जा सके। लाइसेंस निलंबन के मामलों में 21 दिनों के भीतर स्वतः बहाली का प्रावधान लागू करने की भी मांग की गई है।
व्यापारियों ने हर वर्ष कंपनी के प्रिंसिपल सर्टिफिकेट जोड़ने की अनिवार्यता समाप्त करने और बीज लाइसेंस की दोहरी प्रणाली को खत्म करने की भी मांग उठाई है।
अंत में व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि एक माह के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आगामी खरीफ सीजन से पहले अनिश्चितकालीन बंद का निर्णय लिया जा सकता है। इससे कृषि आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी और किसानों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
कृषि आदान विक्रेता संघ ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित मंत्रालयों को आवश्यक निर्देश जारी करेगी, ताकि समय रहते समाधान सुनिश्चित हो सके।
माननीय महोदय हमारी उपरोक्त समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए सम्बंधित अधिकारियों को वह केंद्रीय कृषि मंत्री महोदय व माननीय श्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व केंद्रीय उर्वरक व रसायन मंत्री श्री जेपी नड्डा जी से निवेदन है कि देश के कृषि आदान व्यापारियों के हित में व किसानों के हित में उचित निर्णय लेकर सहयोग प्रदान करें धन्यवाद ।

श्री कृष्णा दुबे उपाध्यक्ष
कृषि आदान विक्रेता संघ मध्य प्रदेश भोपाल
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