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तमिलनाडु और मेघालय में जैव विविधता संरक्षण के लिए 5 वर्षीय राष्ट्रीय परियोजना शुरू

5 year national project for biodiversity conservation launched in Tamil Nadu and Meghalaya

ग्राम पंचायत योजनाओं को मिलेगा ‘ग्रीन’ स्वरूप, स्थानीय समुदायों की भूमिका होगी मजबूत

हलधर किसान भोपाल। देश में जैव विविधता संरक्षण को जमीनी स्तर तक मजबूत करने के उद्देश्य से पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने तमिलनाडु और मेघालय में एक महत्वाकांक्षी पांच वर्षीय परियोजना का शुभारंभ किया है। वर्ष 2025 से 2030 तक चलने वाली इस परियोजना के लिए 4.88 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान निर्धारित किया गया है। यह पहल भारत सरकार, वैश्विक पर्यावरण सुविधा (जीईएफ) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के संयुक्त सहयोग से संचालित होगी।

परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) को पर्यावरण के अनुकूल बनाना और स्थानीय समुदायों व संस्थाओं को सशक्त करते हुए जैव विविधता संरक्षण को स्थानीय शासन का अभिन्न हिस्सा बनाना है।

तमिलनाडु में यह परियोजना सत्यमंगलम क्षेत्र में लागू होगी, जहां पश्चिमी और पूर्वी घाटों का संगम है। इस क्षेत्र में मुदुमलाई और सत्यमंगलम बाघ अभ्यारण्य शामिल हैं, जहां वन क्षेत्रों से जुड़े समुदाय वन्यजीव संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं मेघालय के गारो हिल्स क्षेत्र में नोकरेक जैवमंडल, बालपक्रम राष्ट्रीय उद्यान और सिजू वन्यजीव अभ्यारण्य को शामिल किया गया है, जहां समुदाय आधारित संरक्षण मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा।

परियोजना के तहत पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) और जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) को मजबूत किया जाएगा। साथ ही वन विभाग, राजस्व विभाग, जनप्रतिनिधियों और नागरिक समाज को एक मंच पर लाकर सामुदायिक भागीदारी से जैव विविधता योजनाएं तैयार की जाएंगी।

इसके अलावा, परियोजना में नवीन वित्तीय मॉडल जैसे पहुंच एवं लाभ साझाकरण (एबीएस), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) और हरित सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के अवसर भी बढ़ेंगे।

ज्ञान प्रबंधन और क्षमता निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि इस मॉडल को देशभर में लागू किया जा सके। इसमें महिलाओं, अनुसूचित जाति और जनजातीय समुदायों की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।

यह पहल भारत की राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति (2024-2030), वैश्विक 30×30 लक्ष्य और पेरिस समझौते के तहत निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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