हलधर किसान नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रयासों को और तेज करते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के प्रवर्तन कार्य बल (ईटीएफ) की 130वीं बैठक 04 मई 2026 को आयोजित की गई। इस बैठक में 11 अप्रैल से 28 अप्रैल 2026 तक की अवधि के दौरान किए गए निरीक्षणों, प्रवर्तन गतिविधियों और अनुपालन की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि 18 दिनों की रिपोर्टिंग अवधि के दौरान आयोग के फ्लाइंग स्क्वाड ने विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया। इस दौरान कुल 174 निरीक्षण किए गए, जिनमें निर्माण एवं विध्वंस (सी एंड डी) स्थलों पर 26, औद्योगिक क्षेत्रों में 40 और डीजल जनरेटर (डीजी) सेटों से जुड़े 108 निरीक्षण शामिल रहे। निरीक्षणों के दौरान कुल 61 उल्लंघन सामने आए, जिनमें सी एंड डी स्थलों से 12, औद्योगिक क्षेत्रों से 8 और डीजी सेटों से संबंधित 41 उल्लंघन दर्ज किए गए।
इन उल्लंघनों के आधार पर आयोग ने सख्त कार्रवाई की सिफारिश की है। रिपोर्ट के अनुसार 6 इकाइयों या परियोजनाओं को बंद करने का प्रस्ताव रखा गया है, वहीं 31 डीजी सेटों को सील करने की कार्रवाई की गई। इसके अलावा 6 मामलों में कारण बताओ नोटिस (एससीएन) जारी किए गए हैं तथा 11 मामलों में पर्यावरण क्षतिपूर्ति (ईसी) लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। एक गंभीर मामले में सीएक्यूएम अधिनियम की धारा 14 के तहत अभियोजन चलाने की भी सिफारिश की गई है। कुछ मामलों को आगे की जांच के लिए संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को भेजा गया है।
बैठक में 17 अप्रैल 2026 को हुई पिछली बैठक के बाद से अब तक की गई कार्रवाइयों की भी समीक्षा की गई। इस दौरान कुल 66 क्लोजर, एससीएन, सीलिंग और ईसी से संबंधित पत्र जारी किए गए। इनमें 6 औद्योगिक क्षेत्रों, 22 निर्माण एवं विध्वंस स्थलों और 38 डीजी सेटों से जुड़े मामले शामिल हैं। साथ ही अनुपालन की पुष्टि के बाद 16 इकाइयों को पुनः संचालन की अनुमति भी दी गई है।
प्रवर्तन कार्य बल ने बैठक में स्पष्ट किया कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इनमें डीजी सेट्स (निर्देश संख्या 76 के अनुसार), निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियां, औद्योगिक उत्सर्जन और सड़कों पर उड़ने वाली धूल का प्रबंधन प्रमुख हैं। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि केवल नियम बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका जमीनी स्तर पर सख्ती से पालन सुनिश्चित करना अधिक महत्वपूर्ण है।
बैठक में अंतर-एजेंसी समन्वय को मजबूत बनाने पर भी विशेष बल दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल से ही प्रवर्तन कार्यों में तेजी लाई जा सकती है। इसके साथ ही समय पर अनुवर्ती कार्रवाई, निरीक्षणों की गुणवत्ता में सुधार और जवाबदेही तय करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
अद्यतन संचयी आंकड़ों के अनुसार, 04 मई 2026 तक आयोग के फ्लाइंग स्क्वाड द्वारा कुल 27,008 इकाइयों, परियोजनाओं और संस्थानों का निरीक्षण किया जा चुका है। इन निरीक्षणों के आधार पर 1,779 इकाइयों को बंद करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इनमें से 1,365 मामलों में अनुपालन सुनिश्चित होने के बाद पुनः संचालन की अनुमति दी गई है।
इसके अलावा 123 मामलों को अंतिम निर्णय के लिए संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को स्थानांतरित किया गया है। वहीं 291 मामलों में पुनः संचालन की अनुमति पर अभी विचार किया जा रहा है और ये मामले जांच के अधीन हैं।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने स्पष्ट किया कि वायु प्रदूषण एक गंभीर चुनौती है, जिससे निपटने के लिए निरंतर और कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है। आयोग ने बेहतर डेटा की सटीकता, मजबूत प्रवर्तन तंत्र और पर्यावरणीय मानकों के सख्त पालन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। साथ ही निरीक्षण दक्षता बढ़ाने और सभी स्तरों पर जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया।
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