हलधर किसान भोपाल। कृषि आदान विक्रेता संघ, मध्यप्रदेश ने खाद, बीज एवं कीटनाशक व्यापारियों के निरीक्षण और कार्रवाई की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग करते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार से भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है। संघ का कहना है कि यदि निरीक्षण और कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी तथा दोषी अधिकारियों पर समय रहते कार्रवाई की जाएगी, तभी किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध हो सकेंगे और अमानक उत्पादों के कारोबार पर प्रभावी रोक लग सकेगी।
संघ के पदाधिकारियों ने हाल ही में राजस्थान के जयपुर संभाग के भिवाड़ी, कोटपूतली और बहरोड़ क्षेत्र में खाद एवं कीटनाशक उत्पादक इकाइयों पर कृषि विभाग द्वारा की गई छापामार कार्रवाई का उल्लेख करते हुए दावा किया कि कार्रवाई के दौरान कुछ अधिकारियों द्वारा कथित रूप से अवैध वसूली किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संघ ने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
संघ का कहना है कि देशभर में समय-समय पर खाद, बीज और कीटनाशकों की गुणवत्ता की जांच के लिए सैंपल लिए जाते हैं तथा कई स्थानों पर अमानक उत्पाद पकड़े जाने की खबरें भी सामने आती रहती हैं। इसके बावजूद आम लोगों को यह जानकारी बहुत कम मिलती है कि संबंधित कंपनियों के विरुद्ध किस कानून के तहत क्या कार्रवाई की गई, कितने मामलों में एफआईआर दर्ज हुई और कितने मामलों में लाइसेंस निरस्त किए गए। संगठन का मानना है कि कार्रवाई की पूरी जानकारी सार्वजनिक होने से व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी कम होंगी।
कृषि आदान विक्रेता संघ का आरोप है कि यदि निरीक्षण के दौरान किसी भी स्तर पर समझौते या अवैध लेनदेन की गुंजाइश रहती है तो इसका सबसे बड़ा नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है। ऐसे मामलों में अमानक खाद, अमानक बीज और घटिया कीटनाशकों का कारोबार जारी रहता है, जिससे किसानों की लागत बढ़ती है, फसलों का उत्पादन प्रभावित होता है और आर्थिक नुकसान भी होता है।
संघ ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी पर भ्रष्टाचार या अवैध वसूली के आरोप सिद्ध होते हैं तो उसके विरुद्ध तत्काल कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। संगठन का मानना है कि केवल कंपनियों पर कार्रवाई करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि निरीक्षण प्रक्रिया को भी पूरी तरह जवाबदेह बनाना आवश्यक है।
संघ के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि समाचार पत्रों और विभिन्न माध्यमों से लगातार अमानक खाद, बीज तथा घटिया कीटनाशकों की बरामदगी की खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन इनके अंतिम परिणाम सार्वजनिक नहीं हो पाते। उन्होंने मांग की कि जिन व्यापारियों के नमूने जांच में अमानक पाए जाते हैं, उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई, दंड और न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी भी सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसानों और व्यापारियों दोनों का विश्वास बना रहे।
मध्यप्रदेश के संदर्भ में भी संगठन ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान अच्छी वर्षा होने के कारण अधिकांश क्षेत्रों में बुवाई का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। ऐसे समय में कृषि आदान की मांग बढ़ी हुई है। इसलिए विभाग को निरीक्षण के दौरान ईमानदारी से व्यापार करने वाले लाइसेंसधारी कृषि आदान विक्रेताओं को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं करना चाहिए। वहीं यदि कोई व्यापारी, निर्माता या वितरक नियमों का उल्लंघन करता है या किसानों के साथ धोखाधड़ी करता है, तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

कृषि आदान विक्रेता संघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री मान सिंह राजपूत, प्रदेश सचिव एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री संजय रघुवंशी, सदस्यता अभियान प्रभारी श्री विनोद जैन, सागर जिला अध्यक्ष श्री राजेश मलैया, बैतूल जिला अध्यक्ष श्री प्रकाश जैन तथा प्रदेश उपाध्यक्ष श्री कृष्णा दुबे सहित अन्य पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार, राज्य शासन एवं कृषि विभाग से मांग की है कि निरीक्षण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए, भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए तथा ईमानदार कृषि आदान व्यापारियों को अनावश्यक परेशान न किया जाए। संगठन का कहना है कि पारदर्शी व्यवस्था, जवाबदेही और निष्पक्ष कार्रवाई से ही किसानों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
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