हलधर किसान खरगोन, मध्यप्रदेश। प्रदेश में सक्रिय मानसून ने जहां किसानों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी है, वहीं प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की सुंदरता भी अपने चरम पर पहुंच गई है। खरगोन जिले के भगवानपुरा क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध सिरवेल महादेव का प्राकृतिक जलप्रपात इन दिनों आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। लगातार हो रही बारिश के बाद लगभग 50 फीट की ऊंचाई से गिरता यह विशाल झरना अपने पूरे वेग के साथ बह रहा है। सफेद दूधिया जलधारा, चारों ओर फैली हरियाली और पहाड़ियों के बीच गूंजती जलध्वनि श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रही है।
सावन माह के आगमन से पहले ही सिरवेल महादेव मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है। बड़ी संख्या में लोग भगवान महादेव के दर्शन करने के साथ-साथ इस प्राकृतिक जलप्रपात का आनंद लेने पहुंच रहे हैं। कई श्रद्धालु इसे प्रकृति द्वारा भगवान शिव का दिव्य जलाभिषेक मान रहे हैं। मंदिर परिसर में धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।
लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में पानी जलप्रपात तक पहुंच रहा है, जिससे इसकी धार पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और आकर्षक हो गई है। पहाड़ों के बीच से लगभग 50 फीट नीचे गिरती जलधारा का दृश्य किसी भी पर्यटक को रोमांचित कर देता है। आसपास की हरियाली, ठंडी हवाएं और प्राकृतिक वातावरण लोगों को शहरों की भागदौड़ से दूर सुकून का एहसास करा रहे हैं।
इन दिनों सिरवेल महादेव जलप्रपात का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में तेज वेग से गिरते पानी की गूंज और प्राकृतिक सौंदर्य लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। इंटरनेट पर हजारों लोग इस स्थान की सुंदरता की सराहना करते हुए इसे मध्यप्रदेश के सबसे खूबसूरत प्राकृतिक स्थलों में शामिल बता रहे हैं। कई लोगों ने इसकी तुलना देश के प्रसिद्ध हिल स्टेशनों और जलप्रपातों से भी की है।
मानसून के दौरान इस प्रकार के प्राकृतिक स्थलों पर पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ ही प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से कहा है कि वे जलप्रपात के अत्यधिक निकट न जाएं तथा निर्धारित सुरक्षा सीमा के भीतर रहकर ही प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लें। अधिकारियों का कहना है कि लगातार वर्षा के कारण जलप्रवाह कभी भी अचानक बढ़ सकता है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसलिए पर्यटकों को सावधानी और जिम्मेदारी के साथ भ्रमण करना चाहिए।
उधर, मानसून ने पड़ोसी बड़वानी जिले में अपना विकराल रूप भी दिखाया है। सेंधवा क्षेत्र में शुक्रवार शाम से शनिवार सुबह तक 206.2 मिलीमीटर (करीब 8.11 इंच) वर्षा दर्ज की गई, जो जिले में सबसे अधिक रही। भारी बारिश के कारण दो बड़े नाले उफान पर आ गए, जिससे शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। पानी घरों, दुकानों और धार्मिक स्थलों तक पहुंच गया, जबकि कई वाहन बह गए और कुछ मकानों को भी नुकसान पहुंचा।
प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान चलाकर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। पूरी रात प्रशासनिक अमला, पुलिस और राहत दल लोगों की सहायता में जुटे रहे। सेंधवा का प्रसिद्ध देवझिरी मंदिर भी बाढ़ के पानी से प्रभावित हुआ। तलावड़ी, रामकटोरा, भवानी चौक, झिरा चौक, मल्हार बाग और मोतीबाग सहित कई क्षेत्रों में जलभराव से जनजीवन प्रभावित रहा।
मानसून का यह दौर जहां एक ओर किसानों के लिए राहत लेकर आया है और जलस्रोतों को पुनर्जीवित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में लोगों के लिए चुनौती भी बन रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक स्थलों का आनंद लेते समय सुरक्षा नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
हलधर किसान की अपील: यदि आप मानसून के दौरान किसी जलप्रपात, नदी या पहाड़ी क्षेत्र की यात्रा करने जा रहे हैं, तो मौसम की जानकारी अवश्य लें, प्रशासन के निर्देशों का पालन करें तथा तेज बहाव वाले क्षेत्रों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। प्रकृति का आनंद तभी सुखद है, जब सुरक्षा सर्वोपरि हो।
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