एनसीआर में वायु प्रदूषण पर सख्त हुआ सीएक्यूएम, 17 दिनों में 173 निरीक्षण, कई इकाइयों पर कार्रवाई

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हलधर किसान नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों के लिए गठित वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने प्रवर्तन गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बना दिया है। आयोग की प्रवर्तन कार्य बल (ईटीएफ) की 134वीं बैठक में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए की गई कार्रवाइयों, निरीक्षणों तथा अनुपालन की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में स्पष्ट किया गया कि नियमों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों, निर्माण परियोजनाओं तथा डीजल जनरेटर (डीजी) सेट संचालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार आयोग के फ्लाइंग स्क्वॉड ने 14 जून से 30 जून 2026 के बीच केवल 17 दिनों में 173 निरीक्षण किए। इन निरीक्षणों का उद्देश्य औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) गतिविधियों तथा डीजल जनरेटर सेटों से होने वाले प्रदूषण की निगरानी करना था।

रिपोर्ट के अनुसार कुल 173 निरीक्षणों में से 15 निरीक्षण निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) स्थलों, 91 निरीक्षण औद्योगिक इकाइयों तथा 67 निरीक्षण डीजल जनरेटर (डीजी) सेटों से संबंधित थे। निरीक्षणों के दौरान 62 मामलों में पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन पाया गया। इनमें 7 निर्माण एवं विध्वंस परियोजनाएं, 31 औद्योगिक इकाइयां तथा 24 डीजी सेट नियमों का पालन करते हुए नहीं पाए गए।

ईटीएफ ने निरीक्षण रिपोर्टों के आधार पर संबंधित एजेंसियों को कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आयोग ने 4 औद्योगिक इकाइयों एवं परियोजनाओं को बंद करने, 27 डीजल जनरेटर सेटों को सील करने, 6 मामलों में अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए विशेष आदेश जारी करने तथा 17 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा (ईसी) लगाने का प्रस्ताव रखा है। आयोग का कहना है कि प्रदूषण फैलाने वाली किसी भी इकाई को नियमों की अनदेखी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

बैठक में 133वीं ईटीएफ बैठक में लिए गए निर्णयों पर हुई कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। आयोग ने संतोष व्यक्त किया कि संबंधित राज्य सरकारों एवं कार्यान्वयन एजेंसियों ने अधिकांश मामलों में आवश्यक कार्रवाई पूरी कर ली है। जिन परियोजनाओं ने निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया, उन्हें दोबारा कार्य प्रारंभ करने की अनुमति दी गई।

अनुपालन की समीक्षा के बाद आयोग ने निर्माण एवं विध्वंस परियोजनाओं के लिए कुल 7 कार्य बहाली आदेश जारी किए हैं। इनमें उत्तर प्रदेश में 2 तथा हरियाणा में 5 परियोजनाओं को पर्यावरणीय मानकों का पालन करने के बाद दोबारा काम शुरू करने की अनुमति दी गई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि कार्य बहाली केवल उन्हीं परियोजनाओं को दी जाएगी जो सभी निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन करेंगी।

बैठक में 06 जुलाई 2026 तक की समग्र प्रवर्तन स्थिति भी प्रस्तुत की गई। आंकड़ों के अनुसार आयोग के फ्लाइंग स्क्वॉड ने अब तक 27,750 औद्योगिक इकाइयों, परियोजनाओं एवं संस्थानों का निरीक्षण किया है। इन निरीक्षणों के आधार पर 1,802 बंद करने के आदेश जारी किए गए। बाद में आवश्यक सुधार और अनुपालन सुनिश्चित होने पर 1,424 इकाइयों एवं परियोजनाओं को कार्य बहाली की अनुमति दी गई।

इसके अतिरिक्त 123 मामलों को अंतिम निर्णय के लिए संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) तथा दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को भेजा गया है। वहीं 255 मामलों में कार्य बहाली आदेश जारी करने से पहले अभी विस्तृत जांच और अनुपालन सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।

आयोग ने बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया कि एनसीआर में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केवल निरीक्षण पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि प्रभावी प्रवर्तन, समयबद्ध कार्रवाई और सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी आवश्यक है। ईटीएफ ने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए कि निरीक्षणों की गुणवत्ता बढ़ाई जाए, उल्लंघन करने वालों की जवाबदेही तय की जाए तथा पर्यावरणीय नियमों के पालन में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए।

विशेष रूप से औद्योगिक उत्सर्जन, डीजल जनरेटर सेटों तथा निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों को एनसीआर में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में माना गया है। आयोग ने इन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने और नियमित निरीक्षणों के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग की यह सख्त निगरानी व्यवस्था भविष्य में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यदि सभी औद्योगिक इकाइयां, निर्माण एजेंसियां और अन्य संबंधित संस्थान निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का ईमानदारी से पालन करें, तो एनसीआर की वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है। सीएक्यूएम ने स्पष्ट किया है कि स्वच्छ हवा सुनिश्चित करना सभी संबंधित विभागों, उद्योगों और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है तथा नियमों के उल्लंघन पर आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

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