हलधर किसान, पटना। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने पटना में आयोजित ‘कृषि जन कल्याण संवाद’ में किसानों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं, सुझावों तथा खेती से जुड़े अनुभवों को सुना। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसान देश की आधारशिला हैं और उनकी सेवा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग, प्राकृतिक खेती, कृषि अनुसंधान और बेहतर बाजार व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है।
कार्यक्रम में बिहार के कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा, ग्रामीण विकास मंत्री श्री श्रवण कुमार, राजस्व मंत्री श्री दिलीप जायसवाल सहित वरिष्ठ अधिकारी, कृषि विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसान और ग्रामीण प्रतिनिधि मौजूद रहे।

छोटे खेतों में भी बढ़ सकती है आमदनी
श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खेती में केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय किसान को अलग-अलग गतिविधियों को एक साथ जोड़ना चाहिए। इससे जोखिम कम होता है और परिवार को सालभर आय के अलग-अलग स्रोत मिलते हैं।
उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी परिसर में अपनाए जा रहे इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल का उदाहरण देते हुए बताया कि 2 से 3 बीघे जमीन पर भी परिवार की आय को मजबूत किया जा सकता है। इस मॉडल में धान की फसल के बाद खेत को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर गेहूं, चना, सरसों और मक्का जैसी फसलों की खेती की जाती है।
इसके साथ भू-तालाब में मछली पालन, पोल्ट्री यूनिट, बतख पालन, बेल वाली सब्जियों की खेती, फलदार पौधे और चारा उत्पादन जैसी गतिविधियों को जोड़ा जाता है। इससे किसान के पास केवल फसल बेचने से ही नहीं, बल्कि पशुपालन, मछली पालन और अन्य कृषि गतिविधियों से भी आमदनी आती है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ऐसे समेकित कृषि मॉडल से कई परिवारों की वार्षिक आय लगभग 2 लाख रुपये तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह मॉडल विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है, क्योंकि कम जमीन में भी उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करके आय के कई रास्ते तैयार किए जा सकते हैं।

प्राकृतिक खेती से जमीन की सेहत सुधारने पर जोर
कृषि जन कल्याण संवाद में प्राकृतिक खेती को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। श्री चौहान ने किसानों से अपील की कि वे प्राकृतिक और उन्नत खेती के तरीकों को पहले अपनी जमीन के एक हिस्से में अपनाकर उसका परिणाम देखें। इसके बाद अनुभव के आधार पर धीरे-धीरे इसका विस्तार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और अन्य रसायनों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की सेहत प्रभावित हो रही है। ऐसे में संतुलित खेती, जैविक संसाधनों के उपयोग और प्राकृतिक खेती की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि खेती का उद्देश्य केवल वर्तमान उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जमीन की उर्वरता बनाए रखना होना चाहिए।

किसानों के उत्पादों की होगी ब्रांडिंग
श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों की मेहनत का सही मूल्य तभी मिलेगा, जब उनके उत्पादों को बाजार में उचित पहचान और बेहतर कीमत मिले। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर किसानों के जैविक और प्राकृतिक उत्पादों की मार्केटिंग और ब्रांडिंग पर काम करेंगे।
उन्होंने कहा कि बिहार के किसानों के पास कई ऐसे कृषि उत्पाद हैं, जिन्हें बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़कर देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया जा सकता है। सरकार का प्रयास रहेगा कि किसान केवल उत्पादक न रहें, बल्कि उन्हें बाजार की मांग और मूल्यवर्धन से भी जोड़ा जाए।
किसानों के अनुभवों को सुना
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने प्रगतिशील किसानों श्री रामजीत शर्मा, श्री रामकुमार विनय, सुशीला देवी और श्री सुधांशु के अनुभवों और सुझावों को सुना। उन्होंने किसानों द्वारा बताए गए अनुभवों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार जमीनी स्तर से मिलने वाले सुझावों को गंभीरता से लेगी।
श्री चौहान ने कहा कि किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझने के लिए केवल बैठकों और कार्यालयों तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें खेतों में किसानों के बीच समय बिताना पसंद है। किसानों के साथ रहकर ही उनकी वास्तविक परिस्थितियों, चुनौतियों और जीवनशैली को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
संवाद के जरिए समाधान की कोशिश
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘कृषि जन कल्याण संवाद’ केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों से सीधे जुड़ने और उनकी समस्याओं को समझने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र में अनुसंधान से निकलने वाले सफल प्रयोगों को किसानों तक पहुंचाने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उन्हें अपनाने पर जोर दे रही है।
उन्होंने बिहार की कृषि क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य की मिट्टी, पानी, जलवायु और किसानों की मेहनत को देखते हुए यहां कृषि आधारित आय को और बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं हैं। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर ऐसी योजनाओं और मॉडलों को आगे बढ़ाएंगी, जिनसे किसानों की आय में स्थायी वृद्धि हो सके।
श्री चौहान ने भरोसा दिलाया कि बिहार के किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़ी पहल को आगे भी प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल खेती का उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसान परिवार की समग्र आय और जीवनस्तर को बेहतर बनाना है। इंटीग्रेटेड फार्मिंग, प्राकृतिक खेती, कृषि अनुसंधान, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से किसानों के लिए आय के नए अवसर तैयार किए जाएंगे।
कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसान देश की ताकत हैं और किसान की समृद्धि से ही गांव, राज्य और देश की समृद्धि का रास्ता मजबूत होगा। केंद्र और बिहार सरकार के समन्वित प्रयासों से कृषि क्षेत्र में नए मॉडल विकसित कर उन्हें अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने की दिशा में काम जारी रहेगा।
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