पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का अहम फैसला; कृषि आदान व्यापारियों को बड़ी राहत
हलधर किसान चंडीगढ़। कीटनाशक के सील पैक उत्पाद में गुणवत्ता संबंधी कमी या मिसब्रांडिंग पाए जाने पर क्या उस उत्पाद को बेचने वाले डीलर या मार्केटिंग कंपनी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है? इस सवाल पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले ने कृषि आदान व्यापारियों के बीच नई उम्मीद पैदा की है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कीटनाशक सील पैक स्थिति में निर्माता कंपनी से प्राप्त हुआ है और डीलर या मार्केटिंग कंपनी का उसके निर्माण, पैकिंग अथवा लेबलिंग से कोई संबंध नहीं है, तो केवल सैंपल के मिसब्रांडेड पाए जाने के आधार पर व्यापारी को आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
मामला M/s Suminova Agri Science बनाम राज्य सरकार, CRM-M-6231 of 2020 से संबंधित है। दिए गए विवरण के अनुसार, माननीय न्यायमूर्ति यशवीर सिंह राठौर की पीठ ने 2 जनवरी 2026 को मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए वर्ष 2019 में दर्ज आपराधिक शिकायत, समन आदेश और उससे जुड़ी आगे की कार्यवाही को रद्द कर दिया।
क्या था पूरा मामला?
मामला वर्ष 2017 का है। 22 मई 2017 को पंजाब के लुधियाना जिले के खन्ना क्षेत्र में कीटनाशक निरीक्षक ने Fipronil 0.3% GR का सैंपल लिया था। यह उत्पाद M/s Vikas Organic Ind Corporation, फरीदकोट द्वारा निर्मित किया गया था और M/s Suminova Agri Science, कोटकपूरा के माध्यम से बाजार में बेचा जा रहा था।
सैंपल की जांच राज्य प्रयोगशाला में की गई। इसके बाद सेंट्रल इन्सेक्टिसाइड लैबोरेटरी, फरीदाबाद में भी जांच हुई। दोनों स्तरों की रिपोर्ट में उत्पाद को misbranded बताया गया। इसके बाद डीलर, सप्लायर, मार्केटिंग कंपनी और उसके पदाधिकारियों को मामले में आरोपी बनाते हुए समन जारी किए गए।
मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने इस बात पर विचार किया कि यदि उत्पाद पहले से ही निर्माता द्वारा सील पैक और लेबल किए गए रूप में बाजार में उपलब्ध कराया गया था, तो उसके निर्माण अथवा लेबलिंग में कोई भूमिका नहीं रखने वाले व्यापारी को किस आधार पर जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई कीटनाशक सील बंद कंटेनर में बेचा गया है और डीलर अथवा मार्केटिंग कंपनी का उसके निर्माण, पैकिंग या लेबलिंग से कोई लेना-देना नहीं है, तो केवल उत्पाद के मिसब्रांडेड पाए जाने के आधार पर उन्हें अपराध का आरोपी नहीं बनाया जा सकता।
अदालत ने यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि Insecticides Act की धारा 33 के तहत डीलर अथवा मार्केटिंग कंपनी के अधिकारियों को तभी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जब उन्हें संबंधित उत्पाद की गुणवत्ता के लिए अधिकृत अधिकारी के रूप में निर्धारित किया गया हो। दिए गए मामले में ऐसी स्थिति स्थापित नहीं हुई।
हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा जारी समन आदेश को भी “कैजुअल और मैकेनिकल” बताते हुए कहा कि बिना पर्याप्त कारण और तथ्यों पर उचित विचार किए किसी व्यक्ति को आपराधिक मामले में समन करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग हो सकता है।
व्यापारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?
इस फैसले को कृषि आदान व्यापारियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि देशभर में हजारों डीलर और खुदरा विक्रेता विभिन्न कंपनियों के सील पैक कीटनाशक किसानों को बेचते हैं। व्यापारी सामान्यतः निर्माता कंपनी से सीलबंद पैक में उत्पाद प्राप्त करता है और उसी स्थिति में किसान को उपलब्ध कराता है।
ऐसी स्थिति में यदि प्रयोगशाला जांच के दौरान उत्पाद की गुणवत्ता निर्धारित मानक से कम पाई जाती है, तो व्यापारी संगठनों का तर्क है कि निर्माण प्रक्रिया, फॉर्मूलेशन, पैकिंग और लेबलिंग से संबंधित जिम्मेदारी निर्माता की होनी चाहिए।
संजय कुमार रघुवंशी ने व्यापारियों से क्या कहा?
एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन, नई दिल्ली के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश सचिव संजय कुमार रघुवंशी, उज्जैन ने इस फैसले को कृषि आदान व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण राहत बताते हुए कहा कि जो व्यापारी अपनी दुकान से कंपनियों के सील पैक एवं उच्च गुणवत्ता वाले कीटनाशकों की बिक्री करते हैं, उन्हें केवल इस आधार पर दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए कि जांच के दौरान उत्पाद अमानक या मिसब्रांडेड पाया गया है।
उन्होंने कहा कि यदि व्यापारी ने किसी अधिकृत कंपनी से कीटनाशक सील बंद पैक में खरीदा है और उसी स्थिति में किसान को बेचा है, तो उत्पाद के निर्माण, फॉर्मूलेशन, पैकिंग और लेबलिंग की जिम्मेदारी व्यापारी की नहीं होती। ऐसी स्थिति में गुणवत्ता संबंधी कमी के लिए संबंधित निर्माता कंपनी की भूमिका की जांच की जानी चाहिए।
श्री रघुवंशी ने सभी कृषि आदान व्यापारियों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने प्रतिष्ठान से केवल अच्छी एवं विश्वसनीय कंपनियों के उच्च गुणवत्ता वाले कृषि आदान ही बेचें। साथ ही कंपनियों से खरीदे गए उत्पादों के बिल, बैच नंबर, लाइसेंस संबंधी दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की जांच या कानूनी विवाद की स्थिति में व्यापारी के पास अपनी खरीद और बिक्री का प्रमाण उपलब्ध रहे।
एक अन्य मामले का भी दिया गया हवाला
व्यापारी संगठनों की ओर से एक अन्य मामले का हवाला देते हुए बताया गया है कि Chlorpyrifos 50% का एक बैच गुणवत्ता परीक्षण में निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं पाया गया था। संगठन के अनुसार, एक ही बैच के उत्पाद के विश्लेषण में अलग-अलग परिणाम सामने आए—एक जांच में मात्रा 45.93 प्रतिशत, जबकि दोबारा विश्लेषण में 61.13 प्रतिशत बताई गई।
संगठन का कहना है कि ऐसे मामलों में भी सील पैक उत्पाद बेचने वाले व्यापारी की वास्तविक भूमिका और जिम्मेदारी का परीक्षण किया जाना जरूरी है।
व्यापारी संगठनों ने दी यह सलाह

कृषि आदान विक्रेता संगठनों ने इस फैसले को ईमानदारी से कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण राहत बताया है। कृषि आदान विक्रेता संघ मध्य प्रदेश, भोपाल के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय संगठन के उपाध्यक्ष मानसिंह राजपूत, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं प्रदेश सचिव संजय कुमार रघुवंशी, सदस्यता अभियान प्रभारी विनोद जैन तथा प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णा दुबे ने व्यापारियों से अपील की है कि वे अपने प्रतिष्ठानों से केवल उच्च गुणवत्ता वाले और विश्वसनीय कंपनियों के कृषि आदान ही बेचें।
संगठन ने व्यापारियों से यह भी कहा है कि कंपनियों से प्राप्त सील पैक उत्पादों के बिल, बैच नंबर, खरीद दस्तावेज और अन्य आवश्यक रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। इससे किसी भी विवाद की स्थिति में व्यापारी अपने स्तर पर यह प्रमाणित कर सकेगा कि उसने उत्पाद को निर्माता कंपनी से सील पैक अवस्था में खरीदा और उसी स्थिति में किसान को बेचा था।
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