ऑर्गेनिक फिश फार्मिंग की एसओपी होगी लॉन्च, मछली पालकों को मिलेंगे किसान क्रेडिट कार्ड और आर्थिक सहायता के चेक; गंगटोक और मंगन जिलों में योजनाओं की करेंगे समीक्षा
हलधर किसान | नई दिल्ली। पूर्वोत्तर भारत में मत्स्य पालन और जलीय कृषि को बढ़ावा देने के साथ मछली पालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह 2 से 3 नवंबर 2026 तक सिक्किम के गंगटोक और मंगन जिलों के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करेंगे और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत 375 लाख रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे।
केंद्रीय मंत्री का यह दौरा पूर्वोत्तर राज्यों में विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर उनकी प्रगति का आकलन करने के लिए प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में बनाई गई व्यवस्था का हिस्सा है। इस दौरान योजनाओं के लाभार्थियों, मछली पालकों, सहकारी समितियों और संबंधित विभागों के अधिकारियों से सीधा संवाद किया जाएगा, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं और स्थानीय आवश्यकताओं को समझकर उनके समाधान की दिशा में कदम उठाए जा सकें।
ऑर्गेनिक फिश फार्मिंग को मिलेगा प्रोत्साहन
दौरे का एक प्रमुख आकर्षण ऑर्गेनिक फिश फार्मिंग (जैविक मत्स्य पालन) के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का शुभारंभ होगा। इसके माध्यम से सिक्किम सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र में जैविक मत्स्य उत्पादन को व्यवस्थित, प्रमाणित और बाजारोन्मुख बनाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
सिक्किम प्राकृतिक रूप से स्वच्छ जल संसाधनों, विविध जलीय पारिस्थितिकी तंत्र और समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। ऐसे में यहां जैविक मत्स्य पालन को विकसित करने की व्यापक संभावनाएं हैं। यदि उत्पादन के साथ गुणवत्ता प्रमाणन, उत्पादों की ट्रेसबिलिटी, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की उचित व्यवस्था विकसित की जाती है, तो सिक्किम के मत्स्य उत्पाद घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं।
इससे मछली पालकों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
मछली पालकों को मिलेंगे केसीसी और सहायता के चेक
केंद्रीय मंत्री अपने दौरे के दौरान मछली पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) वितरित करेंगे। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री मत्स्य उत्पादन योजना (एमएमएमयूवाई) के तहत पात्र मछली पालकों को चेक प्रदान किए जाएंगे। इन पहलों का उद्देश्य मत्स्य पालन से जुड़े किसानों और उद्यमियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना तथा उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद करना है।
केसीसी के माध्यम से मत्स्य पालकों को उनकी कार्यशील पूंजी संबंधी आवश्यकताओं के लिए संस्थागत ऋण सुविधा प्राप्त करने में मदद मिलती है। इससे मछली पालन के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता बेहतर हो सकती है और छोटे एवं सीमांत मत्स्य पालकों को अपने व्यवसाय का विस्तार करने का अवसर मिलेगा।
लाइव फिश वेंडिंग सेंटर का भी करेंगे निरीक्षण
केंद्रीय मंत्री मंगशिला स्थित लाइव फिश वेंडिंग सेंटर का दौरा करेंगे। यहां वे मत्स्य पालक सहकारी समिति के सदस्यों से बातचीत कर मछली के विपणन, बिक्री व्यवस्था और सहकारी गतिविधियों से जुड़ी जमीनी चुनौतियों की जानकारी प्राप्त करेंगे।
लाइव फिश वेंडिंग सेंटर जैसी सुविधाएं मछली की ताजा बिक्री को प्रोत्साहित करने, उपभोक्ताओं तक बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद पहुंचाने और उत्पादकों को बाजार से सीधे जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
इसके बाद मंत्री डीएसी, मंगन में मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत संचालित कार्यों की समीक्षा करेंगे। इस दौरान विभागीय अधिकारियों और संबंधित हितधारकों से योजनाओं की प्रगति, बुनियादी सुविधाओं की स्थिति तथा क्रियान्वयन में आ रही कठिनाइयों पर चर्चा की जाएगी।
सिक्किम और मेघालय में जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर
केंद्र सरकार ने देश में मत्स्य पालन की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए क्लस्टर आधारित विकास मॉडल अपनाया है। इसके अंतर्गत उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन को एकीकृत रूप से विकसित किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत देशभर में मत्स्य उत्पादन और प्रसंस्करण से जुड़े 34 क्लस्टरों को अधिसूचित किया गया है। इनमें सिक्किम और मेघालय के जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर भी शामिल हैं।
क्लस्टर आधारित व्यवस्था का उद्देश्य किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ उत्पादों के संग्रहण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, गुणवत्ता प्रमाणन और विपणन की सुविधाओं को विकसित करना है। इससे छोटे उत्पादकों को भी संगठित बाजार व्यवस्था से जुड़ने का अवसर मिलता है।
सरकार का मानना है कि इस मॉडल के माध्यम से विशिष्ट और उच्च मूल्य वाले मत्स्य उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है। साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता और आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता सुनिश्चित कर मछली पालकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने में सहायता मिलेगी।
वैश्विक बाजार में पूर्वोत्तर के मत्स्य उत्पादों की संभावनाएं
पूर्वोत्तर भारत में मीठे पानी के प्रचुर संसाधन और अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियां मत्स्य पालन के विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती हैं। यहां जैविक और प्रीमियम श्रेणी के मत्स्य उत्पादों के उत्पादन की संभावनाएं मौजूद हैं। हालांकि इन संभावनाओं का पूरा लाभ उठाने के लिए उत्पादन के साथ-साथ वैज्ञानिक प्रबंधन, प्रमाणन, ट्रेसबिलिटी, प्रसंस्करण और बाजार संपर्क को मजबूत करना आवश्यक है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा के मानकों का विशेष महत्व है। ऐसे में यदि पूर्वोत्तर क्षेत्र के मत्स्य उत्पादों को निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार किया जाए, तो उनके निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। इससे स्थानीय उत्पादकों को बड़े बाजारों तक पहुंच मिलेगी और मत्स्य पालन से जुड़ी पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूती मिलेगी।
अधिकारियों और मत्स्य क्षेत्र के प्रतिनिधियों की रहेगी भागीदारी
केंद्रीय मंत्री के इस दौरे में सिक्किम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, मंगन जिला प्रशासन, भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग, संबंधित मंत्रालयों और मत्स्य पालन से जुड़े भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) संस्थानों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा मछली पालक, सहकारी समितियों और मत्स्य पालक उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधि भी विभिन्न बैठकों और संवाद कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।
कुल मिलाकर, केंद्रीय मंत्री का यह दौरा सिक्किम सहित पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में मत्स्य पालन को आधुनिक, टिकाऊ और बाजारोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 375 लाख रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन, जैविक मत्स्य पालन के लिए एसओपी का शुभारंभ, केसीसी वितरण और मछली पालकों के साथ सीधा संवाद जैसी पहलें क्षेत्र में मत्स्य पालन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में सहायक हो सकती हैं। इससे न केवल मछली पालकों की आय बढ़ाने की संभावनाएं बनेंगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार, उद्यमिता और प्रीमियम मत्स्य उत्पादों के बाजार को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
यह भी पढेंः- भोपाल में मत्स्य निवेशक एवं निर्यातक सम्मेलन-2026 का आयोजन, मत्स्य क्षेत्र में निवेश और निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
