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एग्रो इनपुट को UPI के MDR शुल्क से मुक्त रखने की मांग, ऑल इंडिया एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को लिखा पत्र

Demand to exempt agro inputs from UPI MDR charges All India Agro Input Dealers Association writes to the Prime Minister and Finance Minister

राष्ट्रीय अध्यक्ष मनमोहन कलन्त्री ने खाद, बीज, कीटनाशक एवं अन्य कृषि आदानों के लिए विशेष छूट की उठाई मांग

हलधर किसान नई दिल्ली। देशभर के किसानों और कृषि आदान विक्रेताओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर ऑल इंडिया एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन ने केंद्र सरकार के समक्ष अपनी मांग रखी है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मनमोहन कलन्त्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर मांग की है कि खाद, बीज, कीटनाशक दवाइयां तथा अन्य सभी प्रकार के एग्रो इनपुट को प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क से मुक्त रखा जाए।

संगठन का कहना है कि कृषि आदान सीधे तौर पर देश के किसानों और कृषि व्यवस्था से जुड़े उत्पाद हैं। किसानों को खेती के लिए खाद, बीज, कीटनाशक, कृषि दवाइयां तथा अन्य आवश्यक कृषि सामग्री खरीदनी होती है। ऐसे में इन उत्पादों की बिक्री पर यदि डिजिटल भुगतान के लिए MDR शुल्क लागू होता है तो उसका प्रभाव कृषि आदान विक्रेताओं के कारोबार के साथ-साथ किसानों तक भी पड़ सकता है।

किसानों से जुड़े उत्पादों पर विशेष राहत की मांग

ऑल इंडिया एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनमोहन कलन्त्री द्वारा भेजे गए पत्र में कृषि आदानों को MDR से मुक्त रखने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया है। संगठन का तर्क है कि खाद, बीज और कीटनाशक जैसे उत्पाद सामान्य उपभोक्ता वस्तुओं की श्रेणी में नहीं आते, बल्कि सीधे तौर पर कृषि उत्पादन और किसानों की आय से जुड़े हुए हैं।

संगठन के अनुसार कृषि आदान विक्रेताओं का मार्जिन पहले से ही सीमित रहता है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लागू होने से व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है। विशेष रूप से छोटे और मध्यम स्तर के कृषि आदान विक्रेताओं के लिए यह अतिरिक्त वित्तीय भार चुनौती पैदा कर सकता है।

एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह किया है कि किसानों की आवश्यकता और कृषि क्षेत्र की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एग्रो इनपुट कारोबार को प्रस्तावित MDR व्यवस्था में विशेष छूट दी जाए।

डिजिटल भुगतान बढ़ने के बीच उठी मांग

देश में डिजिटल भुगतान का उपयोग लगातार बढ़ रहा है और किसान भी अब कृषि सामग्री की खरीदारी के दौरान UPI सहित विभिन्न डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कृषि आदान विक्रेताओं के लिए भी डिजिटल भुगतान एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।

ऐसी स्थिति में संगठन का कहना है कि यदि भविष्य में UPI अथवा अन्य डिजिटल भुगतान पर MDR लागू किया जाता है तो कृषि आदान क्षेत्र के लिए अलग प्रावधान किया जाना आवश्यक है। संगठन चाहता है कि खाद, बीज, कीटनाशक दवाइयों और अन्य कृषि आदानों की खरीद-बिक्री से जुड़े डिजिटल लेनदेन को MDR से बाहर रखा जाए, ताकि किसानों और कृषि व्यापार से जुड़े लोगों पर अतिरिक्त लागत का भार न पड़े।

डीलर मार्जिन कम होने का दिया तर्क

एसोसिएशन ने अपने पत्र में कृषि आदान विक्रेताओं के सीमित मार्जिन का भी उल्लेख किया है। संगठन का कहना है कि कृषि क्षेत्र में काम करने वाले डीलरों को कई प्रकार की लागत का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद उनका व्यापारिक मार्जिन सीमित रहता है।

ऐसे में डिजिटल भुगतान पर MDR जैसी अतिरिक्त लागत लागू होने से विक्रेताओं के लिए आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। संगठन का मानना है कि कृषि आदान विक्रेताओं को MDR से छूट देने से व्यापारियों को राहत मिलेगी और किसानों को भी कृषि सामग्री खरीदने में डिजिटल भुगतान की सुविधा बिना अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध कराई जा सकेगी।

जिला पदाधिकारियों से भी मांग को प्रमुखता से उठाने की अपील

ऑल इंडिया एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री संजय कुमार रघुवंशी, उज्जैन ने संगठन के सभी जिला पदाधिकारियों से अपील की है कि इस महत्वपूर्ण मांग को अपने-अपने जिलों में प्रमुखता से उठाया जाए और समाचार माध्यमों के जरिए सरकार तथा संबंधित अधिकारियों तक संगठन की बात पहुंचाई जाए।

उन्होंने कहा कि कृषि आदान विक्रेताओं से जुड़े इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर सामने लाने की आवश्यकता है, ताकि सरकार के संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस विषय की ओर आकर्षित हो सके। जिला स्तर पर संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों से भी अपेक्षा की गई है कि वे इस मांग को किसानों और कृषि व्यापार से जुड़े लोगों के बीच पहुंचाएं।

कृषि व्यापार और किसानों के हित से जुड़ा मुद्दा

एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन का कहना है कि कृषि आदान विक्रेता किसान और कृषि कंपनियों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करते हैं। किसान को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्री उपलब्ध कराने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

संगठन का मत है कि कृषि आदान क्षेत्र पर किसी भी अतिरिक्त वित्तीय भार का प्रभाव पूरे कृषि आपूर्ति तंत्र पर पड़ सकता है। इसलिए खाद, बीज, कीटनाशक एवं अन्य कृषि आदानों को MDR से मुक्त रखने की मांग को किसान हित और कृषि व्यापार दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है।

ऑल इंडिया एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि प्रस्तावित MDR व्यवस्था पर विचार करते समय कृषि क्षेत्र की विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए और एग्रो इनपुट को शुरुआत से ही MDR शुल्क से मुक्त रखने का प्रावधान किया जाए। अब संगठन की नजर सरकार और वित्त मंत्रालय की ओर से इस मांग पर होने वाली आगामी कार्रवाई पर है।

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