हलधर किसान इंदौर। जिले में कृषि आदान (खाद, बीज एवं कीटनाशक) व्यापारियों ने अपनी लंबित समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर एकजुटता का परिचय देते हुए कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा।
यह ज्ञापन Agro Input Dealers Association (AIDA), नई दिल्ली के आह्वान पर देशव्यापी एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल के तहत 27 अप्रैल 2026 को सौंपा गया, जिसमें इंदौर जिले के सैकड़ों व्यापारी शामिल हुए।

जिला अध्यक्ष श्री कृष्णा दुबे, सचिव जितेंद्र जैन, उपाध्यक्ष अरुण खंडेलवाल एवं आशीष लाठी, कोषाध्यक्ष अजय गुप्ता सहित संगठन के कई पदाधिकारियों—सूरज गुप्ता, किशोर पुराणिक, कमल बिरला, सुनील पाटीदार, अभिषेक दुबे, भरत खत्री, विनोद चौहान, जितेंद्र मुच्छाला, गोपाल सांखला, निखिल जैन, राजेश चौहान, ओमप्रकाश जोहर, रवि पाटिल, दिनेश परमार एवं महेश गुप्ता—की उपस्थिति में कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। व्यापारियों ने बताया कि पिछले 10 वर्षों से वे विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं, लेकिन बार-बार निवेदन के बावजूद समाधान नहीं हुआ।

ज्ञापन में प्रमुख रूप से खाद पर जबरन लिंकिंग की समस्या को उठाया गया। व्यापारियों का कहना है कि उर्वरक निर्माता कंपनियां सब्सिडी वाले खाद के साथ अन्य गैर-जरूरी उत्पादों को जोड़कर बेचने का दबाव बनाती हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने इस व्यवस्था को अपराध घोषित करने और पूरे देश में इस पर रोक लगाने की मांग की।

इसके अलावा, खाद की डिलीवरी व्यवस्था में सुधार की मांग भी प्रमुख रही। वर्तमान में यूरिया जैसे उर्वरकों की आपूर्ति रेल-हेड तक ही सीमित रहती है, जिससे डीलरों को प्रति बैग 40 से 50 रुपये अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ता है। व्यापारियों ने मांग की कि कंपनियां खाद की आपूर्ति सीधे उनके बिक्री केंद्र तक सुनिश्चित करें।

बढ़ती महंगाई और लागत को देखते हुए व्यापारियों ने उर्वरकों पर डीलर मार्जिन को बढ़ाकर न्यूनतम 8 प्रतिशत करने की मांग भी उठाई। साथ ही ‘साथी’ (SATHI) पोर्टल को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों के खुदरा विक्रेताओं के लिए इस पोर्टल को वैकल्पिक बनाने और इसकी अनिवार्यता केवल निर्माताओं एवं थोक विक्रेताओं तक सीमित रखने की मांग की गई।

व्यापारियों ने HTBT बीज नीति को लेकर भी स्पष्टता और सख्ती की आवश्यकता जताई। उनका कहना है कि अवैध बीजों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाई जाए या फिर अधिकृत डीलरों को नियंत्रित तरीके से इसकी बिक्री की अनुमति दी जाए।

एक अन्य महत्वपूर्ण मांग में यह भी शामिल रहा कि खाद, बीज एवं कीटनाशकों के सीलबंद पैकिंग में यदि नमूना फेल होता है तो विक्रेता को दोषी न माना जाए, बल्कि उसे केवल साक्षी का दर्जा दिया जाए। क्योंकि विक्रेता केवल लाइसेंस के आधार पर सीलबंद उत्पाद बेचता है और गुणवत्ता की जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की होनी चाहिए।

इसके अलावा, एक्सपायर्ड कीटनाशकों को लेकर भी व्यापारियों ने चिंता जताई और कंपनियों के लिए पुराने स्टॉक को वापस लेना अनिवार्य करने की मांग रखी।
इंदौर जिले के विभिन्न तहसील मुख्यालयों पर भी व्यापारियों ने ज्ञापन सौंपा। राऊ तहसील में जिला उपाध्यक्ष विवेक वाणी एवं राजेश डिंगू के नेतृत्व में तहसील कार्यालय में ज्ञापन दिया गया। गौतमपुरा में प्रांजल भाई और राकेश भाई के नेतृत्व में व्यापारियों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। देपालपुर में आरिफ भाई, सचिन भाई और बलदेव भाई के नेतृत्व में व्यापारियों ने अपनी मांगें रखीं।
खुड़ैल तहसील में कंपेल के प्रेम चौधरी के नेतृत्व में व्यापारियों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। वहीं सांवेर तहसील में जिला अध्यक्ष कृष्णा दुबे और उपाध्यक्ष अरुण खंडेलवाल के साथ संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने तहसीलदार को ज्ञापन दिया। महू तहसील में रूपेश अग्रवाल और राजेंद्र यादव सहित अन्य व्यापारियों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर प्रशासन को अपनी समस्याओं से अवगत कराया।
व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आगामी समय में बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उन्होंने सरकार से जल्द हस्तक्षेप कर व्यापारियों को राहत देने की अपील की।
