नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026। विश्व गैंडा दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (एनजेडपी), नई दिल्ली ने गैंडा संरक्षण, वन्यजीव जागरूकता और जैव विविधता संरक्षण को लेकर विभिन्न जागरूकता एवं शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम लोगों के साथ-साथ स्कूली विद्यार्थियों और शिक्षकों को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ना तथा गैंडों के संरक्षण के प्रति जागरूकता को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देना रहा। इस अवसर पर राष्ट्रीय प्राणी उद्यान ने अपने स्कूल आउटरीच कार्यक्रम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए पहली बार इको-क्लब के प्रभारी शिक्षकों के लिए विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया।

इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम में दिल्ली के 12 स्कूलों के इको-क्लब प्रभारी शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के निदेशक ने शिक्षकों के साथ संवाद किया और पर्यावरण शिक्षा को स्कूल स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर चर्चा की। उन्होंने वन्यजीव एवं जैव विविधता संरक्षण के प्रति बच्चों में रुचि विकसित करने के लिए चिड़ियाघर और स्कूलों के बीच निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय जानकारी तक सीमित रखने के बजाय उन्हें प्रकृति, वन्यजीव और पर्यावरण से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया।
शिक्षकों को पर्यावरण शिक्षा की विभिन्न पहलों से कराया परिचित
ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को राष्ट्रीय प्राणी उद्यान की विभिन्न पर्यावरण शिक्षा पहलों, प्रकृति आधारित शैक्षणिक गतिविधियों, नागरिक विज्ञान कार्यक्रमों और अन्य आउटरीच गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई। शिक्षकों को बताया गया कि इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थी पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के विषयों को व्यवहारिक रूप से समझ सकते हैं।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य स्कूलों की भागीदारी को और बढ़ाना भी रहा। राष्ट्रीय प्राणी उद्यान द्वारा महत्वपूर्ण पर्यावरण दिवसों तथा अन्य प्रासंगिक अवसरों पर आयोजित की जाने वाली कार्यशालाओं, जागरूकता कार्यक्रमों, प्रतियोगिताओं और अन्य गतिविधियों में अधिक से अधिक स्कूलों को जोड़ने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इको-क्लब शिक्षकों को इन कार्यक्रमों से जोड़कर विद्यार्थियों तक संरक्षण का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया।

चित्र गतिविधि और जागरूकता वार्ता से जोड़े गए आगंतुक
ओरिएंटेशन कार्यक्रम के बाद राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के निकास द्वार पर आम आगंतुकों के लिए चित्र गतिविधि और जन जागरूकता वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने आगंतुकों से सीधे संवाद करते हुए गैंडों के प्राकृतिक जीवन, उनके पारिस्थितिक महत्व, संरक्षण स्थिति तथा जंगली गैंडों की आबादी के सामने मौजूद विभिन्न चुनौतियों के बारे में जानकारी साझा की।
आगंतुकों को समझाया गया कि गैंडे केवल एक महत्वपूर्ण वन्यजीव प्रजाति ही नहीं हैं, बल्कि वे अपने प्राकृतिक आवास के पारिस्थितिक संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके संरक्षण के लिए प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा, अवैध शिकार पर नियंत्रण तथा वन्यजीवों के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।
चित्र गतिविधि ने विशेष रूप से बच्चों और युवा आगंतुकों को आकर्षित किया। इसके माध्यम से उन्हें रचनात्मक तरीके से गैंडा संरक्षण और वन्यजीवों के महत्व से जोड़ने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में स्कूली शिक्षकों और चिड़ियाघर में आने वाले आगंतुकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
गैंडा बाड़े पर हुई ‘कीपर्स टॉक’
विश्व गैंडा दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में गैंडे के बाड़े के पास विशेष ‘कीपर्स टॉक’ यानी देखभालकर्ताओं की वार्ता का भी आयोजन किया गया। इसमें चिड़ियाघर के देखभालकर्ताओं ने आगंतुकों से बातचीत की और राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में गैंडों की देखभाल से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी साझा की।
देखभालकर्ताओं ने गैंडों के व्यवहार, खान-पान की आदतों, दैनिक देखभाल और वैज्ञानिक प्रबंधन के बारे में आगंतुकों को जानकारी दी। इस तरह आगंतुकों को चिड़ियाघर में वन्यजीवों की देखभाल के पीछे अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला। ‘कीपर्स टॉक’ के माध्यम से वन्यजीवों के बारे में सामान्य जानकारी के साथ-साथ उनके संरक्षण और प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं को भी लोगों तक पहुंचाया गया।
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में ‘अंजुहा’ है एकमात्र वयस्क मादा गैंडा

राष्ट्रीय प्राणी उद्यान, नई दिल्ली के वर्तमान संग्रह में ‘अंजुहा’ नाम की एक वयस्क मादा गैंडा मौजूद है। विश्व गैंडा दिवस के कार्यक्रमों के दौरान उसके व्यवहार, खान-पान और दैनिक देखभाल से जुड़े पहलुओं की जानकारी भी आगंतुकों के लिए आकर्षण का विषय रही।
विश्व गैंडा दिवस के अवसर पर आयोजित इन कार्यक्रमों ने संरक्षण संदेश को चिड़ियाघर की सीमाओं से आगे स्कूलों और आम समाज तक पहुंचाने का अवसर प्रदान किया। विशेष रूप से इको-क्लब शिक्षकों के लिए आयोजित पहला ओरिएंटेशन कार्यक्रम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा, क्योंकि शिक्षक विद्यार्थियों तक पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संदेश को प्रभावी ढंग से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान की इस पहल ने गैंडा संरक्षण के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण शिक्षा में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ाने पर जोर दिया। स्कूलों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और आम आगंतुकों को एक मंच पर जोड़कर आयोजित गतिविधियों ने यह संदेश दिया कि वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी से ही संरक्षण के प्रयासों को व्यापक और प्रभावी बनाया जा सकता है।
इस प्रकार विश्व गैंडा दिवस 2026 पर राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में आयोजित गतिविधियां केवल एक दिन के जागरूकता कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि स्कूलों के साथ दीर्घकालिक सहयोग, पर्यावरण शिक्षा और नागरिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आईं।
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