सैंपल फेल होने पर दोष कंपनी का माना जाए, न कि विक्रेता का — कृषि आदान विक्रेताओं की मांग

If the sample fails the fault should be of the company and not the seller demand of agricultural input sellers

कृषि आदान विक्रेताओं ने एकजुट होकर किया सांकेतिक हड़ताल, सौंपा प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन

हलधर किसान, रतलाम। जिले के कृषि आदान विक्रेताओं ने व्यापार से जुड़ी गंभीर समस्याओं को लेकर एकजुटता दिखाते हुए सांकेतिक हड़ताल की। व्यापारियों ने जिला मुख्यालय पर सभा कर केंद्र एवं राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। सभा के बाद रैली निकालते हुए कलेक्टोरेट पहुंचे और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

मुख्य मांगें: टैगिंग प्रथा बंद हो, दोषी माना जाए निर्माता को

ज्ञापन में प्रमुख रूप से यह मांग की गई कि उर्वरक कंपनियों द्वारा यूरिया, डीएपी और एनपीके के साथ अनिवार्य टैगिंग की जो प्रथा लागू की गई है, उसे तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए। साथ ही यह भी मांग की गई कि यदि सैंपल फेल होता है, तो सील-पैक उत्पाद बेचने वाले विक्रेता को नहीं, बल्कि निर्माता कंपनी को दोषी माना जाए।

विक्रेताओं ने स्पष्ट किया कि वे उत्पाद कंपनियों से सील और पैक बंद खाद, बीज और कीटनाशक खरीदते हैं और उसी हालत में किसानों को बेचते हैं। फिर भी जब किसी उत्पाद का सैंपल फेल होता है, तो विभागीय कार्रवाई सीधे विक्रेता पर की जाती है। इससे विक्रेताओं को अनुचित रूप से दोषी ठहराया जाता है, जो सरासर अन्याय है।

“हम उत्पाद निर्माता नहीं, केवल वितरक हैं” – श्रीकृष्णा दुबे

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विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए कृषि आदान विक्रेता संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीकृष्णा दुबे ने कहा,

“हम विक्रेता हैं, उत्पाद निर्माता नहीं। वर्तमान में सरकार द्वारा लाए जा रहे नियमों से कृषि व्यापार पर अनावश्यक दबाव बढ़ रहा है। यदि किसी विदेशी या राष्ट्रीय कंपनी का उत्पाद अमानक निकलता है, तो जिम्मेदारी निर्माता और अनुमति देने वाली एजेंसियों की बनती है, न कि विक्रेता की।”

बांगरोद में घटिया उत्पाद का मुद्दा भी उठाया

ज्ञापन में यह भी बताया गया कि बांगरोद क्षेत्र में एक फर्म द्वारा बहुराष्ट्रीय कंपनी के नाम से घटिया गुणवत्ता वाले उत्पाद किसानों को बेचे गए। इसकी शिकायत के बाद भी प्रशासन ने केवल खानापूर्ति की। विक्रेताओं ने इस पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

प्रदर्शन में शामिल प्रमुख पदाधिकारी

इस प्रदर्शन में संघ के संरक्षक विमल मांडोत, अध्यक्ष जानकीदास बैरागी, उपाध्यक्ष बुरहान लुकमानी, सुमित रांका, विजय गुदानलिया, आनंद माहेश्वरी, मांगीलाल रेगा, कुतुबुद्दीन रावटीवाला, कांतिलाल मेहता, अर्जुन जाट, अमित रांका, निलेश टांक, अंतिम अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में विक्रेता शामिल हुए।

“मांगें नहीं मानी तो होगा अनिश्चितकालीन आंदोलन” – रमेश गर्ग

संघ के जिलाध्यक्ष रमेश गर्ग ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन और सरकार ने शीघ्र ही इन मांगों पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की, तो आने वाले समय में अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।

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