84 साल  बाद दीपावली पर बन रहा दुर्लभ संयोग, बनेगा शिववास योग का संयोग  ज्योतिष, अजमेर।

After 84 years a rare coincidence is taking place on Diwali the combination of Shivavas Yoga will be formed Astrology Ajmer

हलधर किसान, अजमेर। सनातन धर्म में दीवाली  पर्व का खास महत्व है। यह सबसे बड़ेत्यौहारों में से एक है।  कार्तिक अमावस्या तिथि पर मनाए जाने वाला यह त्यौहार देवी मां लक्ष्मी , कुबेर और भगवान गणेश को समर्पित होता है।  
ज्योतिषाचार्य सुदीप जैन (सोनी) के अनुसार 84 साल बाद दीपावली पर दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह संयोग साल 1941 के लगभग समान है। इन योग में मां लक्ष्मी की पूजा करने से दोगुना फल मिलेगा। आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं.
 पांच दिवसीय पर्व की शुरुआत 17 अक्टूबर को बछ बारस से होगी। 18 अक्टूबर  शनिवार के दिन धनतेरस की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 07.16 से लेकर 08.20 बजे तक रहेगाण्। वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह की अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 03 बजकर 44 मिनट से शुरू होगी और 21 अक्टूबर को सुबह 05 बजकर 54 मिनट पर अमावस्या तिथि की समाप्ति होगी। दीवाली का त्योहार पूर्ण अमावस्या तिथि पर मनाया जाात है। 21 अक्टूबर को संध्याकाल से कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। इसके लिए 20 अक्टूबर को दीवाली मनाना उचित होगा। हालांकि, दीवाली की तिथि के लिए आप स्थानीय पंचांग साल 1941 का पंचांग
वैदिक पंचांग गणना के अनुसारए साल 1941 में सोमवार 20 अक्टूबर को दीवाली मनाई गई थी। इस दिन अमावस्या का संयोग रात 08 बजकर 50 मिनट तक था। इसके बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हुई थी। वहीं, पूजा का समय भी रात 08 बजकर 14 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 50 मिनट तक था। साल 1941 में दीवाली के दिन शिववास योग का संयोग बना था। वहीं, 2025 में दीवाली के दिन शिववास योग का संयोग बनेगा। वहीं, 1941 में चित्रा नक्षत्र का संयोग भी था। कुल मिलाकर कहें तो 84 साल बाद समान दिन, नक्षत्र और योग में दीवाली मनाई जाएगी।
  पंचांग
सूर्योदय- सुबह 06 बजकर 25 मिनट पर
सूर्यास्त- शाम 05 बजकर 46 मिनट पर
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 44 मिनट से 05 बजकर 34 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 01 बजकर 59 मिनट से 02 बजकर 45 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 05 बजकर 46 मिनट से 06 बजकर 12 मिनट तक
निशिता मुहूर्त- रात 11 बजकर 41 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक

कार्तिक अमावस्या तिथि यानी दीवाली पर पूजा के लिए शुभ समय संध्याकाल में 07 बजकर 08 मिनट से लेकर 08 बजकर 18 मिनट तक है। वहीं, पूजा के लिए प्रदोष काल शाम 05 बजकर 46 मिनट से लेकर 08 बजकर 18 मिनट तक है। जबकि, वृषभ काल शाम 07 बजकर 08 मिनट से लेकर 09 बजकर 03 मिनट तक है। निशिता काल में देवी मां लक्ष्मी की पूजा का समय रात 11 बजकर 41 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक है। इस दौरान साधक सुविधा अनुसार समय पर देवी मां लक्ष्मी की पूजा और उपासना कर सकते हैं।

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ज्योतिषाचार्य सुदीप जैन (सोनी)

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